चुनावी साल में मेट्रो का काम शुरु करने की जल्दबाजी

भोपाल: राज्य सरकार विधानसभा चुनावों की आचार संहिता के पहले मेट्रो का काम शुरू करना चाहती है, लेकिन यह काम इतना आसान नहीं है। इसे लेकर अधिकारियों में भी जल्दबाजी दिखाई दे रही है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीते दो साल से अटकी वित्त मंत्रालय से मंजूरी बीते माह तब मिली जब भोपाल मेट्रो ने पहली बार सिविल टेंडर जारी किए। अब यह प्रोजेक्ट इन्वेस्टमेंट बोर्ड व केंद्रीय कैबिनेट में जाना है। यहां भी कम से कम दो से तीन महीने मंजूरी में लग सकते हैं। यही नहीं खुद राज्य सरकार को भी कई मंजूरी देना बाकी है।

राज्य सरकार ने अभी तक न तो मेट्रोपॉलिटन एरिया घोषित किया है और न ही पर्यावरण अनुमति ली गई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय में मप्र मेट्रो रेल कार्पोरेशन (एमपीएमआरसी) द्वारा आयोजित प्री बिड मीटिंग में निजी कंपनियों के एक्सपटर्स ने कहा कि पहली बार इस प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है और प्रोजेक्ट छोटा भी नहीं है। सितंबर में काम शुरू करने के लिए अगस्त में टेंडर खुलेंगे। पहले हफ्ते में ही काम को शुरू करने की बात की जा रही है। डिजानिंग में ही तीन-चार महीनों का समय लगता है। एक माह में कागजी काम ही पूरे हो पाते हैं। ऐसे में प्रोजेक्ट को शुरु करने में समय तो लगेगा।

मालूम हो कि मेट्रो रूट की लाइन टू (करोंद से एम्स तक:14.99 किमी) के सुभाष नगर से एम्स वाले 6.225 किमी हिस्से में करीब 277 करोड़ रुपए से सिर्फ सिविल वर्क होगा। स्टेशन, बोगी, ट्रैक का टेंडर बाद में होगा। इसमें कांट्रेक्ट लेने वाली कंपनी डिटेल डिजाइन और सिविल वर्क करेगी। टेंडर खुलने के बाद वर्कआर्डर और फिर डिजाइन आदि बनाने का काम होगा। लिहाजा, यदि अगस्त में टेंडर खुल भी गए तो ठेका लेने वाली कंपनी के लिए काम शुरू कर पाना मुश्किल होगा। दरअसल, भोपाल में मेट्रो के लिए पहला सिविल टेंडर जारी किया गया था।

बी बिड मीटिंग में एमपीएमआरसी ने भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट के पहले फेस के तहत सुभाष नगर से एम्स तक के 6.25 किमी के रूट के लिए जारी किए गए टेंडर की विस्तार से जानकारी दी। इसमें भोपाल, हैदराबाद, दिल्ली के साथ मुम्बई की दो कंपनियों ने उपस्थिति दर्ज कराई। प्री बिड में कंपनी एक्सपर्ट ने कई सवाल जबाव एमपीएमआरसी अधिकारियों से किए। इसी दौरान टेंडर लेने के इच्छुक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने टेंडर के समय व डेडलाइन आदि पर तमाम सवाल पूछे। हालांकि एमपीएमआरसी और प्रोजेक्ट की कंसल्टिंग कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि डीपीआर के साथ ही अन्य तैयारियों पूरी कर ली गई है। अभी सिर्फ काम सिविल कंस्ट्रक्शन ही है। इसलिए कंपनी तकनीकी पेचिदगियों को छोड़े।

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