कानपुर प्राणि उद्यान में 14 माह के बाघ अकबर की हृदय गति रुकने से मौत

कानपुर: कानपुर प्राणि उद्यान में सोमवार रात 14 माह के बाघ अकबर की मौत हो गई। रात में ही प्राणि उद्यान के पशु चिकित्सकों के दल ने पोस्टमार्टम किया। रिपोर्ट में श्वास नली में मांस के टुकड़े फंसने के चलते हृदय गति रुकने का मामला सामने आया है। बाघ अकबर की मौत के बाद से प्राणि उद्यान कर्मियों में मायूसी छा गई है।

प्राणि उद्यान में बाघिन त्रुशा ने बीते साल 2017 में 10 अप्रैल को चार शावकों को जन्म दिया। तीन नर व एक मादा शावक होने के चलते प्राणि उद्यान प्रबंधन ने उनके नाम मशहूर फिल्म के टाइटल पर रखते हुए अमर, अकबर, एंथोनी के अलावा मादा शावक का नाम अम्बिका रखा। काफी मुश्किलों व निगरानी के बाद शावकों को रखा गया। मौजूदा समय में त्रुशा के अलावा नर शावकों में अमर व अकबर कानपुर प्राणि उद्यान में दर्शकों का मन मोह रहे थे। जबकि एंथोनी व अम्बिका को जोधपुर चिड़ियाघर को जानवरों की अदला-बदली में दिया जा चुका है।

बीती रात अचानक यहां 14 माह के नर बाघ अकबर की तबीयत बिगड़ गई। प्राणि उद्यान के डॉक्टर जब तक उसका इलाज करते उसकी मौत हो गई। बाघ की मौत को देखते हुए रात में ही डॉक्टरों ने दल ने उसका पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चौकाने वाले तथ्य सामने आया ोर्ट की माने तो बाघ अकबर की श्वास नली में मांस के टुकड़े फंसे हुए थे। जिसके चलते उसे सांस लेने में कई दिनों से दिक्कत हो रही थी लेकिन बाघ अकबर की समस्या देखरेख करने वाले केयरटेकर कर्मी नहीं समझ सके। जिसके चलते उसकी तकलीफ बढ़ गई और बीती रात उसकी हृदय गति रुकने मौत हो गई।

प्राणि उद्यान निदेशक कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि नर शावक की मौत कार्डियो रेस्पाइरेट्री सिस्टम के काम बंद करने से हुई है। फिलहाल शावकों की देखरेख करने वाले कर्मियों से पूछताछ की जा रही है। निदेशक ने श्वास नली में मांस के टुकड़े फसे होने के सवाल पर बताया कि यह जांच का विषय है कि किस दिन शावकों को मांस के बड़े टुकड़े दिये जा रहे थे या छोटे। जांच के बाद लापरवाही मिलने पर कर्मी के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

मंगलवार को रोजना की तरह बाड़े में शावक अमर अकेला था। वह साथी अकबर ने मिलने पर बाड़े पर सुबह अठखेलियां करने के बजाय उदास बैठा रहा। वहीं, इस बीच बाघिन त्रुशा बाड़े में एक शावक को न पाकर दहाड़ मारते हुए अपना गुस्सा व्यक्त कर रही। 14 माह के अकबर की मौत से सबसे ज्यादा दुखी उसकी देखरेख करने वाले कर्मियों में देखी जा रही है। बाघिन त्रुशा द्वारा जन्मे शावकों में अकबर चौथा शावक है, जिसकी मौत हुई है। दो साल पूर्व भी त्रुशा के तीन शावकों मौत हो गई थी।

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