क्या आप जानते हैं, लड़कियों को ही क्यों बनाया जाता रिसेप्शनिस्ट

आपने आज तक जिस ऑफिस में भी काम किया है जब जगह रिसेप्शन पर एक सुंदर सी लड़की देखी होगी, जो ऑफिस में आपके दाखिल होते ही आपको प्यारी सी स्माइल के साथ गुडमॉर्निंग कहती है. सिर्फ़ अपने ही ऑफिस नहीं आज तक आप चाहे जिस भी ऑफिस, बैंक, होटल आदि में गए होंगे जब जगह रिसेप्शन पर सुंदर लड़कियों को ही देखा होगा.

किसी अनजान जगह जान पर भी जब रिसेप्शन पर आपको रिसेप्शनिस्ट लड़की दिखती है तो आपको अच्छा महसूस होता है और उससे कुछ भी पूछने की हिम्मत जुटा लेते हैं. वैसे आपने कभी सोचा कि आखिर रिसेप्शन पर सब जगह लड़कियों को ही क्यों रखा जाता है, लड़कों को क्यों नहीं?

तो चलिए हम बताते हैं.

अधिकतर बिजनेसमैन का मानना रहता है कि लड़कों की तुलना में लड़कियां बिजनेस को ज्यादा बढ़ाती है, अगर रिसेप्शनिस्ट मुस्कुरा कर जवाब दे दे तो क्लाइंट किसी बात को इनकार नहीं करता है.

आपने यह बात भी अजमाए होगी कि लड़कों से ज्यादा लड़कियां काम को अच्छी तरह समझती है जब भी आप लड़कियों से कुछ सवाल पूछते हैं तो आपको वह बहुत अच्छे से और विस्तार में बताती है लेकिन लड़के आपको शॉर्टकट में समझाते हैं. लड़कियों में पेशेंट लेवल ज़्यादा होता है और वो लड़कों से ज़्यादा गंभीर भी होती हैं. वो अपने काम के प्रति समर्पित रहती हैं, जबकि लड़कों का मन ज़्यादा चंचल होता है.

लड़कियों में यह भी गुण रहता है की वह अपना काम बखूबी निभाती है लड़कों के जैसे ड़िंगे नहीं मारती है जो भी उन्हें काम दिया जाए उसे वहां बहुत अच्छे से पूरा करती है और वह अपने काम से काम रखती है. जब कोई लड़की क्लाइंट से प्यार से बात करती है तो अगर सामने वाला गुस्से में भी है तो उसका गुस्सा शांत हो जाता है, वहीं अगर रिसेप्शन पर यदि कोई लड़का हो और व क्लाइंट क अकड़ के साथ जवाब दे दे तो बिज़नेस तो गया काम से.

रिसेप्शनिस्ट लड़की रखने का एक फायदा यह भी होता है कि वह कुर्सी पर बैठी रहती है तो ऑफिस का माहौल भी बहुत अच्छा रहता है जरूरी नहीं है कि लड़की सुंदर हो या ना हो और उसके कुर्सी पर बैठे रहने से विजिटर्स की लाइन भी लंबी होती है.

अधिकतर ऑफिस में लड़कियों को आकर्षक का केंद्र माना जाता है कुछ ऑफिस मैं तो एक के बदले कहीं रिसेप्शनिस्ट रखी जाती है क्योंकि लोगों को ऐसा लगता है कि सुंदर लड़कियां सभी को अट्रैक्टिव कर लेती है. सुंदर होने के साथ ही काम के मामले में लड़किया लड़कों से ज़्यादा समझदार भी होती हैं. कई बार बॉस के ऑफिस में न होने पर भी यदि कोई क्लाइंट फोन करता है तो लड़कियां स्थिति को संभाल लेती है, जबकि लड़कों में इतनी मैच्योरिटी नहीं होती.

लड़कियां हर काम में लड़कों से बेहतर ही होती है, ये बात और है कि आज भी उन्हें हर काम में बराबरी का मौका नहीं दिया जाता और जो मौके मिलते भी है उसके लिए उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ता है. आज हर फील्ड में लड़कियां अपने बल पर आगे बढ़ी हैं.

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