अयोध्या मामले पर सुनवाई तेज : सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता पैनल से 25 जुलाई तक मांगी रिपोर्ट

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर सुनवाई की तारीख जल्द लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मध्यस्थता पैनल से रिपोर्ट मांगी है। सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए पैनल से 18 जुलाई तक रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है। मामले में अगली सुनवाई 25 जुलाई को होगी। यह आवेदन मामले के एक हिंदू पक्षकार गोपाल सिंह विशारद की ओर से दिया गया है।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बोबडे, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय संविधान पीठ आवेदन पर सुनवाई कर रही है। अपनी अर्जी में विशारद ने कहा है कि मध्यस्थता में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है इसलिए कोर्ट मुख्य मामले पर जल्द सुनवाई करे। कोर्ट ने मामले पर विचार करने का आश्वासन दिया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2010 में विवादित भूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था। जिसमें एक हिस्सा भगवान रामलला विराजमान और दूसरा निर्मोही अखाड़ा व तीसरा हिस्सा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को दिया था।

इस फैसले को भगवान राम सहित हिंदू-मुस्लिम सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट के आदेश से फिलहाल यथास्थिति कायम है। इस बीच आठ मार्च को शीर्ष कोर्ट ने अयोध्या विवाद को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी। सर्वमान्य हल तलाशने के लिए समिति को 15 अगस्त तक का समय दिया गया है।

पिता राजेंद्र सिंह ने दाखिल किया था पहला मुकदमा
विशारद अयोध्या विवाद में मुख्य याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं। इनके पिता राजेंद्र सिंह ने 1950 में पहला मुकदमा दाखिल किया था जिसमें बिना रोक टोक रामलला की पूजा का हक मांगा गया था। साथ ही जन्मस्थान पर रखी रामलला की मूर्तियों को वहां से हटाने पर स्थाई रोक मांगी थी। फैजाबाद जिला अदालत से होता हुआ यह मुकदमा इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट ने अन्य याचिकाओं के साथ इसपर फैसला दिया था।

यह कहा अर्जी में
विशारद ने अर्जी में कहा है कि करीब पांच महीने की मध्यस्थता में अभी तक कोई ठोस प्रस्ताव नहीं निकला है न ही उसे पक्षकारों के बीच कोई समझौता होने की उम्मीद लगती है। मध्यस्थता के दौरान जो सुझाव आए वे इसकी प्रक्रिया के दायरे में भी नहीं आते थे और राजनीतिक प्रकृति के थे। इससे लगता है कि मध्यस्थता से कोई नतीजा नहीं निकलने वाला। मामले का एकमात्र हल कोर्ट से ही हो सकता है। ऐसे में कोर्ट मध्यस्थता समाप्त कर अपीलों की योग्यता पर शीघ्र सुनवाई करे।

निर्मोही अखाड़ा ने भी उठाया सवाल
उधर निर्मोही अखाड़ा ने भी मध्यस्थता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इसमें मुख्य पक्षकारों के बीच सीधी बातचीत होनी चाहिए ताकि कोई हल निकले। लेकिन कई बार अनुरोध के बावजूद मौजूदा प्रक्रिया में ऐसा नहीं हो रहा है। निर्मोही अखाड़ा के प्रवक्ता कार्तिक चोपड़ा ने कहा कि अखाड़ा के सरपंच राजा रामचंद्र आचार्य की राय है कि जबतक पक्षकारों के बीच सीधी बातचीत नहीं होगी तब तक मध्यस्थता सफल नहीं हो सकती। मध्यस्थता से ऐसा कोई प्रस्ताव अभी तक नहीं आया है जिसे पंचों के सामने रखा जाए।
अखाड़ा ने आम सहमति से हल निकालने के लिए यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड को सीधी बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। कहा है कि अगर बोर्ड उनका प्रस्ताव स्वीकार नहीं करता है तो वे कोर्ट से अनुरोध करते हैं कि मामले पर जल्द सुनवाई की जाए। अखाड़ा ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल कर रखी है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper