कुर्सी की जंग, 2019 के संग

आज से ठीक एक महीने बाद देश अपनी आजादी के 72वें साल का जश्न मनाएगा। यह साल इसलिए भी खास है, क्योंकि प्रधानमंत्री के रूप में लाल किले की प्राचीर से नरेंद्र मोदी का इस कार्यकाल का पांचवां और आखिरी संबोधन होगा। इसके करीब 10 महीने बाद होने वाला लोकसभा चुनाव तय करेगा कि 2019 में 15 अगस्त को कौन प्रधानमंत्री के रूप में देश को संबोधित करेगा। साथ ही 2019 का चुनाव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए भी खास मायने रखता है। योगी के पास अगले साल की शुरुआत में होने वाला इलाहाबाद का अर्ध कुंभ आखिरी मौका होगा अपनी कुर्सी बचाने का। पिछले दिनों भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी कह चुके हैं कि यूपी से 74 सीटें आनी चाहिएं, एक भी कम नहीं। यह योगी के लिए साफ संकेत हैं। यही वजह है कि हिंदू वोटों को साधने के लिए इलाहाबाद में 15 जनवरी 2019 से शुरू हो रहे अर्ध कुंभ के लिए योगी सरकार ने 2500 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट जारी किया है।

पहले बात पीएम नरेंद्र मोदी की, जिनके लिए इस बार का 15 अगस्त का भाषण काफी खास रहने वाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी तन्मयता से 15 अगस्त के लिए लोक-लुभावनी घोषणाओं का खाका बुनने में लगे हैं। मोदी के विश्वसनीय मंत्री और अफसर उन बिंदुओं को एकत्र करने में दिन-रात एक किए हैं, जिनका सीधा फायदा 2019 के चुनाव में मिले। मोदी इस बार लाल किले की प्राचीर से केवल जनता को संबोधित ही नहीं करेंगे, कई योजनाओं का खाका भी खींचेंगे। वह बताएंगे कि अब तक उनकी सरकार ने क्या किया और आगे क्या करने वाली है। वैसे भी जब मोदी लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित कर रहे होंगे, उसके मात्र कुछ ही महीने बाद भाजपा शासित चार राज्यों को चुनावी परीक्षा से गुजरना होगा। यही वजह है कि मोदी के भाषण में इन चुनाव से जुड़े एजेंडा भी होंगे और लोकसभा चुनाव लडऩे की रणनीति भी। इस बार मोदी किसानों, जवानों, युवाओं और कर्मचारियों के लिए कुछ बड़ा ऐलान करने की तैयारी में हैं।

हालांकि सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर चुनावी पिटारा खोला है, लेकिन इनपुट सब्सिडी की घोषणा से किसानों की निश्चित आय सुनिश्चित करने और उनके लिए पेंशन की व्यवस्था कर वोट बैंक पक्का करने की भी तैयारी है। इसके अलावा मोदी देश के हर नागरिक के लिए न्यूनतम कमाई का वादा कर सकते हैं, जो सीधे लोगों के खाते में जाए। सरकारी कर्मचारियों को खुश करने के लिए उनके रिटायर होने की उम्र सीमा भी 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने की तैयारी है। इसके अलावा हिंदुत्व पर पकड़ बनाए रखने के लिए कश्मीर को लेकर भी कोई बड़ी घोषणा हो सकती है। दरअसल, मोदी अपने हाथ से यह आखिरी मौका जाने नहीं देना चाहते। स्विस बैंक में काला धन बढऩे और युवाओं को रोजगार न मिलने समेत कई मुद्दे मोदी के लिए माथे पर शिकन पैदा कर रहे हैं। जिन मुद्दों को लेकर 2014 में मोदी हमलावर थे, अब उन्हीं मुद्दों के तीर विपक्ष चला रहा है। ऐसे में मोदी जो बोलेंगे वह चुनावी समीकरण के तहत ही बोलेंगे।

अब बात यूपी की। देश के सबसे बड़े राज्य, जहां की 80 लोकसभा सीटों में से 2014 के चुनाव में भाजपा ने 73 सीटों पर कब्जा जमाया था। इस बार यहां भाजपा की हालत खराब है। पिछले दिनों हुए लोकसभा और विधानसभा के उपचुनावों में उसे करारी हार मिली। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कुर्सी जाने तक की नौबत आ गई। हालांकि संघ के हस्तक्षेप के चलते उन्हें लोकसभा चुनावों तक मोहलत दे दी गई। अब अगले लोकसभा चुनाव योगी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गए हैं। इस बीच योगी के पास केवल एक मौका है और वह है 15 जनवरी से इलाहाबाद में शुरू हो रहा अर्ध कुंभ महोत्सव। अब चूंकि सवाल लोकसभा चुनाव और वोट बैंक का है, तो योगी इस मेले की तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

अर्ध कुंभ मेले को साधने के लिए भाजपा की पूरी फौज जुटी है। संघ भी कंधे से कंधा मिलाए जुटा है। संघ को लग रहा है कि जब पूरी दुनिया के लोग अर्ध कुंभ मेले में भक्ति भाव से आएंगे, तब हिंदुत्व के जरिये भाजपा के वोट बैंक को बढ़ाया जा सकता है। सरकार के कई मंत्री भी यह मानने से गुरेज नहीं करते कि सपा-बसपा गठजोड़ के बाद भाजपा का वोट बैंक लुढ़क सकता है और बड़े स्तर पर सीटों में कमी भी आ सकती है। ऐसे में कुंभ प्रचार का इस्तेमाल राजनीतिक तौर पर करने की पूरी तैयारी है। संघ इस मेले को पूरी तरह से भाजपा के लिए साधने का काम करेगा। संघ के लोग देश के हर राज्य में जाकर अर्ध कुंभ में आने के लिए लोगों को न्योता देंगे। उनके लिए बेहतर इंतजाम करने की भी योजना है और योजना को राममंदिर निर्माण से जोड़ा गया है, ताकि जनता के बीच भाजपा के प्रति सहानुभति बढ़े और वोट मिलें।

खैर, लोकसभा चुनावों की डुगडुगी बजने की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। मोदी सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर और योगी सरकार ने इलाहाबाद के अर्ध कुंभ के लिए वर्ष 2013 के अर्ध कुंभ के मुकाबले दोगुनी राशि जारी कर साफ संकेत दे दिए हैं कि जंग में सब कुछ जायज है।

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