क्या आप भी देते हैं गिफ्ट में यह 7 चीजें तो हो जाए सावधान, चुरा लेंगी ये आपकी सारी खुशियां

गिफ्ट एक्सचेंज करना आज के समय में आम हो गया है। ये मानव जीवन का एक बहुत ही अहम हिस्सा माना जाने लगा है। गिफ्ट पाकर हर कोई खुशी से झूम उठता है लेकिन अक्सर गिफ्ट लेते समय किस की नियत कैसी है हम यह नहीं जानते। लेकिन ये जानना बहुत जरूरी है क्योंकि अगर तोहफा देते समय सामने वाले की नियत साफ ना हो तो वह उपहार आपकी खुशियों को दुगना करने की बजाय उन पर ग्रहण भी लगा सकता है। इसीलिए हर एक व्यक्ति को किसी से उपहार लेते समय इन बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। चलिए जानते हैं उन चीजों के बारे में जो आप को गिफ्ट में ना तो देनी चाहिए और ना ही लेनी चाहिए।

हिंसक जानवर
हिंसक जानवर जैसे कि शेर बाघ या चीता की तस्वीर या उनकी मूर्ति उपहार में देना और लेना नहीं चाहिए।

डूबते हुए जहाज की तस्वीर
ऐसी तस्वीर उपहार में मिलना और इसे घर में रखना अशुभ माना जाता है इससे घर में आर्थिक नुकसान होता है।

चाकू छुरी
चाकू-छुरी ना तो किसी को उपहार में देना चाहिए ना ही किसी से लेना चाहिए। अगर कहीं से आपको मिले तो उसे घर में नहीं रखना चाहिए उपहार में कभी भी छुरी-चाकू का लेनदेन ना करें इससे परिवार में क्लेश होता है।

रूमाल
रूमाल गिफ्ट में देना दुख कारक माना गया है इससे जीवन कष्ट में आता है।

घड़ी
बहुत से लोग घड़ी उपहार में देते हैं जबकि घड़ी गिफ्ट में देना जीवन प्रगति को रोकना माना जाता है। इसीलिए दोस्तों यह 7 चीजें कभी भी गिफ्ट में ना तो देनी चाहिए और ना ही लेनी चाहिए।

काले कपड़े
कभी भी किसी को काले कपड़े का उपहार नहीं देना चाहिए अगर कोई आपको यह देता है। तो यह अपशगुन माना जाता है। यह दुख, कष्ट और पीड़ादायक माना जाता है इसे मृत्यु कारक भी कहा गया है यही वजह है कि शादी के एक साल तक काले कपड़े पहनना अच्छा नहीं माना जाता।

जूते
जूते उपहार में देना जुदाई का प्रतीक माना जाता है। प्रेमी को इसे एक दूसरे को बिल्कुल भी नहीं देना चाहिए इसे देने से दोनों के रास्ते अलग-अलग हो जाते हैं।

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया The Lucknow Tribune के  Facebook  पेज को Like व Twitter पर Follow करना न भूलें...
Loading...
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
E-Paper