गजब !कैदियों जैसी जिंदगी जीने का इंतजाम

दिल्ली ब्यूरो: तिहाड़ जेल में अब ‘जेल पर्यटन’ की व्यवस्था की जा रही है ताकि जेल ,कैदी के बारे में जानकारी ली जा सके और महसूस की जा सके कि वह जेल के भीतर बंद है। जेल का वातावरण कैसा होता है। जेल के भीतर कैदी किस तरह से रहते हैं ,क्या खाते हैं और कैसे जीवन काटते है इसका मजा अब जेल पर्यटक ले सकते हैं। दिल्ली के तिहाड़ जेल में जेल पर्यटकों के लिए क़ैदियों जैसी ज़िंदगी जीने का इंतज़ाम किया जा रहा है।

तिहाड़ जेल सूत्रों के मुताबिक़, क़रीब 400 एकड़ में फैले तिहाड़ जेल परिसर में ही पर्यटकों के लिए सुविधा विकसित की जा रही है। यहां निश्चित शुल्क चुकाकर पर्यटक कुछ वक़्त क़ैदियों की तरह बिता सकेंगे। इस दौरान उन्हें नियमित क़ैदियों के हाथ से पका भोजन खिलाया जाएगा। मोबाइल, लैपटाॅप, कैमरा आदि सभी चीजें बाहर रखवा ली जाएंगी। वे भीतर टीवी भी नहीं देख सकेंगे। अंदर क़ैदियों जैसे कपड़े पहनने को दिए जाएंगे। ओढ़ने-बिछाने, उठने-बैठने का बंदोबस्त क़ैदियों के जैसा होगा। पर्यटकों को काम भी क़ैदियों की तरह करके आनंद उठाया जा सकता है।

तिहाड़ जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ‘कार्ययोजना पूरी तरह तैयार है। इसका शीर्षक ‘फील लाइक जेल’ रखा गया है। अगले कुछ महीनों में फीस तय कर यह सुविधा शुरू कर दी जाएगी। बस यहां पर्यटक नियमित क़ैदियों से बातचीत या मेल-जोल नहीं कर सकेंगे। सुरक्षा कारणें से यह ऐहतियात ज़रूरी है। क्योंकि तिहाड़ के लगभग 15,300 क़ैदियों में छोटा राजन, यासीन भटकल, नीरज बवाना, सैयद शहाबुद्दीन, जैसे तमाम कुख्यात अपराधी भी शामिल हैं। ’

ग़ौरतलब है कि 2016 में तेलंगाना सरकार ने भी पर्यटकों के लिए इसी तरह की सुविधा शुरू की थी। जून-2016 में 220 साल पुरानी संगारेड्‌डी जेल को संग्रहालय में तब्दील कर पर्यटकों के लिए खोल दिया गया था। यहां पर्यटक 500 रुपए प्रति दिन के हिसाब से शुल्क देकर क़ैदियों की तरह रह सकते हैं। ख़बर के मुताबिक पिछले महीने ही मलेशिया के दो पर्यटक ख़ास तौर पर यह अनुभव लेने के लिए संगारेड्‌डी जेल पहुंचे थे।

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