अगर आपका बच्चा भी मोबाइल पर बिता रहा 4 घंटे से ज्यादा वक्त तो जरुर पढ़े ये खबर..

मोबाइल पर ज्यादा समय बिताने की लत से बच्चों की नजर कमजोर हो रही है। देखने में दिक्कत आ रही है और आंखों से डबल दिखने के साथ-साथ उनमें से कुछ बच्चों में भेंगापन भी हो रहा है।

पीजीआई के एडवांस आई केयर सेंटर में असिस्टेंट प्रोफेसर  ने बताया कि हम लोग अकसर पेरेंट्स काे सलाह देते हैं कि बच्चों को स्मार्ट फोन खेलने के लिए न दें। लेकिन पेरेंट्स सलाह की अनदेखी कर देते हैं। फिर आकर कहते हैं कि बच्चों को आंखाें से डबल दिखने लगा है या फिर भेंगेपन का शिकार हो रहे हैं।

डाॅ. ने बताया कि पहले हमारे पास सूडोमायोपिया के मरीज आते थे। इसमें नजदीक से देखकर कोई बारीकी से काम करने पर आंखों की मसल्स स्थिर हो जाती हैं। इसमें आंखों से डबल दिखने लगता है और दूर की निगाह भी कमजोर हो जाती है। इस पर पीजीआई के एडवांस आई केयर के डॉक्टर्स की टीम ने स्टडी की तो पाया कि जो बच्चे चार घंटे से ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल करते हैं उनमें से तीन बच्चे ऐसे आए जो आंखों से डबल दिखने और भेंगेपन के शिकार पाए गए।

अध्ययन इस महीने न्यूरोफथाल्मोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ। इन बच्चों की उम्र 8 से 12 साल थी। हालांकि, शुरुआत में पता चलने से उन्हें दवा देने से दो बच्चों की आंखें तो ठीक हो गईं, लेकिन एक बच्चा भेंगेपन का शिकार हो गया।

डब्ल्यूएचओ ने इस संबंध में रिपोर्ट जारी की है, इसमें कहा गया है कि जिस तरह से बच्चों में मोबाइल को क्रेज बढ़ रहा है, उसे देखते हुए 2050 तक हर दूसरे बच्चे को चश्मा लगाना पड़ सकता है। यह भी कहा गया है कि समय रहते अभी से बच्चों को गैजेट्स से दूर रखना चाहिए।

6 से 10 साल के बच्चों में है यह समस्या

डॉ. ने बताया कि पीजीआई के एडवांस आई केयर सेंटर में एक बच्चों के लिए स्पेशल आई केयर क्लीनिक खोला गया है। जहां पर इस तरह के बच्चों की डिटेक्शन की जा रही है। 6 से 10 साल के बच्चे आंखों से कम दिखने की शिकायत लेकर आ रहे हैं। उन्हें चश्मा लगाना पड़ रहा है। इन बच्चों में मोतियाबिंद और रेटिनोपैथी जैसी शिकायतें भी हो रही हैं।
45 से 60 मिनट नेचुरल लाइट में बच्चों को भेजें

डाॅ. ने बताया कि वर्ल्ड पीडियाट्रिक ऑप्थोल्मोजी एसोसिएशन की गाइडलाइन के मुताबिक बच्चों को रोजाना 45 से 60 मिनट नेचुरल लाइट में जरूर भेजें। उन्हें पढ़ाई के अलावा लेपटॉप या आईपेड जैसे गैजेट्स से दूर रखें। ताकि आंखों पर विपरित असर न पड़े। इसके विपरित बच्चों का मन खेलकूद में लगाएं और उन्हें इसके प्रति प्रोत्सहित करते रहें। इससे न केवल बच्चे का शारीरिक विकास होगा, बल्कि उसका स्वास्थ्य भी बेहतर बना रहेगा।

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