करिए भारत के 10 खूबसूरत शहरों का भ्रमण

भारत दुनिया भर से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यहां की संस्कृति पूरी दुनिया में मशहूर है। पर्यटक यहां शांति की खोज के लिए भी आते हैं। यहां पर्यटन के लिए बहुत सुंदर स्थल हैं। गौरतलब है कि भारत तेज़ी से विदेशी पर्यटकों के लिए पसंदीदा स्थल के रूप में उभर रहा है। हर साल यहां दुनिया के कोने कोने से पर्यटक आते हैं और यहां की सुंदरता और विविधता का आनंद लेते हैं। कभी त्यौहार, तो कभी किसी समारोह में आने वाले विदेशी पर्यटक यहां के रंग में रंग जाते हैं। भारत के लोगों का अपनापन भी पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। आज हम आपको भारत के कुछ चुनिंदा ऐतिहासिक स्थलों के बारे में बता रहे हैं। यहां फैमिली या पार्टनर के साथ भी आया जा सकता है। आइए हम आपको भारत के 10 खूबसूरत शहरों का भ्रमण कराते हैं।

हवा महल, जयपुर

गुलाबी नगरी जयपुर की आलीशान इमारत ‘हवामहल’ राजस्थान के प्रतीक के रूप में दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इस इमारत में 365 खिड़कियां और झरोखे बने हैं। इसका निर्माण 1799 में जयपुर के महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था। राजस्थानी और फारसी स्थापत्य शैलियों के मिले-जुले रूप में बनी यह इमारत जयपुर के ‘बड़ी चौपड़’ चौराहे से चांदी की टकसाल जाने वाले रास्ते पर स्थित है। हवामहल के आनंदपोल और चांदपोल नाम के दो द्वार हैं। आनंदपोल पर बनी गणेश प्रतिमा के कारण इसे गणेश पोल भी कहते हैं। गुलाबी नगरी का यह गुलाबी गौरव अपनी अद्भुत बनावट के कारण ही आज विश्वविख्यात है।

चारमीनार, हैदराबाद

हैदराबाद शहर की पहचान बन चुका चारमीनार इस्लामिक वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। चारमीनार 1591 में शहर के अंदंर प्लेग की समाप्ति की खुशी में मुहम्मद कुली कुतुबशाह द्वारा बनवाई गई वास्तुकला का एक नमूना है। शहर की पहचान मानी जाने वाली चारमीनार चार मीनारों से मिलकर बनी एक चौकोर प्रभावशाली इमारत है। इसके मेहराब में हर शाम रोशनी की जाती है, जो एक अविस्मरणीय दृश्य बन जाता है। हैदराबाद हवाई जहाज, रेल, बस और टैक्सी से पहुंचा जा सकता है। चारमीनार हैदराबाद रेलवे स्टेशन से लगभग सात किलो मीटर की दूरी पर है। यह बस स्टेशन से पांच किलो मीटर की दूरी पर है। निजी परिवहन से भी यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।

सांची स्तूप
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और विदिशा के बीच बसा सांची स्तूप दुनियाभर के सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र है। ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक ने यह सांची स्तूप बनवाया था। यह स्तूप शांति,आस्था, साहस और प्रेम का प्रतीक है।सम्राट अशोक ने इस स्तूप का निर्माण बौद्ध धर्म की शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए करवाया था। लंबे समय तक गुमनामी के अंधेरे में रहने वाला सांची स्तूप अब न सिर्फ दुनियाभर में मशहूर हो चुका है,बल्कि अपने ऐतिहासिक महत्व के कारण यूनेस्को के विश्व धरोहर की सूची में भी शामिल है। सांची के लिए हवाई जहाज, रेल, बस आदि के द्वारा आराम से प्रस्थान किया जा सकता है।

