आख़िर आ ही गई अंधेरी रात की उजियारी सुबह …

कौशल किशोर चतुर्वेदी

हर अँधेरी रात के बाद एक उजली सुबह होती है।अगर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मानें तो विभागों के बँटवारे पर छाई अँधेरी रात की उजियारी सुबह सूर्य भगवान ख़ुद लेकर आ ही गए हैं।
समुद्र मंथन की लंबी प्रक्रिया के बाद अमृत सहित 14 रत्न निकले थे। इनमें सबसे पहले कालकूट विष निकला जिसे शिव ने अपने कंठ में धारण किया था और नीलकंठ कहलाये थे।विष का थोड़ा सा हिस्सा पृथ्वी पर गिरा था जिसे पीकर साँप बिच्छू जैसे ज़हरीले जंतु पृथ्वी पर पैदा हुए। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले ही कह चुके हैं कि विष वह पियेंगे और अमृत सब में बंटेगा।अगर उनके अनुसार आज विभागों का बँटवारा हो भी जाता है तब भी वह पिछली 10 अंधेरी रातों से उसी विषपान कर ही रहे हैं जिसके बाद बचा हुआ अमृत अब सबके हिस्से में आने वाला है।वैसे समुद्र मंथन का विचार विष्णु ने दिया था और देवताओं को दैत्यों के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाने की नसीहत दी थी। देवताओं ने इस पर अमल कर दैत्यों से दोस्ती कर ही समुद्र मंथन के लिए राज़ी कर पाए थे।
खैर 14 रत्नों का ज़िक्र करें तो कालकूट विष के बाद ऐरावत हाथी, कामधेनु गाय, उच्चैःश्रवा घोड़ा,
कौस्तुभमणि,कल्पवृक्ष,
रम्भा नामक अप्सरा,
लक्ष्मी,वारुणी मदिरा, चन्द्रमा,शारंग धनुष,शंख,
गंधर्व और अमृत रत्न निकले थे।इनमें से लक्ष्मी जी ने स्वयं विष्णु को वरण कर लिया था और बाक़ी सभी रत्न देवताओं-दैत्यों में बँट गए थे।निश्चित तौर पर अब इस मंथन के बाद अगर विष शिव के हिस्से में आया है तो लक्ष्मी की कृपा सब पर बरसने वाली है।इस समुद्र मंथन का एक पक्ष राहु और केतु हैं जो समय समय पर शिवराज और उनके मंत्रियों पर अपनी दृष्टि ज़रूर डालते रहेंगे। इसका पहला मौक़ा उन्हें विधानसभा उपचुनावों में मिलने वाला है जिसमें उन 14 मंत्रियों के भाग्य का फ़ैसला भी होगा जिनकी वजह से स्थितियां शिवराज के मुख्यमंत्री बनने और समुद्र मंथन तक पहुँची है।राहु केतु को ऐसे मौक़े मिलते ही रहेंगे, कोरोना काल में बनी शिवराज सरकार की शुरुआत से अब तक के सफ़र पर ग़ौर करने के बाद ऐसी संभावना से मुँह नहीं मोड़ा जा सकता।

अंत में हम एक बार चित्रपट की तरफ़ मुड़ते हैं तो 1963 में रिलीज़ हुई सुशीला फ़िल्म का यह गीत जां निसार अख़्तर ने लिखा था।सी अर्जुन का संगीत था तो मोहम्मद रफ़ी और तलत महमूद की आवाज़ थी।गीत के बोल थे –
ग़म की अँधेरी रात में ना दिल को बेक़रार कर।
सुबह ज़रूर आएगी सुबह का इंतज़ार कर।
उम्मीद करते हैं कि अंधेरी रात की सुबह का इंतज़ार ख़त्म होगा और भरोसा रखें कि अमृत पान का सिलसिला शुरू होगा।

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