इंदौर को भाने लगी भाजपा तो धार झाबुआ में बढ़ी कांग्रेस की चाहत

मध्यप्रदेश की उद्योग नगरी इंदौर में भाजपा 1989 से ही मजबूत स्थिति में है और लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन यहां से लगातार चुनाव जीत रही हैं। 1984 में प्रकाशचन्द सेठी यहां से चुनाव जीते थे लेकिन उसके बाद से महाजन जिन्हें ताई के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है लगातार जीतती आ रही हैं। भारतीय जनता पार्टी ने 75 साल की उम्र वाले नेताओं को चुनाव न लड़ाने का फैसला किया है इसलिए लोकसभा के इस चुनाव में भाजपा नये चेहरे पर दांव लगायेगी और कांग्रेस को भी मजबूत प्रत्याशी खोजने के लिए मशक्कत करना होगी। झाबुआ और धार अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें हैं और इन दोनों पर ही कांग्रेस मौजूदा परिस्थितियों में मजबूत नजर आ रही है। जहां तक झाबुआ का सवाल है तो 1980 के बाद से केवल एक बार भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीती है जबकि शेष सभी चुनावों में कांग्रेस ही बाजी मारती रही है। 2014 की मोदी लहर में दिलीप सिंह भूरिया चुनाव जीत गये थे लेकिन उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में फिर से इस सीट पर कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया ने अपना वर्चस्त स्थापित कर लिया और वे ही इस क्षेत्र के मौजूदा सांसद हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद धार लोकसभा सीट पर कांग्रेस की स्थिति काफी मजबूत हो गयी है और इस सीट को बचाये रखने के लिए भाजपा को भरपूर जोर लगाना पड़ेगा।

इंदौर लोकसभा सीट पर भाजपा की मजबूत पकड़ है और 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार सुमित्रा महाजन ने कांग्रेस के सत्यनारायण पटेल को 4 लाख 66 हजार 901 मतों के भारी अन्तर से पराजित किया था। हर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस को उन्होंने काफी पीछे छोड़ा था। महाजन को पिछले लोकसभा चुनाव में 64.93 प्रतिशत यानी 8 लाख 54 हजार 972 मत मिले जबकि कांग्रेस के सत्यनारायण पटेल को 29.47 प्रतिशत यानी 3 लाख 88 हजार 71 मत प्राप्त हुए थे। 2013 में इस संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस का केवल एक विधायक था जबकि अब विधानसभा में कांग्रेस एवं भाजपा के विधायकों की संख्या बराबर हो गयी है फिर भी भाजपा को कांग्रेस पर इस समय 95 हजार 130 मतों की बढ़त प्राप्त है। इस समय इंदौर से कमलनाथ मंत्री मंडल में जीतू पटवारी और तुलसी सिलावट कैबिनेट मंत्री है और तीसरे मंत्री सज्जन सिंह वर्मा सोनकच्छ से विधायक चुने गए हैं और उनकी कर्मभूमि इंदौर ही है।
झाबुआ लोकसभा सीट पर 1980 से ही कांग्रेस लगातार जीतती रही है, यहां तक कि जब कांग्रेस से पाला बदलकर दिलीप सिंह भूरिया भाजपा में चले गये उसके बावजूद इस सीट पर कांतिलाल भूरिया कांग्रेस की ओर से लगातार चुनाव जीतते रहे। दिलीप सिंह भूरिया कांग्रेस छोड़ने और भाजपा में जाने के बाद केवल एक ही चुनाव 2014 की मोदी लहर के दौरान जीतने में सफल रहे और उस समय उन्होंने कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया को पराजित किया। दिलीप सिंह भूरिया के निधन के बाद हुए उपचुनाव में कांतिलाल भूरिया ने दिलीप सिंह भूरिया की बेटी निर्मला दिलीप सिंह भूरिया को 88 हजार 832 मतों के अन्तर से पराजित कर फिर से झाबुआ में अपनी जीत का परचम लहरा दिया। इस संसदीय क्षेत्र में इस समय तीन भाजपा के और पांच कांग्रेस विधायक हैं। झाबुआ में कांतिलाल भूरिया के बेटे विक्रान्त भूरिया चुनाव नहीं जीत पाये लेकिन फिर भी इस सीट पर उनके पिता कांतिलाल भूरिया की मजबूत पकड़ बनी हुई है। निर्मला भूरिया इस बार अपनी विधानसभा की सीट भी नहीं बचा पाईं हैं।

धार लोकसभा सीट पर 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सावित्री ठाकुर ने कांग्रेस के उमंग सिंघार को एक लाख 4 हजार 328 मतों के अन्तर से पराजित कर जीत दर्ज की थी। सावित्री ठाकुर को 51.86 यानी 5 लाख 58 हजार 387 मत मिले जबकि उमंग सिंघार को 42.17 प्रतिशत यानी 4 लाख 54 हजार 59 मत प्राप्त हुए। हाल ही हुए विधानसभा चुनाव में इस संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले आठ क्षेत्रों में से 6 में कांग्रेस और दो में भाजपा विधायक हैं। धार जिले के अलावा इंदौर की महू सीट भी इस संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आती है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सावित्री ठाकुर को एक लाख 4 हजार 328 मतों की बढ़त मिली थी। इस अन्तर को पाटते हुए अब कांग्रेस को यहां भाजपा से हाल के विधानसभा चुनाव में 2 लाख 20 हजार 70 मत अधिक मिले हैं तथा उमंग सिंघार और सुरेंद्र सिंह हनी कमलनाथ सरकार में महत्वपूर्ण विभागों के काबीना मंत्री हैं। इसे देखते हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की राह काफी आसान नजर आ रही है।

सुबह सबेरे से साभार

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