क्या जम्मू कश्मीर में कांग्रेस सरकार बनाने की तैयारी कर रही है ?

जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने की राजनीति फिर से तेज हो गयी है। खबर के मुताविक कांग्रेस इस दिशा में तेजी से काम करती नजर आ रही है। जानकारी के मुताविक कांग्रेस पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाना चाह रही है। कांग्रेस के दर्जन भर से ज्यादा नेता इस दिशा में काम कर रहे हैं। पीडीपी के साथ इनकी कई राऊंड की बैठक होने की भी खबर है। खबर के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व को लगता है कि जम्मू-कश्मीर के मसले पर भारतीय जनता पार्टी हाथ पर हाथ रखकर बैठी नहीं रहेगी। पीडीपी के साथ अपनी गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद अब वह ख़ुद वहां सरकार बनाने की कोशिश कर सकती है। संभवत: इसीलिए विधानसभा को भी अभी निलंबित रखा गया है। हालांकि भाजपा ऊपरी तौर पर इन अटकलों को ख़ारिज़ कर रही है। लेकिन कांग्रेस सहित अन्य दल उसकी तरफ से आश्वस्त नहीं हैं।

दूसरी संभावना यह भी मानी जा रही है कि अगर भाजपा ने सरकार बनाने की कोशिश न भी की तो वह राज्यपाल एनएन वोहरा को हटाकर वहां किसी ऐसे शख़्स को तैनात कर सकती है जो उसकी सख़्त नीतियों को सहज भाव से आगे बढ़ाएं। इसीलिए कांग्रेस यह बेहतर मान रही है कि पीडीपी के साथ सरकार बना ली जाए। बताया जाता है कि इस बाबत पार्टी में बैठकों का दौर जारी है. सोमवार को पार्टी की राज्य से संबंधित नीति-योजना समिति की दिल्ली में बैठक है। उसमें भी इस पर चर्चा हो सकती है। इस समिति के मुखिया पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हैं. इसमें पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम, जम्मू-कश्मीर के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद, वहीं के राजघराने से ताल्लुक़ रखने वाले करन सिंह और प्रदेश प्रभारी तथा राष्ट्रीय महासचिव अंबिका सोनी सदस्य हैं।

बताया जाता है कि मंगलवार को पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता श्रीनगर में बैठक करेंगे। इसमें जम्मू-कश्मीर के विधायक उन्हें ज़मीनी हालात की जानकारी दे सकते हैं. राज्य कांग्रेस के प्रमुख ग़ुलाम अहमद मीर ने इसकी पुष्टि की है। इस बैठक में आज़ाद और सोनी ख़ास तौर पर मौज़ूद रहेंगे. पीडीपी के एक वरिष्ठ नेता भी इसकी पुष्टि करते हैं। उनके मुताबिक, ‘कांग्रेस की आेर से कुछ बातचीत शुरू तो हुई है. महबूबा भी तैयार हैं। लेकिन मसला ये है कि कांग्रेस इस दिशा में कितना आगे बढ़ती है। ’

ग़ौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल छह साल का होता है. इसमें से अभी लगभग ढाई साल का वक़्त बाकी है. राज्य विधानसभा 87 सदस्यों वाल है. इसमें कांग्रेस के पास सिर्फ़ 12 सदस्य हैं. पीडीपी के 28 और भजपा के 25 सदस्य हैं. जबकि नेशनल कॉन्फेंस के 15 और सात अन्य सदस्य भी हैं. सरकार बनाने के लिए 44 सदस्यों के समर्थन की ज़रूरत है. यानी पीडीपी और कांग्रेस के हाथ मिला लेने के बाद भी उन्हें बहुमत के लिए चार अन्य सदस्यों की ज़रूरत पड़ेगी.

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