अपर्णा का जज्बा

इरादें अगर मजबूत हों, तो कोई भी बाधा आपका रास्ता नहीं रोक सकती। ऐसा ही कुछ साबित कर दिखाया है यूपी कैडर की 2002 बैच की आईपीएस अधिकारी और आईटीबीपी की डीआईजी अपर्णा कुमार ने। निमोनिया जैसी बीमारी से जूझते हुए अपर्णा ने दुनिया के सबसे दुर्गम इलाकों में से एक, जहां बर्फ के अलावा और कुछ नहीं दिखता, में 111 किलोमीटर का सफर तय कर दक्षिणी ध्रुव (साउथ पोल) भी तिरंगा लहरा दिया। यह मिशन भी माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई जितना ही कठिन था। ऐसा करने वाली अपर्णा भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बन गई हैं।

मूल रूप से आंध्र प्रदेश की रहने वाली अपर्णा कुमार उत्तर प्रदेश कैडर के 2002 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। वर्तमान में वह आईटीबीपी के देहरादून ऑफिस में बतौर डीआईजी पोस्टेड हैं। इन मुश्किल रास्तों से सफर करने का शौक उन्हें 2012 से लगा, जब वह मुरादाबाद में पोस्टेड थीं। इसके बाद आईटीबीपी के औली ट्रेनिंग सेंटर उन्होंने अपनी इस प्रतिभा को निखारा। अपर्णा अब तक देश विदेश के कई मुश्किल रास्तों का सफर कर चुकी हैं। साउथ पोल की यात्रा के लिए उनकी टीम में कुल 7 लोग थे। आखिरकार 5 लोग ही यह यात्रा पूरी कर पाए। इस यात्रा के दौरान उनकी नाक पर बर्फ की वजह से फ्रॉस्ट बाइट (नाक से खून निकलना) हुई, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह किए बगैर अपनी यात्रा जारी रखी। इस दौरान उनके पास उपकरणों का 35 किलोग्राम वजन भी था।

अपर्णा को साउथ पोल पहुंचने में करीब 8 दिन लगे। इस दौरान उन्होंने 111 माइल यानी 178.6 किलोमीटर का सफर तय किया। अब अपर्णा का अगला लक्ष्य है नॉर्थ पोल जाना, जिसकी वह अप्रैल के महीने में इस यात्रा को शुरू करने की योजना बना रही हैं। अभियान के बारे में अपर्णा कहती हैं, ‘चेहरे को काट रहीं तेज गति से चलने वाली बर्फीली हवाओं ने और माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तापमान में दिन के आठ घंटे स्कीइंग ने इस सफर को यादगार बना दिया।’ सफलता के लिए वह अपने पति संजय कुमार को श्रेय देती हैं।

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