गोरखपुर में ऋण वितरण में करोड़ों का फर्जीवाड़ा, मुर्दे को भी मिला लोन

दिल्ली ब्यूरो: सीएम योगी के गढ़ गोरखपुर से एक नए तरह के लोन घोटाले की जानकारी मिल रही है। जानकारी के मुताबिक अनुसूचित जाति और जनजाति के विकास को लेकर दिए गए लोन में भारी फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है। जिन लोगों को लोन दिए गए उनमें से अधिकतर के नाम अपर पते गलत पाए गए हैं या फिर उस नाम और पते का कोई वजूद ही नहीं है। मुर्दे के नाम पर भी लोन जारी हुए हैं। बता दें कि उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के द्वारा इनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए जिन लोगों के नाम पर बैंक से ऋण दिया गया है, उनमें 95 प्रतिशत से ऊपर नाम फर्जी पाए गए हैं। लोन गावं का यह मामला सुचना अधिकार के तहत मिली जानकारी के बाद सामने आया है।

आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्रा ने इसकी शिकायत प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ से किया था, जिसके बाद जांच में इस फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई है। दरअसल गोरखपुर के 19 विकासखंडों के 1400 लोगों को वित्त विकास निगम की तरफ से ऋण दिया गया था। इसमें फर्जीवाड़े की संभावना जताते हुए आरटीआई कार्यकर्ता संजय मिश्रा ने जुलाई 2017 में जिला समाज कल्याण अधिकारी, उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक और उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम से सूचना तलब किया था। इन संस्थाओं की तरफ से मात्र 108 लोगों का नाम लाभार्थी ग्रुप में दिया गया था। जिसका भौतिक सत्यापन हुआ तो फर्जीवाड़ा खुलकर सामने आ गया।

फर्जीवाड़े को लेकर संजय मिश्रा ने सीएम योगी से इसकी शिकायत की थी, जिसके बाद अपर जिला सहकारी अधिकारी चौरीचौरा और बांसगांव को जांच मिली थी। जांच से पता चला कि इसमें फर्जी नाम पते पर ऋण दिए गए हैं। सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा गगहा विकासखंड में हुआ। इस क्षेत्र में 50 एसटी एससी को ऋण देने का दावा किया गया था, लेकिन सत्यापन में 45 लाभार्थियों के पते ही नहीं मिल सके। चार लाभार्थियों के पति और पत्नी के नाम गलत पाए गए। एक मृतक के नाम से भी ऋण जारी कर दिया गया। बांसगांव विकासखंड में 10 लाभार्थियों को ऋण देने का दावा भी सत्यापन में झूठा साबित हुआ। कौड़ीराम विकासखंड के 22 लाभार्थियों में से 3 के नाम पते फर्जी हैं। उरुवा में 14 लाभार्थियों में से सिर्फ 6 को लाभ मिला है। 8 गलत नाम पते पर ऋण जारी हुआ है। गोला विकासखंड में 5 में से 3 नाम फर्जी पाए गए हैं। खजनी विकासखंड में भी यही हाल है। जबकि 13 विकासखंडों में बांटे गए ऋण की जांच अभी होनी बाकी है।

6 विकासखंडों की जांच में 1 करोड़ 40 लाख रुपए की धांधली सामने आई है। 13 और विकासखंडों की जांच हुई तो यह रकम 2 करोड़ 80 लाख रुपए से ज्यादा जा सकती है। आरटीआई कार्यकर्ता का दावा है कि यदि 2011 से 16 के बीच बांटे गए ऋण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो यूपी के अलग-अलग जिलों में 70 करोड़ रुपये से ज्यादा के धन का गबन का मामला प्रकाश में आएगा। जांच अधिकारियों द्वारा पिछले माह जिलाधिकारी और जिला विकास अधिकारी को जांच रिपोर्ट सौंपी गई थी। उसमें 108 लाभार्थियों में से 97 नाम फर्जी पाए गए हैं। जिलाधिकारी ने भी इस मामले को गंभीर माना है और कहा कि जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी। बाकी विकासखंडों की पूरी जानकारी एकत्रित की जा रही है।

फिलहाल सीएम योगी से शिकायत होने के बाद मामले में तेजी और गर्माहट दोनों आई है। यही वजह है कि गोरखपुर में आजकल शासन से आई एक टीम तो जांच कर ही रही है। 14 मई को अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ लालजी प्रसाद निर्मल भी गोरखपुर आ रहे हैं। इस दौरान मामले के चर्चा में आने की पूरी उम्मीद है। सूत्रों की मानें, तो निर्मल का दौरा इस घोटाले के जिन्न को बाहर लाने का एक प्रयास होगा, जिसमें वह अधिकारियों के पेंच कसेंगे।

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