अब भारत के साथ नहीं रहना चाह रहा नेपाल, चीन के साथ बढ़ा रहा संबंध!

Published: 12/09/2018 1:23 PM

दिल्ली ब्यूरो: मौजूदा केंद्र सरकार की नीति का ही नतीजा दिख रहा है कि जिस नेपाल के लोगों के लिए भारत उनके दूसरे घर की तरह रहा है अब नेपाल के सत्ता प्रतिष्ठानों की ओर से जो संकेत मिल रहे हैं उससे साफ़ लगता है कि पडोसी नेपाल अब भारत के साथ नहीं रहना चाहता। अब वह चीन से ज्यादा सम्बन्ध बना रहा है। भारत नेपाल के बीच रोटी बेटी का सम्बन्ध रहा है लेकिन पिछले साल से यह दिख रहा है कि नेपाल को अब शायद भारत की जरूरत नहीं रही।

खबर के मुताबिक भारतीय सेना ने 16 सितंबर को बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग उपक्रम) देशों के सेनाध्यक्षों का सम्मेलन आयोजित किया है। इसके लिए नेपाली सेना प्रमुख पूर्ण चंद्र थापा को भी आमंत्रण भेजा गया था। लेकिन उन्होंने सम्मेलन में शामिल होने से साफ इंकार कर दिया है। शीर्ष सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। ख़बर है कि उन्होंने पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं का हवाला देते हुए इस सम्मेलन में शामिल होने से इंकार किया है। थापा ने अभी इसी रविवार को नेपाली सेना की कमान संभाली है।

बिहार-पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में भूकंप झटके, घरों से बाहर आए लोग

इससे पहले नेपाल ने पुणे में हो रहे बिम्सटेक देशों के संयुक्त युद्धाभ्यास में शामिल होने से भी इंकार कर दिया था। हालांकि उसने इसके लिए अपने पर्यवेक्षक भेजे हैं। लेकिन सैन्य टुकड़ी को वापस बुला लिया था। यही नहीं नेपाल की ओर से यह भी ऐलान किया गया है कि उसकी सेना इसी महीने 17 से 28 सितंबर के बीच चीन के साथ युद्धाभ्यास में हिस्सा ले रही है। नेपाली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल गोकुल भंडारी के मुताबिक, ‘चीन के साथ नेपाल का यह दूसरा सैन्य अभ्यास (सागरमाथा फ्रेंडशिप-2) है, जो चेंगदू में हो रहा है।’

बता दें कि बिम्सटेक- भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका, थाइलैंड, भूटान और नेपाल का क्षेत्रीय संगठन है। आतंक-विरोधी अभियानों के लिए सेनाओं को तैयार करने के मकसद से पुणे में इन देशों का संयुक्त सैन्य अभ्यास चल रहा है। इसमें नेपाल और थाईलैंड को छोड़कर सभी देश हिस्सा ले रहे हैं। इन दोनों देशों ने इस अभ्यास के लिए सिर्फ तीन सदस्यीय पर्यवेक्षक दल को ही भारत भेजा है, सैन्य टुकड़ियों को नहीं. अलबत्ता थाईलैंड ने भारत को सेना प्रमुखों के सम्मेलन के बाबत बताया है कि वह इसके लिए वरिष्ठ सैन्य अफसर को भेज रहा है।

जानकारों के मुताबिक एशिया महाद्वीप में अपना असर बढ़ाने की कोशिश कर रहे भारत के लिए नेपाल का यह रवैया एक नई चुनौती की तरह है। क्योंकि इससे पहले मालदीव और श्रीलंका जैसे देश भी चीन की तरफ अपने झुकाव का संकेत दे चुके हैं। श्रीलंका तो अपना हंबनटोटा जैसा अहम बंदरगाह भी 99 साल के चीन को पट्‌टे पर दे चुका है। हालांकि अभी श्रीलंका ने सीधे तौर पर भारत से दूरी बनाने का संकेत नहीं दिया है लेकिन वह चीन को अपनी ज़मीन पर जगह बनाने की गुंज़ाइश भरपूर दे रहा है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
-----------------------------------------------------------------------------------
loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

E-Paper