जम्मू एवं कश्मीर: 3 लाख के इनामी हिज्ब आतंकी की निकली IED से लदी कार, 2019 से है घाटी में सक्रिय

श्रीनगर: पुलिस ने विस्फोटकों से भरी कार के मालिक का पता लगा लिया है। वह तीन लाख का इनामी हिज्ब आतंकी हिदायतुल्ला मलिक है। फिलहाल, उसे पकड़ने के लिए उसके ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। गौरतलब है कि जैश और हिज्ब के आतंकियों ने मिलकर एक बार फिर दक्षिण कश्मीर में 14 फरवरी 2019 जैसा कोई बड़ा आत्मघाती हमला करने की साजिश रची थी। इस साजिश में इस्तेमाल की जाने वाली कार को पुलिस ने बुधवार की रात को बरामद करने के बाद गत वीरवार सुबह सुरक्षित तरीके से नष्ट किया।

पुलिस सूत्रों ने कार मालिक की पुष्टि करते हुए बताया कि जिस कार को बम बनाकर इस्तेमाल करने की साजिश रची गई थी, वह कार हिजबुल मुजाहिदीन के एक आतंकी की ही थी। इस आतंकी का नाम हिदायतुल्ला मलिक है और वह जिला शोपियां के शरदपोरा गांव का रहने वाला है। इस बीच, एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि हिदायतुल्ला मलिक 30 जुलाई 2019 को आतंकी बना था। उसे इसी साल की शुरुआत में सी श्रेणी के आतंकियों में सूचीबद्ध किया गया है। उस पर तीन लाख का इनाम है।

सुरक्षाबलों ने गत वीरवार तड़के आतंकियों की पुलवामा कांड दोहराने की साजिश को नाकाम बना बड़ी तबाही को टाल दिया। हिजबुल मुजाहिदीन ने 45 किलो विस्फोटक से लैस एक सेंट्रो कार से पुलवामा में किसी बड़े सैन्य प्रतिष्ठान या जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर सुरक्षाबलों के काफिले पर हमले की योजना बनाई थी। लेकिन सुरक्षाबलों ने राजपोरा (पुलवामा) में कार बम को सुरक्षित तरीके से धमाका कर उड़ा दिया। विस्फोटक से लदी इस कार को हिजबुल आतंकी आदिल चला रहा था, जो मौके से भाग निकला।

पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा कि हमले की साजिश जैश, लश्कर और हिजबुल ने रची थी। वहीं कार में आइईडी को सात लाख रुपये के इनामी जैश आतंकी मूसा उर्फ वलीद उर्फ इद्रीस ने एक अन्य जैश कमांडर फौजी भाई के साथ मिलकर फिट किया था। पाकिस्तान का वलीद मई 2015 से कश्मीर में सक्रिय बताया जाता है। 2017 से सक्रिय फौजी भाई पर पांच लाख का इनाम है। कार पर जो नंबर प्लेट जेके08बी-1426 है वह कठुआ के बीएसएफ कर्मी की मोटरसाइकिल का है। बीएसएफ कर्मी से भी कथित तौर पर पूछताछ की गई है।

एनआइए ने भी राजपोरा में विस्फोटस्थल का जायजा लिया है। इस मामले की जांच भी एनआइए को सौंपी जा सकती है। इस कार बम और बीते साल पुलवामा हमले के तार आपस में मिलते नजर आ रहे हैं। इसके अलावा आइईडी में आरडीएक्स के अलावा अमोनियम नाईट्रेट, नाइट्रेट ग्लीसरीन और सल्फर का भी इस्तेमाल हुआ है। रमजान में हमला करना चाहते थे आतंकी आइजीपी कश्मीर विजय कुमार ने बताया कि जैश के आतंकी वलीद और फौजी ने 11 मई को पाक रमजान माह के 17वें रोजे यानी जंग-ए-बद्र के दिन सुरक्षाबलों पर हमले के लिए ही कार बम को तैयार किया था। सुरक्षाबलों की चौकसी के चलते वह उस दिन हमला नहीं कर पाए। इसके बाद हिजबुल के साथ मिलकर उन्होंने हमले की नए सिरे से साजिश रची थी। इसके लिए हिजबुल आतंकी आदिल को चुना गया था। बुधवार को आदिल विस्फोटकों से लदी कार की जगह बदलने का प्रयास कर रहा था।

घाटी में सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और प्रमुख कमांडरों के मारे जाने से हताश आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन ने जैश-ए-मोहम्मद के साथ मिलकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के काफिले पर गत वीरवार को हमला करने की साजिश रची थी। आतंकियों के निशाने पर सीआरपीएफ के करीब 400 जवानों व अधिकारियों का काफिला था। समय रहते पता चल गया। राजपोरा (पुलवामा) में गत वीरवार को नाकाम बनाए गए कार बम मामले की जांच से जुड़े सूत्रों की मानें तो आतंकियों को सुबह हमला करना था। इसलिए आतंकियों ने अपने सेफ हाउस से बुधवार रात ही कार बम को बाहर निकाल हाईवे के पास ले जाने का प्रयास किया था। सूत्रों ने बताया कि वीरवार सुबह श्रीनगर से जम्मू के लिए निकलने वाले सीआरपीएफ के 20 वाहनों के काफिले पर हमला हो सकता था। यह काफिला श्रीनगर के बख्शी स्टेडियम से सुबह सात बजे रवाना होता है। इसमें करीब 400 जवान व अधिकारी होते हैं। कार को जिस हालात में पकड़ा है, उसे देखते हुए अंदाजा लगाया जा रहा है कि आतंकियों का निशाना सीआरपीएफ का काफिला ही होगा।

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