आय से अधिक सम्पत्ति मामले में मायावती के भाई आनंद की बढ़ी मुश्किलें, कभी हो सकते हैं गिरफ्तार!

नई दिल्ली: बहुजन पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती अपने दो सगे भाइयों में से एक आनंद कुमार की सीबीआई द्वारा आय से अधिक सम्पत्ति व बहुतसारी फर्जी कम्पनियों के मामले सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी की संभावना बढ़ती जा रही है। सूत्रों का कहना है कि इसको लेकर मायावती परेशान हैं। उनको लगने लगा है कि सीबीआई उनके भाई को गिरफ्तार कर सकती है। उसके बाद लोकसभा चुनाव के पहले उनसे(माया) भी पूछताछ हो सकती है।

सूत्रों के अनुसार इसकी वजह यह है कि आनंद कुमार पर 18 सितम्बर 2018 से सीबीआई का दबाव बहुत बढ़ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) व आयकर ने भी भाई-बहन के मालामाल होने की फाइल तैयार कर रखी है। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई के डर से ही मायावती ने 20 सितम्बर 2018 को अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस (छत्तीसगढ़)से बसपा के चुनावी गठबंधन की घोषणा की। इसके अलावा म.प्र. की 230 सीटों में 22 सीटों पर अपने प्रत्याशियों की सूची जारी करवाई। मायावती के भाई आनंद कुमार लिपिक थे। लेकिन उसी आनंद कुमार की सम्पत्ति 2007 में 07.5 करोड़ रुपये थी। जो 2014 में बढ़कर 1,316 करोड़ रुपये हो गई। इस बीच 2007 से 2012 तक उ.प्र. में मायावती मुख्यमंत्री थीं।

मायावती ने अपने इस भाई को अप्रैल 2017 में बसपा का उपाध्यक्ष बनाया था, लेकिन 27 मई 2018 को पद से हटा दिया। मायावती के मुख्यमंत्री रहने के दौरान आनंद कुमार पर फर्जी कम्पनियां बनाकर उसके मार्फत कालाधन सफेद करने, उन कम्पनियों के नाम पर करोड़ों रुपये ऋण लेने, उसे रियल इस्टेट में निवेश करके कमाया धन बताने का उपक्रम करने का आरोप लगा है। इसके लिए आकृति होटल प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई गई, जिसमें आनंद कुमार बड़े भागीदार रहे। दिल्ली से चलाई जाने वाली इस कम्पनी के तीन निदेशक व 37 भागीदार हैं। लेकिन अचरज यह है कि इनमें से कई भागीदार कम्पनियां केवल कागज में हैं। जिनके नाम डेल्टन एग्ज़िम प्राइवेट लिमिटेड, भास्कर फंड मैनेजमेंट लिमिटेड, गंगा बिल्डर्स लिमिटेड, क्लिफटन पियरसन एक्सपोर्ट एंड एजेंसी हैं।

इन कंपनियों के पास आकृति होटल के 5,00,150 शेयर हैं। इनमें तीन कंपनियों का पता एक ही लिखा है। वह कोलकाता के महेशतला का है। इनके निदेशक भी एक ही हैं। एक टीवी चैनल ने जब इसकी पड़ताल की तो पाया कि इस नाम की किसी कम्पनी का वहां कभी कोई कार्यालय ही नहीं था। आकृति होटल की एक और भागीदार कंपनी नोवल्टी ट्रेडर्स गुवाहाटी के हरिबोल मार्केट के पते पर पंजीकृत है, पर यह पता भी फर्जी है। इसी तरह सात और फर्जी कम्पनियां हैं जिनकी भागीदारी या शेयर आकृति होटल में है। इससे यह आशंका हो रही है कि आनंद कुमार ने अपने आकृति होटल में जिन 10 से अधिक फर्जी कम्पनियों का शेयर दिखाया है, उसके लिए इनसे जो रकम लिया दिखाया है, सब कालेधन को सफेद किया गया है। ईडी ने नोटबंदी के बाद आनंद कुमार के खाते में 01.43 करोड़ रुपये और बसपा के एक खाते में 104 करोड़ रुपये जमा किये जाने का खुलासा किया था। आनंद कुमार के यहां अप्रैल 2017 में आयकर का छापा भी पड़ा था। सूत्रों का कहना है कि आयकर, ईडी व सीबीआई ने इन सब की फाइल तैयार कर रखी है। इसके अलावा मायावती व मुलायम के राज में हुए खाद्यान्न घोटाले और आय से अधिक सम्पत्ति मामले की फाइल भी झाड़-पोंछ कर तैयार कर ली गई है।

इस मामले में मायावती व मुलायम राज में हुए कई हजार करोड़ रुपये के खाद्यान्न घोटाले की जांच के लिए न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने वाले चर्चित वकील विश्वनाथ चतुर्वेदी का कहना है कि सीबीआई, आयकर व ईडी के डर से मायावती व मुलायम ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जिससे केन्द्र सरकार ( चाहे जिसकी भी सरकार हो, भाजपा की हो या कांग्रेस की ) नाराज हो। इसलिए सीबीआई के डर से मायावती कांग्रेस व सपा के साथ महागठबंधन करके न तो विधानसभा, न ही लोकसभा चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी के साथ गठबंधन करके लड़ने की 20 सितम्बर 2018 को जो घोषणा की है, म.प्र. की 230 विधानसभा सीटों में से 22 पर बसपा ने प्रत्याशी खड़ा करने की जो घोषणा की है, ये दोनों ही इसके प्रमाण हैं।

सबको पता है कि मायावती यदि सपा व कांग्रेस के साथ मिलकर छत्तीसगढ़, म.प्र.,राजस्थान में विधानसभा चुनाव और उसको बाद 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ती हैं, तो भाजपा को बहुत ज्यादा नुकसान होगा। लेकिन महागठबंधन करने की घोषणा करने के पहले ही उनके भाई आनंद कुमार को सीबीआई हवालात में डाल सकती है। मायावती को भी ये जांच एजेंसियां पूछताछ के लिए बुला सकती हैं, गिरफ्तार कर सकती हैं। क्योंकि केन्द्र सरकार व सत्ताधारी पार्टी को अपने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के वादे को भी पूरा करने की कोशिश का जनता को संदेश देना है।

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