अयोध्या में धर्मसभा: क्या विहिप लगा पायेगी भाजपा की नैय्या पार !

लखनऊ ब्यूरो। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिये आगामी 25 नवम्बर को आयोजित धर्मसभा विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के लिये लिटमस टेस्ट साबित हो सकता है। छह दिसम्बर 1992 को विवादित ढांचा ध्वस्त होने के बाद यह पहला मौका है। जब किसी कार्यक्रम में लाखों राम भक्तों को अयोध्या पहुंचने का आह्वान किया गया है। विहिप और उससे जुड़े अन्य संगठन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दिया है।

वर्ष 1992 के बाद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अयोध्या मामले से जुड़े किसी कार्यक्रम में शायद पहली बार खुलकर सामने आया है। संघ ने हालांकि कार्यक्रम की जिम्मेदारी अपने समवैचारिक संगठन विहिप के हवाले कर रखा है, लेकिन 1992 के बाद यह पहला मौका है, जब संघ के सरकार्यवाह स्वयं अयोध्या में डेरा डालकर कार्यक्रम की एक-एक चीज को देख रहे हैं।

छह दिसम्बर 1992 को संघ के तत्कालीन सरकार्यवाह होवे शेषाद्रि अयोध्या में थे। ढांचा ध्वस्त होते समय उन्हें अधिग्रहीत परिसर में स्थित राम कथाकुंज की छत पर देखा गया था। जबकि इस बार संघ के सरकार्यवाह भैय्याजी जोशी अयोध्या में डेरा डाले हुये हैं। ढांचा ध्वस्त होने के बाद हर छह दिसम्बर को शौर्य या विजय दिवस का आयोजन होता रहा है, लेकिन संख्याबल पर कभी जोर नहीं दिया गया।

फरवरी 2002 में मंदिर निर्माण के लिये सत्याग्रह किया गया था। इसमें पूरे देश से बारी-बारी हर दिन सत्याग्रही अयोध्या पहुंचते थे। दिनभर सत्याग्रह कर शाम को अपने राज्य वापस हो जाते थे। 27 फरवरी 2002 को गुजरात वापस जा रहे सत्याग्रहियों को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस की एक बोगी में आग लगाकर 57 कारसेवकों को जिन्दा जला दिया गया था।

वर्ष 2003 में हुये शिलादान में भी देश भर में हंगामा मचा था, लेकिन उस कार्यक्रम के केन्द्र में श्री रामजन्मभूमि न्यास के तत्कालीन अध्यक्ष परमहंस रामचन्द्र दास थे। विहिप कार्यक्रम में था लेकिन नेतृत्व परमहंस कर रहे थे। विहिप ने अक्टूबर 2004 में अयोध्या कूच का नारा दिया था लेकिन उस समय अयोध्या के लिये रेल और सड़क यातायात रोक दिया गया था। विहिप के अशोक सिंहल के अयोध्या पहुंचने में सफल हो गये थे, लेकिन कारसेवकों की पर्याप्त संख्या वहां नहीं पहुंच सकी थी।

इससे पहले 2001 में अयोध्या एक बार फिर तनाव में थी। हालांकि, पुलिस को बल प्रयोग नहीं करना पड़ा था और न ही कर्फ्यू की नौबत आयी। तमाम उतार-चढ़ाव के बाद अयोध्या को लेकर देश में एक बार फिर सियासी पारा चढ़ गया है।

राम मंदिर निर्माण के लिये विहिप ने धर्मसभा का आयोजन किया है। धर्मसभा यूं तो मुम्बई और बंगलुरु में भी है लेकिन देश विदेश का ध्यान अयोध्या में हो रहे धर्मसभा की ओर ही है। मीडिया का सर्वाधिक जमावड़ा अयोध्या में ही लगेगा। धर्मसभा में आने के लिये कई जिलों में बजरंग दल में युवाओं की भर्ती की सूचना है।

लखनऊ में महायज्ञ की तैयारी हो रही है। श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास का कहना है कि धर्मसभा के जरिये सरकार की आंख खोलने का प्रयास किया जायेगा ताकि मंदिर निर्माण में आ रही बाधायें दूर हो सकें। इन परिस्थितियों में विहिप के लिये अयोध्या की धर्मसभा में घोषणा के अनुरूप लाखों रामभक्तों को जुटाने के लिटमस टेस्ट में खरा उतरना ही होगा।

उधर, धर्मसभा में सम्भावित भीड़ के मद्देनजर अयोध्या जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक बन्दोबस्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। तेरह स्थानों पर वाहनों की पार्किंग व्यवस्था की जा रही है। रामलला विराजमान स्थल पर कड़ी चौकसी बरतने के आदेश दिये गये हैं।

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