कीड़ा नहीं, खीरा है यह, कीमत सुनकर हैरान रह जाएंगे आप

लोग गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए अक्सर खीरे का सेवन करते हैं। ये जीभ का स्वाद बनाए रखने के साथ शरीर में पानी की कमी को भी पूरा करता है। लेकिन क्या आप किसी खीरे को खरीदने के लिए 70 हजार रुपए खर्च कर सकते हैं? आज हम आपको ऐसे ही खीरे के बारे में बताने जा रहे हैं ,यह कोई मामूली खीरा नहीं इसका नाम है समुद्री खीरा।

आम तौर पर समुद्र खीरे की लम्बाई 10 से 30 सेमी (3.9 – 11.8 इंच) होती है। और इनका कम से कम साइज 3 मिमी होता है। यह दिखने में गोलाकार होते हैं। यह खीरा कोई फल या सब्जी नहीं बल्कि एक समुद्री जीव है।

चीन के लोग लोग इस खीरे को बड़े शौक से खाते हैं। सूखे हुए सी-कुकम्बर की एक किलो की कीमत लगभग एक हजार डालर (70 हजार रुपए) तक होती है। बाजार में बिकने के लिए इस खीरे का वजन कम से कम 400 ग्राम होना चाहिए। जबकि 450 ग्राम का व्यस्क सी कुकम्बर अच्छा माना जाता है।

इसे मार्केट में बेचने से पहले नीचे से काटकर मिट्टी में दबा दिया जाता है। मिट्टी से निकालने के बाद इसे पकाया जाता है। जिसके बाद ही ग्राहकों को ये प्रोडक्ट के रूप में बेचा जाता है।

सी कुकम्बर का सेवन करने से पहले इन्हें दोबारा पानी में डाला जाता है। जिसकी वजह से काफी मुलायम हो जाते हैं। आप चाहें तो इन्हें सलाद के तौर पर काटकर प्लेट पर सजा सकते हैं या सलाद के साथ सूशी की तरह भी खा सकते हैं।

इस खीरे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत अधिक कीमत होती है। यह एक ऐसा प्राणी है जो इकोसिस्टम के लिए बेहद जरूरी है। ये बिल्कुल रेत के अनुरूप होता हैए और जो पानी में रहकर कचरे, सूक्ष्म इकाई, बैक्टीरिया जैसी चीजों को साफ करता है। मेडागास्कर के तट से एक किलोमीटर दूर टाम पोलो में सी कुकम्बर की खेती हो रही हैं।

यहां ब्लू वेंचर नाम के एक एनजीओ की मदद से गांव के लोगों ने फार्म बनाएं। जिसके बाद 70 फीसदी से ज्यादा गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले किसानों और आम लोगों के जीवन स्तर में काफी सुधार देखने को मिल रहा है। अनुमान लगाया गया है कि समुद्र में सी कुकम्बर की कुल 1200 से अधिक प्रजातियां मौजूद हैं।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper