कानपुर में गंगा में डूबे सभी छह बच्चों के मिले शव

कानपुर: कोहना थानाक्षेत्र स्थित गंगा बैराज में रविवार को गंगा में स्नान के दौरान डूबे सभी छह बच्चों को निकाल लिया गया है। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने गोताखोरों की मदद से रविवार को तीन बच्चों के शव निकाल पाये थे। रात में अंधेरा होने के चलते रेस्क्यू आपरेशन बंद कर दिया। रविवार की सुबह फिर से गोताखोरों की मदद से पुलिस ने रेस्क्यू आपरेशन शुरू किया और दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद अन्य तीन बच्चों का भी शव निकालने में सफल रहे। पुलिस ने सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया।

बाबूपुरवा थानाक्षेत्र के किदवई नगर चौराहे से छह नंबर गेट के पास रहने वाले सात दोस्त रविवार को अवकाश होने के चलते सुबह करीब आठ बजे चार साइकिलों से गंगा बैराज घूमने निकल गये। वहां पर घूमने के बाद दोपहर करीब दो बजे सभी दोस्त गंगा में स्नान करने लगे। इसी दौरान एक दोस्त गहरे पानी में जा पंहुचा और उसको बचाने के लिये छहों गहरे पानी में जा पहुंचे। लेकिन एक दोस्त साहिब आलम जब देखा कि अब खतरा है तो वह वापस लौट आया, लेकिन उसके देखते ही देखते छह दोस्त गंगा में जा डूबे। हादसा देख वह घबरा गया और अपनी साइकिल उठाकर अपने घर भाग आया और डर के चलते किसी को जानकारी नहीं दी। इसी बीच करीब साढ़े पांच एक राहगीर की नजर तीन साइकिल और वहां पर पड़े चप्पल व कपड़ों पर पड़ी।

जिससे उसे अनहोनी की आशंका हुई और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने गोताखोरों की मदद से रेस्क्यू आपरेशन शुरू किया और देर रात तक तीन बच्चों के शवों को निकाल लिया। इसके बाद रात में हो रही दिक्कतों के चलते आपरेशन को रोक दिया और सोमवार को सुबह करीब छह बजे पुलिस का दोबारा आपरेशन हुआ और गोताखोर रामबाबू आदि की मदद से तीन और शवों को गंगा से निकाल लिया। तो वहीं कल देर शाम जब मीडिया में खबरें आने लगी तो गंगा में डूबने से बचे साहिब आलम ने पूरी घटना बयां की। जिसके बाद परिजन रात भर गंगा के किनारे माथा पीटते रहे और सुबह सभी के शव मिलने के बाद इंस्पेक्टर राजेश कुमार सिंह ने शवों को पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया। इंस्पेक्टर ने बताया कि गंगा में डूबकर मरने वाले सभी बच्चे बाबूपुरवा के रहने वाले थे और आपस में दोस्त थे।

इनमें दो की अधिकतम उम्र 14 साल है। बताया कि अभिषेक सिंह (14) पुत्र हरीनाम सिंह, अमन (12) पुत्र रूस्तम, मो. कैफ (14) पुत्र जहीर, बाबा (9) पुत्र नरेश, अंशू (11) पुत्र नरेश और आदित्य (9) पुत्र पिंटू की मौत गंगा में डूबने से हुई है। वहीं एक साथ छह बच्चों की मौत पर मोहल्ले व परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। प्रशासन की दिखी लापरवाही गंगा बैराज में आये दिन हादसे होते रहते हैं, इसीलिये इसको डेथ प्वाइंट कहा जाता है। इसी को देखते हुये तत्कालीन जिलाधिकारी ने करीब तीन वर्ष पहले इस क्षेत्र में गंगा के किनारे जाली लगवायी और चौबीसों घंटे पुलिस की ड्यूटी लगावाई थी। लेकिन उनके जाने के बाद प्रशासन बराबर लापरवाही करता आ रहा है और वहां की सभी जालियां टूट चुकी हैं, प्रशासन न तो दोबारा जाली लगवा रहा है और न ही पुलिस की ड्यूटी को लेकर गंभीर है।

जिससे लोगों में आक्रोष व्याप्त है। परिजनों ने भी आरोप लगाते हुये कहा कि इतना बड़ा हादसा होने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई बड़ा अधिकारी नहीं आया और कोहना इंस्पेक्टर गोताखोरों की मदद से रेस्क्यू आपरेशन चलाया। वहीं सूत्रों का कहना है कि भैरो घाट पर जल पुलिस का खड़ा स्टीमर को जब इंस्पेक्टर ने शनिवार को मदद के लिये मांगा तो जल पुलिस ने वहां पर पानी कम होने का बहाना बनाकर टरका दिया।

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