फतेहपुर सीकरी
आगरा जिले का छोटा सा शहर फतेहपुर सीकरी आज भी अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजे हुए है। मुगल बादशाह अकबर ने इस शहर को बसाया था। इस शहर में मुगल सभ्यता,कला और संस्कृति की झलक मिलती है।एक दशक से भी ज़्यादा समय तक फतेहपुर सीकरी मुगलों की राजधानी था। यहां की सबसे ऊंची इमारत बुलंद दरवाज़ा है और इसकी ऊंचाई 280 फुट है। इसे अकबर ने 1602 ई. में गुजरात विजय के स्मारक के रूप में बनवाया था। इसके अलावा जामा मस्जिद,शेख सलीम चिश्ती की समाधि,दिवान-ए-आम,दिवान-ए-खास,पंचमहल, बीरबल का महल आदि यहां की मुख्य इमारते हैं। फतेहपुर सीकरी जाने के लिए आगरा नज़दीकी एयरपोर्ट है। यहां से फतेहपूर की दूरी 40 किमी है। यहां नजदीकी रेलवे स्टेशन फतेहपुर सीकरी है।

मैसूर पैलेस

महाराजा पैलेस, राजमहल मैसूर के कृष्णराजा वाडियार चतुर्थ का है। इससे पहले का राजमहल चन्दन की लकड़ियों से बना था।एक दुर्घटना में इस राजमहल की बहुत क्षति हुई जिसके बाद यह दूसरा महल बनवाया गया।मैसूर पैलेस दविड़, पूर्वी और रोमन स्थापत्य कला का अद्भुत संगम है। नफासत से घिसे सलेटी पत्थरों से बना यह महल गुलाबी रंग के पत्थरों के गुंबदों से सजा है।महल में एक बड़ा सा दुर्ग है जिसके गुंबद सोने के पत्थरों से सजे हैं। ये सूरज की रोशनी में खूब जगमगाते हैं।दूसरे महलों की तरह यहां भी राजाओं के लिए दीवान-ए-खास और आम लोगों के लिए दीवान-ए-आम है। यहां बहुत से कक्ष हैं जिनमें चित्र और राजसी हथियार रखे गए हैं। राजसी पोशाकें, आभूषण, तुन (महोगनी) की लकड़ी की बारीक नक्काशी वाले बड़े-बड़े दरवाज़ें और छतों में लगे झाड़-फानूस महल की शोभा में चार चांद लगाते हैं। यह महल सुबह 10 से शाम के 4.30 बजे तक खुला रहता है। शाम के समय रोशनी में नहाए मैसूर पैलेस की शोभा देखते ही बनती है। यह महल अब म्यूज़ियम में तब्दील हो चुका है।

लाल किला, दिल्ली
लाल किले की नींव शाहजहां के शासन काल में पड़ी थी। इसे पूरा होने में 9 साल का समय लगा। अधिकांश इस्लामिक इमारतों की तरह यह किला भी अष्टभुजाकार है। उत्तर में यह किला सलीमगढ़ किले से जुड़ा हुआ है। लाहौरी गेट के अलावा यहां प्रवेश का दूसरा द्वार हाथीपोल है। इसके बारे में माना जाता है कि यहां पर राजा और उनके मेहमान हाथी से उतरते थे।लाल किले के अन्य प्रमुख आकर्षण हैं मुमताज महल, रंग महल, खास महल, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, हमाम और शाह बुर्ज। यह किला भारत की शान है। इसी किले पर स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और भाषण देते हैं। 1562-1572 के बीच बना यह मकबरा आज दिल्ली के प्रमुख पर्यटक स्थलों में एक है। इसके फारसी वास्तुकार मिरक मिर्जा गियायुथ की छाप इस इमारत पर साफ देखी जा सकती है। यह मकबरा यमुना नदी के किनारे संत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह के पास स्थित है। यूनेस्को ने इसे विश्वश धरोहर का दर्जा दिया है।

