गुस्सा बना बैजनाथ का किस्सा, 20 साल से अंधेरा और ज़ंजीरें ही इनकी साथी

छतरपुर। छतरपुर ज़िले के हरपुर गांव के एक शख़्स बैजनाथ ने 20 साल से ना धूप सेंकी है और ना बारिश का आनंद लिया है. ऐसा इसलिए, क्योंकि वो एक काल-कोठरी में ज़ंजीरों में जकड़ा हुआ है. उसे घरवालों ने ही बांध रखा है. वजह है गांव के दबंगों का डर और बैजनाथ का गुस्सा.

बैजनाथ एक अंधेरे कमरे में क़ैद हैं. 20 साल से अंधेरा और ज़ंजीरें ही इनकी साथी हैं. दैनिक नित्य क्रिया भी यहीं करते हैं और खाना भी यहीं बैठकर खाते हैं. इन्हीं ज़ंजीरों में बंधे हुए वो सोते हैं और इन्हीं के साथ जागते हैं, बैजनाथ, मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हैं. लेकिन परिवार ने फिर भी उन्हें क्यों बांध रखा है, ज़्यादती की ये कहानी रोंगटे खड़े करने वाली है.

कहानी ये है कि बैजनाथ 20 साल पहले रस्सी बनाने के लिए एक पेड़ की जड़ खोद रहे थे. गांव के ठाकुरों ने उन्हें रोका. वो नहीं माने तो उन लोगों ने बैजनाथ को चांटा मार दिया. गुस्से में आग बबूला बैजनाथ ने उन गांव वालों पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया. बैजनाथ को 2 महीने की जेल हो गयी. बस जेल से छूटने के बाद बैजनाथ के सिर पर उन दबंगों की हत्या का खून सवार हो गया और वो उन्हें मारने की फिराक़ में घूमने लगा. बैजनाथ के पिता घबरा गए. दबंगों के डर से पिता ने अपने एक बेटे को दूसरे गांव में उसकी ससुराल भेज दिया और दूसरे बेटे बैजनाथ को बेड़ी और ज़ंजीर में कस दिया.

एक-एक लम्हा करके 20 साल बीत गए. जवानी में आए गु्स्से की सज़ा बैजनाथ बुढ़़ापे तक भुगत रहे हैं. वो ज़िंदगी को फिर से जीना चाहते हैं. आज़ाद होने के लिए दिन-रात टकटकी लगाए रहते हैं कि कब कोई फरिश्ता आए और इस क़ैद से मुक्त कर दे.

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