एक समय बैट खरीदने के लिए भी नहीं थे पैसे, आज भी दूध बेचते है विश्वकप में धूम मचाने वाली इस भारतीय गेंदबाज के पिता

आईसीसी महिला टी-20 वर्ल्डकप में शनिवार को भारत और श्रीलंका के बीच मेलबर्न में मुकाबला गया। इस मैच में भारतीय महिला टीम की स्पिनर राधा यादव ने श्रीलंका के खिलाफ आईसीसी टी20 विश्व कप में करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 23 रन देकर चार विकेट लिए, जिससे भारत ने श्रीलंका को नौ विकेट पर 113 रन ही बनाने दिए। राधा को इसी प्रदर्शन के दम पर ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का अवार्ड मिला।

लेकिन क्या आप जानते है उनकी यहां तक पहुंचने की कहानी कैसी रही है? मुंबई के कोलिवरी क्षेत्र की बस्ती में 220 फीट की झुग्गी से टीम इंडिया तक की छलांग में राधा के संघर्ष की कहानी छिपी है। उसी मेहनत के बलबूते चोटिल राजेश्वरी गायकवाड़ की जगह उन्हें दक्षिण अफ्रीका दौरा पर चुना गया था। राधा ने जब पहली बार टीम इंडिया में जगह बनाई थी तो तब उनकी उम्र महज 17 साल थी। राधा के लिए यह सफर इतना आसान नहीं रहा। राधा मूलत: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के अजोशी गांव की रहने वालीं हैं। प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई। इंटर की परीक्षा केएन इंटर कॉलेज बांकी से उत्तीर्ण की।

यहां से उनके क्रिकेट करियर को नई ऊंचाई मिली। राधा के परिवार ने भी काफी समझौते किए, जिसका असर आज उनके खेल पर साफ दिखता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि राधा आने वाली पीढ़ी के लिए आदर्श बन चुकी हैं। उनके पिता प्रकाश चंद्र यादव मुंबई में डेयरी उद्योग से जुड़े हैं तो राधा भी पिता के पास जाकर क्रिकेट की कोचिंग लेने लगीं और 2018 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। शुरुआत में वह मुंबई टीम का हिस्सा थी। वर्तमान में वह गुजरात से खेलती है।

महज छह वर्ष की उम्र में ही राधा ने क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। पहले वह मोहल्ले के ही बच्चों के साथ खेलती थी। गली में स्टंप लगाकर लड़कों के साथ एकमात्र लड़की को खेलते देख आसपास के लोग परिवार पर तंज कसते थे। पिता ओमप्रकाश बताते हैं कि उन्हें अक्सर यह सुनने को मिलता था कि बेटी को इतनी छूट ठीक नहीं। लड़के कुछ बोल दें या मारपीट कर दें तो दिक्कत हो जाएगी। मगर उन्होंने कभी भी इसकी परवाह नहीं की। बेटी को खुलकर अपनी मर्जी से खेलने की हमेशा छूट दी।

उनके चार भाई-बहनों में सबसे छोटी राधा के पिता छोटी सी दुकान चलाते हैं। छोटी सी दुकान से मुंबई जैसे महानगर में घर का खर्च निकाल पाना बेहद मुश्किल होता है। पढ़ाई-दवाई का खर्चा भी बमुश्किल निकल पाता है। ऊपर से बार-बार म्यूनिसिपल कार्पोरेशन की ओर से अतिक्रमण के नाम पर दुकानें हटाने की आशंका बनी रहती थी। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में राधा के पास किट तो दूर बैट खरीदने के पैसे नहीं थे। तब वह लकड़ी को बैट बनाकर अभ्यास करती थी। घर से तीन किमी दूर राजेंद्रनगर में मौजूद स्टेडियम तक पिता साइकिल से उसे छोड़ने जाते और फिर दूसरी ओर से राधा टेम्पो तो कभी पैदल ही घर आती थी।

राधा यादव ने ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का अवार्ड मिलने के बाद कहा, ‘नरेंद्र हिरवानी हमारे (टीम) साथ पिछले साल वेस्टइंडीज के दौरे के समय से है। उन्होंने निश्चित तौर पर मेरी गेंदबाजी पर काफी काम किया है। मैं जरूरत से ज्यादा सोचने लगती थी, जिससे मेरे दिमाग में कई चीजें आ जाती थी, लेकिन उन्होंने मुझे सोच और दिमाग को स्पष्ट रखने में काफी मदद की।’ उन्होंने कहा, ‘हम इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे, इसलिए मैं काफी खुश हूं कि टीम ने लगातार चार मैचों में जीत दर्ज की। मैं अभी अच्छा महसूस कर रही हूं और सेमीफाइनल में और बेहतर प्रदर्शन करना चाहूंगी।’

भारतीय टीम ने मौजूदा टी20 विश्‍व कप के अपने सभी लीग मैच जीतकर सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया है। शनिवार को भारतीय टीम ने श्रीलंका के खिलाफ हुए मैच में राधा यादव की शानदार गेंदबाजी और शैफाली वर्मा के 47 रन की पारी की मदद से महज 14.4 ओवर में तीन विकेट पर 116 रन बनाकर आसान जीत दर्ज की।

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