कलियुग में धरती पर संजीवनी है कलौंजी, जानिए उपयोग, गुण, दोष और लाभ

कलयुग में धरती पर संजीवनी है कलौंजी, अनगिनत रोगों को चुटकियों में दूर कर देती है।

कैसे करें इसका सेवन?

  • कलौंजी के बीजों का सीधा- सीधा सेवन किया जा सकता है।
    एक छोटा चम्मच कलौंजी को शहद में मिश्रित करके इसका प्रयोग करें।
    • पानी में कलौंजी को उबालकर छान लें और फिर इसे पिएँ।
    • दूध में कलौंजी उबालें फिर ठंडा होने दें अब इस मिश्रण को पिएँ।
    • कलौंजी को ग्राइंड करें पानी तथा दूध के साथ इसका सेवन करें।
    • कलौंजी को ब्रैड, पनीर तथा पेस्ट्रियों पर छिड़क कर भी इसका सेवन कर सकते है।

    ये किन-किन रोगों में सहायक है?

1.टाइप-डायबिटीज: प्रतिदिन 2 ग्राम कलौंजी के सेवन से परिणामस्वरूप तेज हो रहा ग्लूकोज कम हो जाता है। इंसुलिन रैजिस्टैंस घटती है,बीटा सैल की कार्यप्रणाली में भी वृद्धि होती है तथा ग्लाइकोसिलेटिड हीमोग्लोबिन में कमी आती है।

2.मिर्गी: 2007 में हुए एक अध्ययन के अनुसार मिर्गी से पीड़ित बच्चों में कलौंजी के सत्व का सेवन दौरे को कम कर देता है।

3.उच्च रक्तचाप: 100 या 200 मि.ग्रा. कलौंजी के सत्व के दिन में दो बार सेवन से हाइपरटैंशन के मरीजों में ब्लड प्रैशर कम हो जाता है। रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) में एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से रक्तचाप सामान्य बना रहता है। और 28 मि.ली. जैतुन का तेल और एक चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर पूरे शरीर पर मालिश करे और आधे घंटे तक धूप में रहने से रक्तचाप में काफी लाभ मिलता है। यह क्रिया हर तीसरे दिन एक महीने तक जरुर करना चाहिए।

4.गंजापन: जली हुई कलौंजी को हेयर ऑइल में मिलाकर नियमित रूप से सिर पर मालिश करने से गंजापन दूर होकर बाल उग आते हैं।

5.त्वचा के विकार: कलौंजी के चूर्ण को नारियल के तेल में मिलाकर त्वचा पर मालिश करने से त्वचा के विकार नष्ट हो जाते हैं।

6.लकवा: कलौंजी का तेल एक चौथाई चम्मच की मात्रा में ले कर एक कप दूध के साथ कुछ महीने तक प्रतिदिन पीने और से और रोगग्रस्त अंगों पर कलौंजी के तेल से मालिश करने से लकवा रोग ठीक हो जाता है।

7.कान की सूजन,बहरापन: कलौंजी का तेल कान में डालने से कान की सूजन दूर हो जाती है। और इससे बहरेपन में भी लाभ होता है।

8.सर्दी-जुकाम: कलौंजी के बीजों को सेंककर और कपड़े में लपेटकर सूंघने से और कलौंजी का तेल और जैतून का तेल बराबर की मात्रा में नाक में टपकाने से सर्दी और जुकाम समाप्त हो जाता है। आधा कप पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल व चौथाई चम्मच जैतून का तेल मिलाकर इसको इतना उबालें कि पानी खत्म हो जाए और केवल तेल ही रह जाए। इसके बाद इसे छानकर 2 बूंद नाक में डालें। इससे सर्दी और जुकाम बिलकुल ठीक हो जाता है। यह पुराने जुकाम में भी बहुत लाभकारी होता है।

9.कलौंजी को पानी:में उबालकर इसका सत्व पीने से अस्थमा में इसका काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है।

10.छींके: कलौंजी और सूखे चने को एक साथ अच्छी तरह मसलकर किसी कपड़े में बांधकर सूंघने से छींके आनी एकदम बंद हो जाती है।

11.पेट के कीडे़: दस ग्राम कलौंजी को पीसकर 3 चम्मच शहद के साथ रोज़ रात को सोते समय कुछ दिन तक नियमित रूप से सेवन करने से पेट के कीडे़ नष्ट हो जाते हैं।

12.प्रसव की पीड़ा: कलौंजी का काढ़ा बनाकर सेवन करने से प्रसव की पीड़ा दूर हो जाती है।

13.पोलियों का रोग: आधा कप गर्म पानी में एक चम्मच शहद व आधे चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय लें। इससे पोलियों का रोग ठीक हो जाता है।

14मुँहासे: सिरके में कलौंजी को पीसकर रात को सोते समय पूरे चेहरे पर लगाएं और सुबह पानी से चेहरे को धोले ऐसा करने से मुंहासे कुछ ही दिनों में ठीक हो जाते हैं।

15.स्फूर्ति: स्फूर्ति (रीवायटल) के लिए नांरगी के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सेवन करने से आलस्य और थकान एकदम दूर हो जाती है।

16.गठिया: कलौंजी को रीठा के पत्तों के साथ काढ़ा बनाकर पीने से गठिया का रोग समाप्त हो जाता है।

17.जोड़ों का दर्द: एक चम्मच सिरका, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह- सुबह खाली पेट और रात को सोते समय पीने से जोड़ों का दर्द ठीक हो जाता है।

18.आँखों के सभी रोग: आँखों की लाली, मोतियाबिन्द, आँखों से पानी का आना, आँखों की रोशनी कम होना आदि। इस तरह के आँखों के सभी रोगों में एक कप गाजर का रस, आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करें। इससे आँखों के सभी रोग ठीक हो जाते हैं। आँखों के चारों तरफ और पलकों पर कलौंजी का तेल रात को सोते समय लगाएं। इससे आँखों के सभी रोग समाप्त हो जाते हैं। रोगी को अचार, बैंगन, अंडा व मछली नहीं खाना चाहिए।

19.स्नायुविक व मानसिक तनाव: एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल डालकर रात को सोते समय पीने से स्नायुविक व मानसिक तनाव काफी दूर हो जाता है।

20.गांठ: कलौंजी के तेल को गांठो पर लगाने और एक चम्मच कलौंजी का तेल गर्म दूध में डालकर पीने से गांठ नष्ट हो जाती है।

21.मलेरिया का बुखार: पिसी हुई कलौंजी आधा चम्मच और एक चम्मच शहद मिलाकर चाटने से मलेरिया का बुखार एकदम ठीक हो जाता है।

22.स्वप्नदोष: यदि रात को नींद में वीर्य अपने आप निकल जाता हो तो एक कप सेब के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करें इससे स्वप्नदोष दूर हो जाता है। प्रतिदिन कलौंजी के तेल की चार बूंद एक चम्मच नारियल तेल में मिलाकर सोते समय सिर में लगाने से स्वप्न दोष का रोग ठीक हो जाता है। उपचार करते समय नींबू का सेवन बिलकुल न करें।

23. कब्ज: चीनी 5 ग्राम, सोनामुखी 4 ग्राम, 1 गिलास हल्का गर्म दूध और आधा चम्मच कलौंजी का तेल। इन सभी चीजों को एक साथ मिलाकर रात को सोते समय पीने से कब्ज नष्ट हो जाता है।

24.खून की कमी: एक कप पानी में 50 ग्राम हरा पुदीना उबाल लें और इस पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह- सुबह खाली पेट एवं रात को सोते समय इसका सेवन करें। इससे 21 दिनों में खून की कमी दूर हो जाएगी| रोगी को खाने में खट्टी वस्तुओं का उपयोग बिलकुल नहीं करना चाहिए।

25.पेट दर्द: किसी भी कारण से अगर पेट दर्द हो तो एक गिलास नींबू पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीएं। उपचार करते समय रोगी को बेसन की चीजे नहीं खानी चाहिए। या चुटकी भर नमक और आधे चम्मच कलौंजी के तेल को आधा गिलास हल्के गर्म पानी में मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है। या फिर 1 गिलास मौसमी के रस में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 2 बार पीने से पेट का दर्द समाप्त हो जाता है।

