अब राजनीति में ‘कप्तानी’

चर्चा में रहना तो कोई मोहम्मद अजहरुद्दीन से सीखे। हालांकि इस बार वह किसी नए अफेयर को लेकर नहींं, बल्कि राहुल गांधी के उन पर बढ़ते भरोसे को लेकर चर्चा में हैं। कई वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार करते हुए राहुल गांधी ने अजहरुद्दीन को तेलंगाना कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। अब देखना यह है कि क्रिकेट में सफल कप्तान रहे अजहर राजनीति में कैसी कप्तानी करते हैं।

टीम इंडिया के सफलतम कप्तानों में शुमार मोहम्मद अजहरुद्दीन एक बार फिर से ‘कप्तानी’ करने के लिए मैदान में हैं। लेकिन इस बार न तो उनके हाथ में बैट है और न ही पिच, बल्कि उनका सामना धुरंधर राजनेताओं से है। दरअसल, अजहर को तेलंगाना कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष उस समय बनाया गया है, जब वहां चुनाव हो रहे हैं। हालांकि अजहर की राजनीतिक पारी की शुरुआत वर्ष 2009 में तब हो गई थी, जब उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर यूपी की मुरादाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और भाजपा के सर्वेश सिन्हा को हराकर पहली बार सांसद बने।

इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अजहर को टोंक सवाईमाधोपुर सीट से मैदान में उतारा, लेकिन वह चुनाव जीत नहीं पाए। दरअसल, तेलंगाना के हैदराबाद में जन्मे अजहर की नजरें 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों में तेलंगाना की सिकंदराबाद सीट पर हैं। अजहर इस सीट से चुनाव लडऩे के लिए काफी समय से प्रयासरत हैं। इसी के चलते वह तेलंगाना में पिछले काफी समय से सक्रिय भी रहे हैं। हालांकि अजहर की नियुक्ति भी कांग्रेस ने जातिगत समीकरण बैठाने के लिए की है।

अपनी उपेक्षा के चलते पार्टी से कई बार नाराजगी जता चुके अजहर ने हार न मानते हुये अपनी सक्रियता से पार्टी का घ्यान खींचा और काग्रेस ने जातिगत आंकडा़ें को ध्यान में रखने के साथ ही इनकी नाराजगी को दूर करने के लिये इन्हे तेलंगाना इकाई का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। अजहर के अलावा पूर्व सांसद संदीप दी़ि़क्षत को सचिव पद की जिम्मेदारी दी गयी है तेलंगाना विधान सभा चुनाव से पहले दी गयी जिम्मेदारी अजहर के लिये लिटमस टेंस्ट से कम नही है क्योंकि भाजपा और टीआरएस की रणनीति समझना क्रिकेट से कहीं ज्यादा कठिन साबित होगा।

राहुल गांधी ने अजहर को तेलंगाना का कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर बड़ा दांव खेला है। दरअसल, तेलंगाना में करीब 20 फीसदी मुस्लिम वोटर है, जो 28 से 30 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा कांग्रेस ने अजहर के रूप में मुस्लिम चेहरा मैदान में उतार कर एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी का प्रभाव हल्का करने की कोशिश की है।

अगर बात करें अजहर के क्रिकेट कॅरियर की, तो वह एक बेहतरीन खिलाड़ी के रूप में जाने जाते हैं। 1984-85 में इंग्लैंड के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत करने वाले इस महान खिलाड़ी के नाम 99 टेस्ट में 45.03 की औसत से 6,215 रनों का रिकॉर्ड है। उन्होंने 22 शतक और 21 अर्धशतक लगाए हैं। इसके अलावा अजहर ने 334 एकदिवसीय मैचों में 36.92 के औसत से 9,378 रन बनाए हैं। इसमें 7 शतक और 58 अर्धशतक शामिल हैं। कलाइयों के जादूगर के नाम से मशहूर अजहर की गिनती तत्कालीन सर्वश्रेष्ठ फील्डरों में की जाती है और उनके नाम 156 कैच पकडऩे का भी रिकार्ड है।

हालांकि अजहर के क्रिकेट कॅरियर के पतन की शुरुआत 5 दिसम्बर 2000 को तब हो गई, जब उन पर मैच फिक्सिंग करने का आरोप लगा। इसकी सजा के रूप में अजहर पर क्रिकेट खेलने का आजीवन प्रतिबंध लगा दिया गया। हालांकि 8 नवम्बर 2012 को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने अजहर पर लगाए गए फिक्सिंग के आरोपों को खारिज कर उन्हें बेदाग घोषित कर दिया। इसके अलावा अजहर अपने निजी जीवन को लेकर भी काफी चर्चा में रहे हैं। पहले वह फिल्म अभिनेत्री संगीता बिजलानी से संबंधों की वजह से चर्चा में रहे और फिर 2010 में प्रसिद्ध बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा से अफेयर को लेकर काफी विवादों में रहे।

शुरुआती टेस्ट मैचों में लगातार तीन शतक लगाकर वंडर ब्वाय का खिताब पाने वाले अजहर को कांग्रेस ने तलंगाना का कार्यकारी अध्यक्ष का पद सौंपकर बडड़ी जिम्मेदारी दी है। इसमें अजहर को ऐसी पिच पर खेलना है जिसका उन्हें ज्यादा अनुभव भी नहीं है। इसके अलावा उनकी नई टीम में भी कोई ऐसा खिलाड़ी नहीं है, जो इस चुनावी मैच में उनका साथ दे सके।

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लखनऊ ट्रिब्यून

Vineet Kumar Verma

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