किसान टमाटर को फेंकने को हो रहे मजबूर, कुछ तो करिए सरकार

भोपाल: राजधानी की करोंद कृषि उपज मंडी में टमाटर की बंपर आवक हो रही है, इसके चलते टमाटर के दाम औंधे मुंह गिर गए हैं। हालत ऐसे है कि किसानों से थोक में टमाटर 50 पैसे प्रति किलो तक में खरीदा जा रहा है, वहीं फुटकर में 5 से 6 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है। टमाटर के दाम गिरने से किसानों को फसल की लागत भी नहीं मिल पा रही है। प्रदेश में कई जगह किसान टमाटरों को बेचने की जगह फेंक रहे हैं।

भाव गिरने का कारण पाकिस्तान, कर्नाटक, महाराष्ट्र सहित अन्य शहरों को टमाटर का निर्यात नहीं हो पाना बताया जा रहा है। सूत्रों की माने तो पिछले साल भारत से पाकिस्तान को लगभग 500 ट्रक टमाटर रोज निर्यात होता था। लेकिन पाकिस्तान ने अपने किसानों को भाव न मिलने का हवाला देते हुए भारत से आयात होने वाले टमाटरों पर रोक लगा दी, जिससे भारत में दाम गिर गए।

इसके अलावा पिछले साल कर्नाटक, महाराष्ट्र और बैंगलूर में भी टमाटर जाता था, जिसका रेट 300 रुपए प्रति कैरेट (20 किलो) तक था। वर्तमान में इन शहरों में टमाटर की पैदावार बढ़ गई है। मांग न होने के कारण टमाटर अन्य प्रदेशों में भी नहीं जा पा रहा है।

टमाटर का सीजन फल आने से दो माह तक का होता है। अगर तापमान दो तीन डिग्री सेंटीग्रेट भी बढ़ जाता है तो टमाटर एक दम पकने लगता है। जिससे मंडी में आवक अचानक बढ़ जाती है। उसी अनुपात में मांग नहीं होने के कारण उसके दाम गिरने लगते हैं। इस बारे में करोंद मंडी में टमाटर के व्यापारी राजेन्द्र सैनी बताते है कि किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। आवक ज्यादा होने से भाव गिर रहे हैं। पाकिस्तान को भी टमाटर का निर्यात नहीं हो रहा है। इससे भी फर्क पड़ा है।

पहले प्रदेश का टमाटर बैंगलूर और नागपुर तक जाता था। अब वहां भी टमाटर की खेती बढ़ गई है, जिससे अन्य राज्यों में मांग नहीं है। जाटखेडी के टमाटर उत्पादक किसान मनोहर बाखल का कहना है कि बैंगलूर और महाराष्ट्र में टमाटर की प्यूरी और केचप बनाने की यूनिटें हैं। इसलिए वहां पर रेट मध्यप्रदेश से ज्यादा हैं। अगर हमारे यहां पर भी फूड प्रोसेसिंग यूनिट लग जाए तो रेट इतने नीचे नहीं जाएंगे।

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