26.सिर दर्द: कलौंजी के तेल को ललाट से कानों तक अच्छी तरह मलनें और आधा चम्मच कलौंजी के तेल को 1 चम्मच शहद में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से सिर दर्द ठीक हो जाता है। कलौंजी खाने के साथ- साथ सिर पर कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर मालिश करें। इससे सिर दर्द में आराम काफी मिलता है और सिर से सम्बंधित अन्य रोग भी दूर हो जाते हैं। कलौंजी के बीजों को गर्म करके पीस लें और कपड़े में बांधकर इसे सूंघें। इससे सिर का दर्द दूर हो जाता है। कलौंजी और काला जीरा एक बराबर मात्रा में लेकर पानी में पीस लें और माथे पर लेप करें। इससे सर्दी के कारण होने वाला सिर का दर्द भी दूर हो जाता है।

27.उल्टी: आधा चम्मच कलौंजी का तेल और आधा चम्मच अदरक का रस मिलाकर सुबह-शाम पीने से उल्टी बंद हो जाती है।

28.हार्निया: तीन चम्मच करेले का रस और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह खाली पेट एवं रात को सोते समय पीने से हार्निया रोग बिलकुल ठीक हो जाता है।

29.मिर्गी के दौरें: एक कप गर्म पानी में 2 चम्मच शहद और आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से मिर्गी के दौरें ठीक हो जाते हैं। मिर्गी के रोगी को ठंडी चीजे जैसे- कि अमरूद, केला, सीताफल आदि बिलकुल नहीं देना चाहिए।

30.पीलिया: एक कप दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर प्रतिदिन 2 बार सुबह व खाली पेट और रात को सोते समय 1 सप्ताह तक लेने से पीलिया रोग समाप्त हो जाता है। पीलिया से पीड़ित रोगी को खाने में मसालेदार व खट्टी वस्तुओं से परहेज़ करना चाहिए।

31.कैंसर का रोग: एक गिलास अंगूर के रस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर दिन में 3 बार पीने से कैंसर का रोग एकदम ठीक हो जाता है। इससे आंतों का कैंसर, ब्लड कैंसर व गले का कैंसर आदि में भी काफी लाभ मिलता है। इस रोग में रोगी को औषधि देने के साथ ही एक किलो जौ के आटे में 2 किलो गेहूं का आटा मिलाकर इसकी रोटी, दलिया बनाकर रोगी को अवश्य देना चाहिए। और इस रोग में आलू, अरबी और बैंगन का सेवन नहीं करना चाहिए। कैंसर के रोगी को कलौंजी डालकर हलवा बनाकर भी खाना चाहिए।

32.दांत: कलौंजी का तेल और लौंग का तेल 1-1 बूंद मिलाकर दांत व मसूढ़ों पर लगाने से दर्द ठीक हो जाता है। आग में सेंधानमक जलाकर बारीक पीस लें और इसमें 2-4 बूंदे कलौंजी का तेल डालकर दांत साफ करें। इससे दांत साफ व स्वस्थ रहते हैं। दांतों में कीड़े लगना व खोखलापन रात को सोते समय कलौंजी के तेल में रुई को भिगोकर खोखले दांतों में रखने से भी कीड़े नष्ट हो जाते हैं।

33.नींद: रात में सोने से पहले आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से नींद बहुत अच्छी आती है।

34.मासिकधर्म: • कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में सुबह व शाम सेवन करने से मासिकधर्म शुरू हो जाता है। इससे गर्भपात होने की भी संभावना नहीं रहती है। जिन माताओं व बहनों को मासिकधर्म कष्ट से आता है उनके लिए कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मासिकस्राव का सारा कष्ट दूर हो जायेगा और बंद मासिकस्राव भी शुरू हो जा जाता है। कलौंजी का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर चाटने से ऋतुस्राव की पीड़ा नष्ट हो जाती है। मासिकधर्म की अनियमितता में करीब आधा से डेढ़ ग्राम की मात्रा में कलौंजी के चूर्ण का सेवन करने से मासिकधर्म नियमित समय पर आने लगेगा।

