केमिकल कंपनी से लीक हुई गैस, जमीन पर पत्तों की तरह गिरे बंदर और कबूतरों के शव

मुंबई: महाराष्ट्र में पनवेल के नजदीक एचओसी कंपनी इलाके में गैस लीकेज से 31 बंदर और 14 कबूतरों की मौत का मामला सामने आया है. खुदाई में मिले कबूतरों और बंदरों के शव जांच के लिए मुंबई के हाफकिन प्रयोगशाला में भेजे गए हैं. रिपोर्ट आने के बाद इनकी मौत का कारण पता चलेगा. ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने अपने प्रोजेक्ट को बचाने के लिए वन्यजीवों को मारा है. उन्होंने गहराई से इस मामले की जांच की मांग की है. इस मामले में वन्यजीव अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया. जेसीबी ड्राइवर के साथ एचओसी और बीपीसीएल कंपनी के सात अधिकारियों को जांच के लिए हिरासत में लिया है. वन विभाग ने इसकी जानकारी दी.

रायगड पर्यावरण समिति के सदस्य प्रमोद राईलकर का कहना है कि नाइट्रिक एसिड से बंदरों की मौत नहीं हो सकती है. ये फ्यूल लीकेज है जिससें बंदर और कबूतरों की मौत हुई है. प्रशासन ने इसकी जानकारी छिपाई है. इसकी जांच होनी चाहिए. वहीं, ग्रामीण समीर खान ने आरोप लगाया कि अगर इस बीपीसीएल ऑइल रिफायनरी में वन्यजीव होने की बात पर्यावरण विभाग समझता तो कंपनी को मान्यता नहीं मिलती. इसी बात को छिपाने के लिए वन्यजीवों को मारा गया.

ग्रामीण कैलाश कोली का कहना है कि इसकी गहाराई से जांच होनी चाहिए. 500 मीटर के दायरे में ही गांव हैं. अगर वन्यजीवों के लिए खतरा है तो हमारी जान को भी खतरा हो सकता है. रायगड के रसायनी में 330 एकड़ में हिंदुस्तान ऑर्गेनिक केमिकल कंपनी की जगह है. इसकी 22 एकड़ जमीन इस्रो (इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनायझेशन) को दी गई है. नाइट्रिक एसिड का प्लांट यहां है. बुधवार को रात को नाइट्रिक एसिड ली हुआ, लेकिन कंपनी ने यह बात छिपाए रखी. एनिमल राईट्स संगठनों ने इस बात कस खुलासा किया है. पर्यावरण संगठनों का कहना है कि नाइट्रिक एसिड से बंदर मर नहीं सकते. N2o4 नामक ईंधन के कारण ये मौत हुई है. अब सारे बंदर और कबूतरो के शव हाफकिन प्रयोगशाला में भेजे गए हैं. उसकी रिपोर्ट के बाद ही सच्चाई सामने आएगी.

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