एनडी तिवारी : एक युग का अंत

जिस तारीख को जन्म, उसी तारीख को निधन होना बहुत कम ही सुना जाता है। लेकिन उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है। 18 अक्टूबर 1925 को नैनीताल के बलूती गांव में जन्मे तिवारी ने लंबी बीमारी के बाद अंतिम सांस भी 18 अक्टूबर 2018 को ही ली। पूरे 93 बरस का लंबा जीवन जीने वाले एनडी तिवारी तिवारी ब्लैक एंड वाइट टीवी युग से 2018 में ट्विटर तक पर छाए रहे।

जितनी एक भारतीय की औसत उम्र है (65 साल), उतना एनडी तिवारी राजनीति में सक्रिय रहे। जिस उम्र में वह खड़े नहीं हो पाते थे और मिक्सी में पिसा खाना खाते थे, उस उम्र में भी राजनीतिक वापसी की। 2002 के बाद से उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन 2012 में 7 उम्मीदवारों को उत्तराखंड में कांग्रेस से चुनाव लड़ाया। रोड शो करके वोट मांगे। हेलिकॉप्टर से घूमे। यूपी में भी उनके प्रचार की डिमांड थी, लेकिन तबीयत खराब थी, तो नहीं आए।

हालांकि 1991 का चुनाव हारने की उनके दिल में ताउम्र कसक रही। वह मानते थे कि दिलीप कुमार के मसले की वजह से हारे थे। कुढ़ते थे कि नरसिम्हा राव बिना चुनाव लड़े प्रधानमंत्री बन गए। तिवारी की रैली में दिलीप कुमार प्रचार करने आए थे, लेकिन विरोधियों ने हंगामा कर दिया कि उन्होंने नाम यूसुफ खान से बदलकर दिलीप कुमार क्यों रखा? यही उनके चुनाव की राह में रोड़ा बन गया। वैसे देखा जाए तो एनडी तिवारी राजनीति में कभी अतीत नहीं हुए। कर्नाटक के नेता पॉर्न देखने की वजह से वापसी नहीं कर पाए। तिवारी की सीडी तक टेलीकास्ट हो गई, लेकिन फिर भी वह अपने अंतिम दिनों तक राजनीति में बरकरार रहे। पीएम पद के बेहद करीब पहुंचे दलित नेता जगजीवन राम बेटे पर लगे स्कैंडल के आरोपों तले दब गए थे, लेकिन एनडी तिवारी बैकग्राउंड के दम पर हमेशा वापसी करते रहे। राख में से फिर जल उठना उनकी फितरत रही।

एक किस्सा यह भी है कि 70 के दशक में यूपी के मुख्यमंत्री रहते हुए एनडी तिवारी ने संजय गांधी की चप्पलें उठाई थीं। उस समय कांग्रेस में संजय गांधी की तूती बोलती थी। हालांकि एनडी खुद कांग्रेसी नेताओं की तारीफें करते थे और उन्हें अपनी तारीफें सुनना भी खासा पसंद था। बताते हैं कि तारीफ करने वालों को एनडी ने खूब निहाल किया। हालांकि उनकी याद्दाश्त काफी कमजोर थी। नाम भूल जाते थे लोगों के। एक दो लड़कियां-महिलाएं ऐसी थीं, जो उनके ‘आशीर्वाद’ से मंत्री तक बनीं। उत्तराखंड का मुख्यमंत्री रहने के दौरान का एक किस्सा है कि जिसे सचिव नियुक्त किया, उसे भूल गए। वह अगले दिन फाइलें लेकर आया, तो उसे बिठाया, नाश्ता कराया, घर-परिवार की बातें कीं। आखिर में पूछा किसी काम से आए थे क्या? उसने फाइलें सामने रख दीं, तो पूछा कि सरकारी फाइलें तुम्हारे पास कैसे? जवाब आया कि आपने ही तो सचिव रखा था। इस वजह से एक आदमी हमेशा उनके पीछे रहता था, जो मिलने वाले के बारे में उन्हें बताता था।

पर्सनल लाइफ : एनडी तिवारी ने 1954 में सुशीला तिवारी से शादी की और 14 मई 2014 को उज्ज्वला शर्मा से शादी की, जिनसे लंबे समय से उनका रिश्ता था और जिनके बायोलॉजिकल बेटे रोहित शेखर के वह पिता थे। उज्ज्वला प्रोफेसर शेर सिंह की बेटी थीं, जो जनता पार्टी की सरकार में मंत्री थे। यह दौर था 70 के आखिर का, जब कांग्रेस सत्ता से बाहर थी। तब उज्ज्वला को तिवारी से प्यार हुआ था। तब तक तिवारी की शादी हो चुकी थी और उज्ज्वला की भी। बताते हैं कि संतान न होने की वजह से दोनों करीब आ गए थे।
राजनीतिक कॅरियर : एनडी आजादी के बाद यूपी में 1952 में हुए पहले चुनाव में नैनीताल से जीतकर विधायक बने प्रजा समाजवादी पार्टी के टिकट पर। 1957 में नैनीताल से जीते और विपक्ष के नेता बने। 1963 में कांग्रेस में गए और काशीपुर से विधायक बनने के साथ यूपी सरकार में मंत्री बने।

1968 में नेहरू युवा केंद्र की स्थापना की। 1969 से 1971 के बीच इंडियन यूथ कांग्रेस के पहले अध्यक्ष रहे। एनडी तिवारी तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री (1976-77, 1985-85, 1988-89) और एक बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री (2002-2007) रहे। 1979 से 1980 के बीच चौधरी चरण सिंह की सरकार में वित्त और संसदीय कार्य मंत्री रहे। 1980 के बाद योजना आयोग के डिप्टी चेयरमैन रहे। 1985-88 में राज्यसभा सांसद रहे। 1985 में उद्योग मंत्री रहे। 1986 से 1987 के बीच तिवारी प्रधानमंत्री राजीव गांधी की कैबिनेट में विदेश मंत्री रहे। 87 से 88 फाइनेंस और कॉमर्स मंत्री भी रहे। 2007 से 2009 के बीच आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रहे, लेकिन एक कथित सेक्स स्कैंडल में फंसने की वजह से उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।

विवादों से रहा नाता

– आंध्र के एक चैनल ने एक वीडियो चलाया था, जिसमें एनडी कथित सेक्स स्कैंडल में फंस गए थे। वीडियो में तिवारी राजभवन में तीन महिलाओं संग लेटे थे।
– 2008 में रोहित शेखर ने पितृत्व वाद दायर करते हुए दावा किया कि तिवारी उनके जैविक पिता हैं। कोर्ट ने डीएनए टेस्ट का आदेश दिया। दिल्ली हाईकोर्ट में तिवारी के वकील ने कहा था कि उनकी रिपोर्ट सीक्रेट रखी जाए, जिसे खारिज कर दिया गया। डीएनए टेस्ट में पता चला कि तिवारी रोहित के पिता थे। मार्च 2014 में रोहित को बेटा माना। 22 मई 2014 को लखनऊ में रोहित की मां उज्ज्वला से शादी की।

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