पुराना किला, दिल्ली

इस किले का निर्माण सूर वंश के संस्थापक शेरशाह सूरी ने 16वीं सदी में करवाया था। 1539-40 में शेरशाह सूरी ने मुगल बादशाह हुमायूं को हराकर दिल्ली और आगरा पर कब्जा कर लिया। 1545 में उनकी मृत्यु के बाद हुमायूं ने पुन: दिल्ली और आगरा पर अधिकार कर लिया था। शेरशाह सूरी द्वारा बनवाई गई लाल पत्थरों की इमारत शेर मंडल में हुमायूं ने अपना पुस्तकालय बनाया। यह किला केवल देशी-विदेशी पर्यटकों को ही आकर्षित नहीं करता बल्कि इतिहासकारों को भी लुभाता है। हाल ही में भारतीय पुरातत्व विभाग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जिस स्थान पर पुराना किला बना है उस स्थान पर इंद्रप्रस्थ बसा हुआ था। इंद्रप्रस्थ को पुराणों में महाभारत काल का नगर माना जाता है। इसमें प्रवेश करने के तीन दरवाजे हैं- हुमायूं दरवाजा, तलकी दरवाजा और बड़ा दरवाजा।वर्तमान में यहां एक बोट क्लब है जहां नौकायन का आनंद लिया जा सकता है। पास ही चिड़ियाघर भी है।

आमेर महल, जयपुर

जयपुर के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में शुमार है आमेर का शानदार महल। अरावली की मध्यम ऊंचाई पर स्थित आमेर महल का निर्माण सोलहवीं सदी में किया गया था। इस शानदार महल को देखते हुए उस समय की उत्कृष्ट मुगल और राजपूत निर्माण शैली का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस भव्य महल की तुलना दुनिया के शानदार महलों से की जाती है। आमेर महल में विशाल जलेब चौक, शिला माता मंदिर, दीवाने आम, गणेश पोल, शीश महल, सुख मंदिर, मुगल गार्डन, रानियों के महल आदि सब देखने लायक हैं। शीश महल में कांच की नक्काशी का जादू ऐसा है कि मुगले आजम से लेकर जोधा अकबर तक दर्जनों बॉलीवुड फिल्मों में अपनी धाक जमा चुका है। हाल ही आमेर महल से जयगढ़ जाने के लिए एक पुरानी टनल को पर्यटकों के लिए खोला गया है।जयगढ़ किले पर रखी जयबाण तोप एशिया की विशाल तोपों में से एक है।

जलमहल, जयपुर

जलमहल पानी पर तैरते खूबसूरत शिकारे की तरह लगने वाला एक शानदार ऐतिहासिक स्थल है। जयपुर शहर से लगभग 8 किमी उत्तर में आमेर रोड पर जलमहल स्थित है। मानसागर झील के बीच स्थित इस महल की खूबसूरती बेमिसाल है। इसका निर्माण आमेर में लगातार पानी की कमी के चलते कराया गया था। जयपुर के राजा महाराजा यहां अवकाश मनाने के लिए आते थे। वर्तमान में यह पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। जलमहल तक पहुंचने के लिए शहर से सिटी बस उपलब्ध हैं। इसके अलावा निजी वाहन या टैक्सी से भी यहां पहुंचा जा सकता है। जलमहल के अंदर पहुंचने के लिए नौकाओं की व्यवस्था है।

जैसलमेर का किला
राजस्थान में थार की मरूभूमि के हृदय स्थल पर चस्पा जैसलमेर एक ऐसा रेतीला परिवेश है, जहां सुनहरे सपनों की फसलें खूब फलती-फूलती हैं। यह क्षेत्र मरूभूमि पर सुनहरी मरीचिका के समान है जहां एक बार जाने के बाद पर्यटक बार-बार जाने का मोह नहीं छोड़ पाते। जैसलमेर के दर्शनीय स्थलों में यहां का प्राचीनतम किला सबसे खास है। यह किला नगर के सामान्य भू-स्तर से लगभग 100 मीटर ऊपर स्थित है। यहां स्थापित समाधियों की छतों में बारीक नक्काशी देखने लायक है। यही नहीं, यहां पूर्व सम्राटों की नक्काशीदार घुड़सवार मूर्तियों का जादू भी सिर चढ़कर बोलता है। कब जाएं: जैसलमेर जाने का सबसे सही समय अक्टूबर से मार्च होता है। हर साल जनवरी-फरवरी में जैसलमेर में रेगिस्तान उत्सव मनाया जाता है। इस दौरान ऊंट की दौड़, लोक संगीत और नृत्य और पपेट शो आयोजित किए जाते हैं।

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