क्या आप जानते हैं? नागा संन्यासी भस्म और नदियों के रेत से संवारते हैं केश

प्रयागराज: अखाड़ों के वीर शैव नागा संन्यासियों के पास लम्बी जटाओं को बिना किसी भौतिक सामग्री उपयोग के खुद रेत और भस्म से ही संवारना पड़ता है। दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम कुम्भ मेले में शिरकत करने पहुंचे जूना अखाड़ा के हरियाणा के हिसार निवासी नागा नरेश पुरी ने बताया कि उनकी जटा करीब दस फिट लम्बी है और पिछले करीब 30 साल से अधिक समय से उसकी सेवा कर रहे हैं।

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उन्होंने बताया कि नागा साधु बढ़ी और उलझी जटाओं को भस्म और नदियों के रेत से सवांरते हैं। उन्होंने बताया कि किसी भी संन्यासी के लिए अपने जटा-जूट को संभालना जीव-जगत के दर्शन की व्याख्या से कम पेंचीदा नहीं है। नागा साधुओं के सत्रह श्रृंगारों में पंच केश (जिसमें लटों को पांच बार घूमा कर लपेटना) का बहुत महत्व है। यहां ऐसे-ऐसे केश प्रेमी साधु मौजूद हैं, जिनकी लटें इतनी लंबी हैं कि इंच टेप छोटे पड़ जाएंगे।

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