अगर सोचिये निर्भया के गुनाहगारों को फांसी देते वक्त अगर जल्लाद हो गया बेहोश तो?

निर्भया गैंगरेप के दोषियों को फांसी पर लटकाते वक्त अगर जल्लाद ही बेहोश हो गया तो फिर क्या होगा? इस बात की आशंका के चलते भी तिहाड़ जेल में वैकल्पिक इंतजाम किए जा रहे हैं। हालांकि, जेल सूत्रों का कहना है कि इस बात का डर बेहद कम है कि जल्लाद ही बेहोश होकर गिर पड़े।

दरअसल, मेरठ से पवन जल्लाद फांसी देने के लिए आएंगे। असल में उनके लिए भी फांसी देने का यह पहला तजुर्बा होगा। इससे पहले तक उन्होंने बस फांसी देने में अपने दादा की मदद की है। ऐसे में इस बात को पूरी तरह दरकिनार नहीं किया जा सकता कि फांसी देने के ऐन वक्त कहीं जल्लाद के ही पैर ना लड़खड़ा जाएं।

जल्लाद बेहोश तो जेल स्टाफ ही सबको देंगे फांसी
जेल सूत्रों का कहना है कि चारों को फांसी पर लटकाने से पहले हर तरह की शंकाओं को देखा और समझा जा रहा है। इसी वजह से बार-बार ट्रायल भी किए जा रहे हैं और जल्लाद को भी दो दिन पहले बुलाया जा रहा है। ताकि कहीं कोई कमी नजर आती है तो उसे समय रहते दुरुस्त किया जा सके। इसी के तहत अगर ऐन मौके पर जल्लाद बेहोश हो जाता है तो फिर जेल स्टाफ ही इन चारों को फांसी पर लटका देगा।

जेल अधिकारियों ने बताया कि ऐसा नहीं है कि ऐसा पहली बार होगा। संसद हमले के दोषी आतंकवादी अफजल को भी फांसी पर लटकाने के लिए किसी जल्लाद को नहीं बुलाया गया था। जेल स्टाफ ने ही उसे फांसी दी थी। इसलिए यह कोई नियम नहीं है कि कैदी को फांसी पर लटकाने के लिए जल्लाद की जरूरत होगी ही।

तिहाड़ जेल अधिकारियों का कहना है कि अभी तक की तय डेट के हिसाब से चारों को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाया जाएगा। इससे पहले दिन 21 जनवरी को डमी या सैंड बैग से फाइनल ट्रायल किया जाएगा। लेकिन इससे पहले दो और ट्रायल किए जाएंगे। यानी 22 जनवरी से पहले तीन ट्रायल होंगे। जिनमें दो ट्रायल जल्लाद द्वारा कराए जाएंगे। बुधवार को जेल नंबर-2 में बंद मुकेश की मां ने मुकेश से मुलाकात की। उनकी मुलाकात डेप्युटी सुपरिटेंडेंट दफ्तर में कराई गई। करीब 30 घंटे तक यह मुलाकात हुई।

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