क्या अमेरिका के दबाव में रद्द किया गया रूस के साथ अति उन्नत लड़ाकू विमान निर्माण करार ?

Published: 13/06/2018 1:30 PM

नई दिल्ली: क्या अमेरिका के दबाव में भारत ने रूस के साथ अति उन्नत लड़ाकू विमान बनाने के 09 अरब डालर वाले सौदे को रद्द किया है ? मालूम हो कि रूस के साथ मिलकर भारत अगली पीढ़ी का लड़ाकू विमान विकसित करने वाला था। इसके लिए बाकायदे रूस के साथ 09 अरब डालर का सौदा किया था। इसमें 29.5 करोड़ डालर ( 01 डालर = 67.5 रुपये है। इस हिसाब से 29.9 करोड़ डालर = लगभग 1991.25 करोड़ रुपये ) एडवांस दे दिया गया है। जिसमें रूस को इसकी टेक्नालाजी भारत को देनी थी। कुछ बना बनाया विमान रूस आपूर्ति करता, बाकी भारत में बनाए जाने थे। लेकिन अब कहा जा रहा है कि यह समझौता रद्द कर दिया गया। रूस से कह दिया गया कि डिफेंस रिसर्च ऐंड डवलपमेंट आर्गनाइजेशन के पास इस योजना से संबंधित सभी तकनीकी मौजूद है, और वह खुद ही अगली पीढ़ी का विमान विकसित कर रहा है। यह करार रद्द होने से भारत सरकार ने इस सौदे के लिए जो 29.5 करोड़ डालर एडवांस दिया था, वह डूब जाएगा।

करार के अनुसार रूस उसे वापस नहीं करेगा। कहा जाता है कि यह विमान भारत के पास हो जाता, तो भारत पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान वाले देशों की पंक्ति में आ जाता। अभी तक ये विमान केवल रूस, अमेरिका व चीन के पास हैं। सूत्रों का कहना है कि रूस के साथ भारत के इस अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान निर्माण व तकनीकी हस्तांतरण समझौते से अमेरिका बहुत नाराज था। इसके लिए उसके राष्ट्रपति ने भारत पर कई तरह से दबाव बनाना शुरू कर दिया था। अमेरिका चाहता था कि भारत इस तरह का विमान उससे ( अमेरिका) खरीदे । रूस के साथ इस तरह के अन्य रक्षा सौदों पर भी अमेरिका यही रवैया अपनाये हुए है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प , इसके लिए भारत पर तरह-तरह से दबाव बनाने का उपक्रम कर रहे हैं। इस परिप्रेक्ष्य में कहा जा रहा है कि यह जो 09 अरब डालर वाला सौदा रद्द हुआ है वह अमेरकी दबाव में हुआ है। इस बारे में रक्षा विशेषज्ञों का कहना है, “यह कहना कि डीआरडीओ के पास इस तरह के लड़ाकू विमान विकसित करने से संबंधित तकनीकी है , वह खुद अति उन्नत लड़ाकू विमान बना लेगा ,इसलिए इस समझौते को रद्द किया गया, केवल फेस सेविंग करने के लिए दिया जा रहा तर्क है।

यदि डीआरडीओ इतना सक्षम होता और उसके पास इस तरह के पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने की क्षमता होती ,तो अब तक भारत के पास चीन,अमेरिका,रूस की तरह यह लड़ाकू विमान हो गया होता”। एक पूर्व भारतीय राजनयिक का कहना है कि डीआरडीओ यह नहीं कर पा रहा है तभी तो रूस से मिलकर यह विमान बनाने का समझौता हुआ। जिसके तहत रूस 2019-20 में 4 प्रोटोटाइप विमान भारत को सप्लाई करता । उसके बाद भारत में रूस से हस्तांतरण की जाने वाली तकनीकी से 127 लड़ाकू विमान बनाये जाने थे। सवाल यह भी उठने लगा है कि जब रूस से समझौता होने की बातचीत चल रही थी, तभी डीआरडीओ ने क्यों नहीं कहा था कि उसके पास इस लड़ाकू विमान को विकसित करने की तकनीकी है। इसलिए रूस के साथ यह समझौता नहीं किया जाये”।

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