आश्रय केंद्रों में प्रयाप्त व्यवस्था न होने से गोवंशीय पशुओं की मौतों का सिलसिला जारी

लखनऊ: विकास खंड माल में संचालित डेढ़ दर्जन से अधिक पशु आश्रय केंद्रों में चिलचिलाती धूप और अपर्याप्त पानी चारे की ब्यवस्था न होने से लगभग दर्जनभर पशु रोज़ाना मौत की नींद सो जाते हैं।इन मृत पशुओं के शवो को उठाने की कोई ब्यवस्था न होनेसे सड़ांध से संक्रामक रोगों के फैलने की संभावना बढ़ गयी है। इस दुगर्ंध से आश्रय केंद्रों के पड़ोसी गांवों के निवासियों को जीना मुहाल हो रहा है।असहनीय गर्मी और भूख प्यास की पर्याप्त ब्यवस्था पशु आश्रय केंद्रों में न होने से गोवंशीय पशुओं की मौतों का सिलसिला जारी है।

आश्रय केंद्रों में मृत पशुओं के शवों को कई कई दिनों तक ठिकाने न लगाने से शवों को कुत्ते कौवे नोचते खाते देखे जा सकते हैं।साथ ही मृत पशुओं के हफ़्तों पड़े रहने से।पास पड़ोस के गांवों में रहने वाले लोगों को दुगर्ंध के चलते रहना दुश्वार हो गया है।पाराभदराही पंचायत के मजरे आविदनगर में बने पशु आश्रय केंद्र में पांच गोवंशीय पशुओं के शव पड़े थे।जबकि आश्रय केंद्र केबगल लगी बन बबुरी(बबूल) में डेढ़ दर्जन से भी अधिक मृत पशुओं के शवों के आधे सड़े कंकाल पड़े किसी भी समय देखे जा सकते हैं।पड़ोसी गांव अहमदपुर,ललई खेड़ा, सुर्तीखेड़ा, भदराही सहित कई गांवों के निवासियों का कहना है कि जब तेज हवाएं चलती हैं तो घरों में सोना बैठना मुश्किल हो जाता है।

इतना ही नहीं विकासखंड में डेढ़ दर्जन से अधिक बने गौशालाओं में पानी भूसा छाया ना होने से दर्जनों पशुओं को मौत के गाल में समा ना पड़ रहा है जबकि 3 महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी प्रशासन के किसी भी अधिकारी ने इनके खाने-पीने और रहने की किसी भी गौशाला पर कोई भी व्यवस्था नहीं की जा सकी जिसके चलते क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में इन पशुओं की मौत हो चुकी है ग्रामीणों में र्चचा का विषय बना हुआ है कि इन पशुओं की मौत का जिम्मेदार कौन है यह कोई बताने वाला नहीं दिखाई दे रहा है। आवारा पशुओं को सरकार ने कैद करके बंद तो करवा दिया लेकिन इनकी और कोई व्यवस्था पूरीना हो सकी जिससे एक हिसाब से तो इनकी अकाल मौत ही हो रही है अगर इन पशुओं की देखरेख या रहने सहने की व्यवस्था ना की गई तो एक एक करके इन पशुओं को मौत को गले लगाना पड़ेगा और जिम्मेदार सिर्फ वाहवाही लूटते ही रह जाएंगे सबसे बड़ी बात तो यह है।

एक भी गौशाला ऐसा नहीं है कि जहां पर इन पशुओं की देखरेख वह खाने पीने की व्यवस्था समय पर होती हो इस संबंध में खंड विकास अधिकारी माल से बात की गई तो उन्होंने अपनी कमियों को छुपाने के लिए जिला पंचायत व पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करने को कहा। 3 महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार सिर्फ जांच करने या किसी दूसरे बिभाग से बात करने को कहकर अपना पल्ला झाड रहे है।

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