घर की खिड़कियां हैं खास

लखनऊ: प्रकाश, शुद्ध वायु, धूप और प्राकृतिक दृश्यों के लिए खिड़कियां बहुत महत्वपूर्ण हैं। यही वजह है कि मन की खिड़की का संबंध जहां आध्यात्म से है, वहीं घर की खिड़की वास्तु से जुड़ी है। आजकल के मकानों में बड़े शीशे वाली खिड़कियों का चलन है और एयर कंडीशनरों, कूलरों ने रोशनदान बंद कर दिए हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि वास्तु के मुताबिक घर में खिड़कियां कैसी और कहां होनी चाहिए।

किसी भी घर का सबसे अहम हिस्सा होती हैं खिड़कियां। खिड़कियों से न सिर्फ घर में ताजी हवा आती है, बल्कि ये घरों की खूबसूरती भी बढ़ाती हैं। इसीलिए इन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। वास्तु के मुताबिक, घर में खिड़कियों की संख्या सम (जैसे 2, 4, 6 या 8) होनी चाहिए। खिड़कियों की विषम संख्या शुभ नहीं मानी जाती। इसके अलावा घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ खिड़कियां होनी चाहिए, ताकि चुम्बकीय चक्र पूर्ण रहे। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है। खिड़कियां घर की पूर्वी, उत्तरी और पश्चिमी दीवार पर होनी शुभ मानी जाती हैं।

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पूर्व दिशा सूर्य की मानी जाती है। इसलिए इस दिशा में ज्यादा से ज्यादा खिड़कियां शुभ मानी जाती हैं। इससे घर में सूर्य का प्रकाश और धूप दोनों पर्याप्त मात्रा में आती है। इस तरह के घर में रहने वालों को अच्छे स्वास्थ्य और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर की है, इस दिशा में खिड़कियां घर के निवासियों पर कुबेर की कृपादृष्टि के लिए अच्छी मानी जाती हैं। इससे घर-परिवार में धन-धान्य की कमी नहीं रहती।

दक्षिण दिशा यम की है। इस दिशा में खिड़कियां छोटी और कम से कम ही बनानी चाहिए, जिससे भवन में हवा का क्रॉस वेंटिलेशन तो हो सके, लेकिन दोपहर बाद की सूर्य से निकलने वाली हानिकारक किरणें घर में प्रवेश न कर सकें। यदि यहां पर खिड़कियां बनाना जरूरी हो तो उन्हें कम ही खोलें। यदि खिड़कियों में अंदर और बाहर दोनों तरफ पल्ले हों, तो वहां पर अंदर की तरफ पल्लों वाली खिड़कियों को ही खोलना चाहिए। इसके अलावा खिड़कियों को साफ रखें और उनमें तेल डाते रहें, जिससे खिड़कियां खुलने में आसान भी हों। बड़ी खिड़कियां बनाएं। इससे आप निडर हो जाएंगे।

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