यदि मासिकस्राव बंद हो गया हो और पेट में दर्द हमेशा रहता हो तो एक कप गर्म पानी में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और दो चम्मच शहद मिलाकर सुबह व शाम पीना चाहिए। इससे बंद मासिकस्राव शुरू हो जाता है। कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन 2-3 बार सेवन करने से मासिकस्राव शुरू हो जाता है।

35.गर्भवती महिलाओं को वर्जित: *गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन कभी नहीं कराना चाहिए क्योंकि इससे गर्भपात भी हो सकता है।

36.स्तनों का आकार: कलौंजी आधे से एक ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह व शाम पीने से स्तनों का आकार भी बढ़ता है और स्तन सुडौल बनता है।

37.स्तनों में दूध: कलौंजी को आधे से 1 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह व शाम खाने से स्तनों का दूध बढ़ता है।

38.स्त्रियों के चेहरे व हाथ-पैरों की सूजन: कलौंजी पीसकर लेप करने से हाथ पैरों की सूजन दूर हो जाती है।

39.बाल लम्बे व घने: 50 ग्राम कलौंजी 1 लीटर पानी में उबाल लें और फिर इस पानी से बालों को धोएं इससे बाल लम्बे व घने हो जाते हैं।

4.बेरी-बेरी रोग: बेरी-बेरी रोग में कलौंजी को पीसकर हाथ-पैरों की सूजन पर लगाने से सूजन मिट जाती है।

41.भूख का अधिक लगना: 50 ग्राम कलौंजी को सिरके में रात को भिगो दें और फिर सुबह पीसकर शहद में मिलाकर 4-5 ग्राम की मात्रा सेवन करें। इससे भूख का अधिक लगना कम हो जाता है।

42.नपुंसकता:कलौंजी का तेल और जैतून का तेल मिलाकर पीने से नपुंसकता दूर हो जाती है।

43.खाज-खुजली: 50 ग्राम कलौंजी के बीजों को पीस लें और इसमें 10 ग्राम बिल्व के पत्तों का रस व 10 ग्राम हल्दी मिलाकर लेप बना लें। यह लेप खाज-खुजली में प्रतिदिन लगाने से रोग एकदम ठीक हो जाता है।

44.नाड़ी का छूटना: नाड़ी के छूटना के लिए आधे से 1 ग्राम कालौंजी को पीसकर रोगी को देने से शरीर का ठंडापन दूर हो जाता है और नाड़ी की गति भी तेज हो जाती है। इस रोग में आधे से 1 ग्राम कालौंजी हर 6 घंटे पर लें और ठीक होने पर इसका प्रयोग बंद कर दें। कलौंजी को पीसकर लेप करने से नाड़ी की जलन व सूजन भी दूर हो जाती है।

45.हिचकी: एक ग्राम पिसी कलौंजी शहद में मिलाकर चाटने से हिचकी आनी बंद हो जाती है तथा कलौंजी आधा से एक ग्राम की मात्रा में मठ्ठे के साथ प्रतिदिन 3-4 बार सेवन से हिचकी दूर हो जाती है। या फिर कलौंजी का चूर्ण 3 ग्राम मक्खन के साथ खाने से भी हिचकी दूर होती है। और यदि 3 ग्राम कलौंजी पीसकर दही के पानी में मिलाकर खाने से भी हिचकी ठीक हो जाती है।

46.स्मरण शक्ति: लगभग 2 ग्राम की मात्रा में कलौंजी को पीसकर 2 ग्राम शहद में मिलाकर सुबह व शाम खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती जाती है।

47.पेट की गैस: कलौंजी, जीरा और अजवाइन को एक बराबर मात्रा में पीसकर एक चम्मच की मात्रा में खाना खाने के बाद लेने से पेट की गैस नष्ट हो जाती है।

48.पेशाब की जलन: 250 मिलीलीटर दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से पेशाब की जलन भी दूर हो जाती है।

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