आरबीआई का बड़ा फैसला, एनईएफटी और आरटीजीएस पर नहीं लगेगा कोई चार्ज

भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार को वर्तमान वित्तवर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में वाणिज्यिक बैंकों के लिए प्रमुख ब्याज दर में 25 आधार अंकों की कटौती की। प्रमुख ब्याज दर यानि रेपो रेट अब 5.75 फीसदी हो गई है। केंद्रीय बैंक ने रीपो रेट को अब 6 प्रतिशत से घटाकर 5.75 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही रिवर्स रीपो रेट भी अब 5.75 पर्सेंट की बजाय 5.50 पर्सेंट हो गई है। इस कैलेंडर ईयर में अब तक केंद्रीय बैंक ने 75 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। एक बेसिस पॉइंट एक फीसदी के सौवें हिस्से के बराबर होता है।

आरबीआई की पिछली दो बैठकों में भी एमपीसी रेपो रेट में क्रमश: 0.25 फीसदी की कटौती कर चुकी है। यानी जून में लगातार तीसरी बार केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट घटाई है। वहीं रिजर्व बैंक के इतिहास में पहली बार है जब आरबीआई गवर्नर की नियुक्ति के बाद लगातार तीसरी बार रेपो रेट में कमी आई है। रेपो रेट में कमी का कर्ज लेने वालों पर सीधा असर होगा, क्योंकि बैंक कर्ज पर ब्याज दर घटा सकते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि रीपो रेट में कटौती का मतलब है कि बैंकों का मार्जिनल कॉस्ट बेस्ड लेंडिंग रेट भी घट जाएगा।

मौद्रिक नीति की मुख्य बातें
रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की गुरुवार को संपन्न तीन दिवसीय दूसरी द्विमासिक सीमक्षा बैठक में नीतिगत दरों में एक चौथाई प्रतिशत की कटौती की गई।
समिति द्वारा लिए गए निर्णयों की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
-रेपो दर छह प्रतिशत से घटाकर 5.75 प्रतिशत
-रिवर्स रेपो दर 5.75 प्रतिशत से घटाकर 5.50 प्रतिशत
-बैंक दर 6.25 प्रतिशत से घटाकर छह प्रतिशत
-मार्जिनल स्टैंडिंग फसिलिटी (एमएसएफ) 6.25 प्रतिशत से घटाकर छह प्रतिशत
-नकद आरक्षित अनुपात चार प्रतिशत पर यथावत
-वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) 19.25 प्रतिशत
-चालू वित्त वर्ष के विकास अनुमान को कम कर सात प्रतिशत किया
-चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में खुदरा महँगाई अनुमान बढ़ाकर तीन प्रतिशत से 3.1 प्रतिशत के बीच रहने तथा दूसरी छमाही में इसके घटकर 3.4 प्रतिशत से 3.7 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद जताई गयी है।
-आरटीजीएस और एनईएफटी के जरिये लेनदेन को शुल्क मुक्त करने का फैसला।

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