कांग्रेस और बीजेपी तैयार कर रही है कुछ ऐसी चुनावी फ़ौज

दिल्ली ब्यूरो: आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और बीजेपी जो रणनीति बना रही है वह देखने में भले ही अलग अलग दिख रही हो लेकिन दोनों की कार्यशैली लगभग एक ही है। एक तरफ बीजेपी की चुनावी कमान पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह सम्हाले हुए हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस की कमान अकेले राहुल गाँधी सम्हाल रहे हैं। जिस तरह से दोनों पार्टियां जनता के पास पहुँचने और अपनी बात को जनता के बीच रखने के लिए तकनीक और एक्सपर्ट का इस्तेमाल करते दिख रहे है ऐसे में कहा जा रहा है कि अलग -अलग सोच वाली ये दोनों पार्टियां एक समानता लिए हुए काम कर रही है। लेकिन यह साफ़ हो गया है कि दोनों पार्टियां नए तरीके से चुनावी फ़ौज को तैयार कर रही है।

खबर के अनुसार, कांग्रेस अगले चुनाव को फतह करने के लिएबड़े स्तर पर पेशेवरों की सेवा लेने जा रही है। जानकारी के मुताबिक़ कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई साक्षात्कार और लिखित परीक्षा के जरिए प्रवक्ताओं की भर्ती कर रही है।सूत्रों से मिली जानकारी के मुताविक इस तरह की लिखित परीक्षा 70 लोग बैठे थे। इसके बाद उसमें पास हुए उम्मीदवारों का साक्षात्कार हुआ। इसमें अलग-अलग मसलों पर उनसे 14 सवाल किए गए। सूत्रों की मानें तो इस प्रक्रिया में चयनित उम्मीदवारों की सूची शनिवार को जारी की जा सकती है। चयनित उम्मीदवराें को 2019 के चुनाव के लिए प्रवक्ता की ज़िम्मेदारी दी जाएगी। इनका काम शोध के आधार पर पार्टी की बातों को जनता तक पहुंचाने की होगी और बीजेपी पर वार करना होगा। खबर के मुताविक इन प्रवक्ताओं में कुछ तकनिकी एक्सपर्ट भी शामिल किये जा रहे हैं।

उधर अंग्रेजी समाचार पत्र में छपी खबर के मुताबिक़, 2019 के लोक सभा चुनाव के लिए भाजपा और उसकी अगुवाई कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जुड़े पेशेवरों ने अपना काम शुरू कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि अभी हाल में ही प्रधानमंत्री मोदी के साथ ऐसे 15 लोगों की लगभग दो घंटे तक लंबी बातचीत हुई है। इनमें कुछ फिल्म निर्माता थे। साथ ही शोधकर्ता, अर्थशास्त्री, विज्ञापन निर्माता आदि भी शामिल थे। इन सभी ने प्रधानमंत्री को विभिन्न मसलों अपने-अपने प्रस्तुतीकरण दिए। उन्हें बताया कि किस तरह अगले चुनाव में केंद्र सरकार की नीतियों को जनता तक पहुंचाया जा सकता है।

भाजपा के लिए ‘ब्रांड मोदी’ की छवि को और मज़बूत किया जा सकता है। अख़बार ने इस बैठक में मौज़ूद रहे कई लोगों से बातचीत की। हालांकि उनमें से सभी नाम जाहिर न करने की शर्त पर ही बात करने काे राजी हुए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने इस दौरान सभी लोगों की राय को ध्यान से सुना और बोले कम। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि देश के ज़्यादा से ज़्यादा लोगों और ख़ास तौर पर युवाओं तक कैसे पहुंचें इस पर विचार करें। उन्हें बताना है कि सरकार के बारे में बनाई जा रही यह धारणा झूठी है कि वह सिर्फ़ चंद उद्योगपतियों की सुनती है। साथ में यह भी कि नोटबंदी और जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) जैसे क़दम जल्दबाज़ी में नहीं उठाए गए। इनसे आगे चलकर देश को बड़ा फ़ायदा होने वाला है।

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