इस इंसान का सपना पूरा करने के लिए मोदी और अमित शाह ने लिया ऐतिहासिक फैसला

नई दिल्ली: सरकार ने जम्मू कश्मीर को दो भागों में विभक्त करने वाला विधेयक जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 को सोमवार को राज्यसभा में पेश किया इससे लद्दाख को अलग कर केन्द्रशासित क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव किया गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में इस विधेयक को पेश करते हुये कहा कि जम्मू कश्मीर को दो भागों में बांटा जायेगा। लद्दाख के लोगों की वर्षों से यह मांग थी कि उसे अलग राज्य का दर्जा दिया जाये। इसके मद्देजनर लद्दाख को केन्द्रशासित क्षेत्र का दर्जा दिया जायेगा लेकिन उसका विधानमंडल नहीं होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस फैसले से भाजपा खेमे में खुशी की लहर है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई संदेश वायरल हो रहे हैं जिसमें कहा जा रहा है कि अमित शाह ने सात दशक पुरानी मांग को पूरा कर दिया है। भाजपा नेता राम माधव ने तो यहां तक कहा कि भारतीय संघ में जम्मू-कश्मीर के एकीकरण का जो सपना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देखा था और जिसके लिए हजारों लोगों ने शहादत दी, वो हमारे आंखों के सामने सच हो रहा है।

धारा 370 के खिलाफ थे श्यामा प्रसाद मुखर्जी

जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी अनुच्छेद 370 के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने धारा 370 हटाने के लिए आंदोलन चलाया।  जम्मू-कश्मीर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने धारा 370 का विरोध शुरू किया। उन्होंने एक देश में दो विधान, एक देश में दो निशान, एक देश में दो प्रधान- नहीं चलेंगे नहीं चलेंगे जैसे नारे दिए. देश की एकता और अखंडता को लेकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने आंदोलन चलाया था। जम्मू-कश्मीर सरकार ने राज्य में प्रवेश करने पर मुखर्जी को 11 मई 1953 को हिरासत में ले लिया। इसके कुछ समय बाद 23 जून 1953 को जेल में उनकी रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई।

आज सदन में बिल पेश करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, जिस दिन से राष्ट्रपति द्वारा इस गैजेट नोटिफिकेशन को स्वीकार किया जाएगा, उस दिन से संविधान के अनुच्छेद 370 (1) के अलावा और कोई भी खंड लागू नहीं होंगे। शाह ने आगे कहा, हम जो चारों संकल्प और बिल लेकर आए हैं, वह कश्मीर मुद्दे पर ही है। संकल्प प्रस्तुत करता हूं। अनुच्छेद 370 (1) के अलावा सभी खंड राष्ट्रपति के अनुमोदन के अलावा खत्म होंगे।

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