कलयुग के देवता चिरंजीवी हनुमान की भूलकर भी नहीं रखनी चाहिए ऐसी तस्वीर

भगवान श्री राम जी के परम भक्त पवनपुत्र हनुमान जी को माना जाता है कि वे इस कलयुग में भी है और जहाँ जहाँ भगवान श्री राम का कीर्तन होता है वहां हनुमान जी अवश्य पधारते है। हनुमान जी जल्द ही प्रसन्न हो जाते है और अपने भक्तों के सभी कष्ट दूर कर देते है। हनुमान चालीसा का पाठ करने से हनुमान जी जल्दी प्रसन्न हो जाते है।

आइये जानते है हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए घर में उनकी किस तरह की तस्वीर रखनी चाहिए और किस तरह की नहीं ?

  • घर में हनुमान जी ऐसी तस्वीर या मूर्ति नहीं रखनी चाहिए जिसमे हनुमान जी ने अपनी छाती चीर रखी हो।
  • कभी भी आकाश में उड़ते हुए हनुमान जी या संजीवनी लाते हुए हनुमान जी की तस्वीर घर में नहीं लगानी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार हनुमान जी पूजा हमेशा स्थिर अवस्था में रखनी चाहिए।
  • घर में कभी भी राक्षसों का संहार करते हुए हनुमान जी की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए।
  • कभी भी भगवान राम और लक्ष्मण को कंधे पर बैठा कर ले जाते हुए हनुमान जी की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए।
  • हनुमान जी ने जो लंका दहन किया है उस तरह के लंका दहन को दर्शाने वाले हनुमान जी की तस्वीर नहीं लगानी चाहिए।
  • घर में हनुमान जी युवा अवस्था वाली पीले वस्त्र धारण की हुई तस्वीर लगानी चाहिए। यह घर के लिए शुभ होती है।
  • घर में पढ़ाई करने वाली जगह पर हनुमान जी की लंगोट धारण की हुई तस्वीर लगानी चाहिए इससे मन एकाग्र होता है।
  • भगवान राम जी की सेवा कर रहे हनुमान की तस्वीर लगाने से घर में धन वर्षा होती है।
  • घर के डाइनिंग रूम में पूरे राम दरबार की तस्वीर लगानी चाहिए इससे पूरे परिवार में प्यार और अपनापन बढ़ता है।
  • मुख्य द्वार पर पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा लगाने से घर में कोई भी नकारात्मक शक्ति प्रवेश नहीं करती है। परिवार के सदस्यों पर किसी भी प्रकार का कोई संकट नहीं आता है।
  • वैवाहिक लोगों को अपने बेडरूम में हनुमान जी तस्वीर नहीं लगानी चाहिए।
नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper