ऑस्ट्रेलिया सरकार ने लिया 20 लाख जंगली बिल्लियों को मारने का फैसला

सिडनी: ऑस्ट्रेलिया सरकार ने 20 लाख जंगली बिल्लियों को मारने का फैसला किया है। ये काम 2020 तक पूरा किया जाना है। जी हां, ऑस्ट्रेलिया सरकार का मानना है कि यहां बिल्लियां हर साल 377 करोड़ पक्षियों और 649 सरीसृपों को मार देती हैं, जिसके चलते बीस से ज्यादा स्तनधारी जीव प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं। इन बिल्लियों को मारने के लिए ऑस्ट्रेलिया सरकार हवाई जहाज से जहरीले सॉसेज को जमीन पर फेंकेगी।

इन्हें खाकर बिल्लियां सिर्फ 15 मिनट में मर जाएंगी। इस काम के लिए तैनात किए गए विमानों से बिल्ली ग्रस्त क्षेत्रों में प्रत्येक किलोमीटर पर 50 सॉसेज को एयरड्रॉप (ऊपर से गिराया) किया जाएगा। ये जहरीले सॉसेज कंगारू के मांस, चिकन के वसा से बने होंगे। वहीं, ट्विटर पर ऑस्ट्रेलिया सरकार के इस फैसले का विरोध हो रहा है। लोगों का कहना है कि इस समस्या से निपटने के लिए कोई और तरीका खोजें। मालूम हो कि विदेशों में लोगों को बिल्लियां पालने का बहुत शौक होता है। सरकार के इस निर्णय से सभी को हैरानी भी हो रही है।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- -----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper