अंडे भी करते हैं बातें, खतरा महसूस होते ही एक-दूसरे को अलर्ट करते हैं, जानिए कैसे

नई दिल्ली: आपने ये सुना होगा कि किसी भी खतरे की आहट सबसे पहले जानवरों और पक्षियों को लगती है। लेकिन क्या आपको पता है अंडे भी ऐसे खतरे को पहले ही भाप लेते हैं। अब आप सोचेंगे कैसे? दरअसल, स्पेन की विगो यूनिवर्सिटी के रिसर्च में यह बात सामने आई है।

शोध के मुताबिक, मां से खतरे की आहट मिलने पर अंडे वाइब्रेट होकर एक-दूसरे को अलर्ट करते हैं। ऐसे भ्रूण खतरा दूर होने के बाद ही अंडे से बाहर निकलते हैं। शोधकर्ताओं ने यह शोध 90 अंडों पर किया है। इस अध्ययन पर ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि पक्षियों और मगरमच्छ के अंडे आपस में बात करते हैं। ऐसा कुछ समय पहले कीटों में भी देखा गया था।

कैसे किया अंड़ों पर शोध-
शोधकर्ताओं के मुताबिक, खतरे ही आहट मिलने पर एक अंडा बगल वाले अंडे को अलर्ट करता है ताकि अगर उसने खतरे को नहीं भांपा है तो सावधान हो जाए। इसे समझने के लिए चिड़िया के अंडों के बीच होने वाली ध्वनि का अध्ययन किया गया।

शोध के दौरान चिड़िया को खतरे का आभास कराया गया। इस दौरान देखा गया कि वह आवाज से अंडों को अलर्ट करती है। घोसले में रखे चिड़िया के दो अंडों में वाइब्रेशन हुआ। ठीक ऐसा ही तीसरे अंडे के साथ किया लेकिन उसे साउंडप्रूफ कमरे में रखा। लेकिन इस अंडे पर कोई असर नहीं दिखा। शोध के मुताबिक, खतरे की स्थिति में अंडे आवाज करने से ज्यादा वाइब्रेट होते हैं। इनमें पल रहे चूजे दूसरों के मुकाबले, देरी से अंडे से बाहर निकलते हैं।

खतरे से जूझने और देरी से बाहर आने के कारण इन चूजों में स्ट्रेस हार्मोन का स्तर दूसरे चूजों के मुकाबले ज्यादा होता है। शिकार होने जैसी स्थिति में ये चूजे ज्यादा तेज आवाज चिल्लाते हैं।शोधकर्ताओं का कहना है, भ्रूण की ये आवाज वाइब्रेशन के रूप में एक-दूसरे के लिए भाषा की तरह काम करती है।

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