जल्द आ सकता है मेल बर्थ कंट्रोल जेल

नई दिल्ली: महिलाओं के लिए तमाम तरह के बर्थ कंट्रोल के तरीके हैं जैसे पिल्स, फीमेल कंडोम, आईयूडी, कॉन्ट्रासेप्टिव इम्लांट या इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव और नसबंदी शामिल है। दुनियाभर में आधी से ज्यादा प्रेग्नेंसी अनचाही होती हैं क्योंकि लोग परिवार नियोजन के साधन अपनाने से हिचकते हैं। इनसे महिलाओं के शरीर पर काफी बुरे प्रभाव पड़ते हैं। वहीं, शोधकर्ताओं की माने तो पुरुषों के लिए साल 1800 से कंडोम के अलावा कोई बर्थ कंट्रोल नहीं आया। कंडोम के अलावा लंबे समय के लिए प्रजनन रोकने के लिए पुरुषों के पास सिर्फ सर्जरी ही दूसरा ऑप्शन होता है।

लेकिन अब नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ ने मेल बर्थ कंट्रोल जेल तैयार किया है। इस जेल का पुरुषों पर ट्रायल शुरू होने वाला है। अगर यह सफल हुआ तो कंडोम के अलावा पुरुषों के लिए एक और बर्थ कंट्रोल ढूंढने में बहुत बड़ी कामयाबी हासिल होगी। इस मेल बर्थ कंट्रोल जेल से स्पर्म का प्रोडक्शन रोका जा सकेगा। इसका ट्रायल 420 कपल्स पर किया जाएगा। इस जेल को 4 से 12 हफ्तों के लिए कंधों पर लगाकर देखा जाएगा, कि पुरुष इसे समन कर पा रहे हैं या नहीं। इसी दौरान इन पुरुषों के स्पर्म लेवल को काउन्ट किया जाएगा।

साल भर चलने वाला ये ट्रायल अगर सफल हुआ तो पुरुषों को कंडोम के अलावा एक और ऑप्शन मिल जाएगा। इन ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव के अलावा बाकि बर्थ कंट्रोल के तरीके हैं जैसे आईयूडी और सर्जरी महंगी पड़ती हैं। इसके अलावा नसबंदी बर्थ कंट्रोल परमानेंट सॉल्यूशन है, जो कुछ समय की प्रेग्नेंसी रोकने के लिए कारगर नहीं।बता दें, कंडोम फेलियर के चान्सेस 13 प्रतिशत तक होते हैं। यानी कंडोम के इस्तेमाल के बाद भी प्रेग्नेंसी के चान्सेस होने का खतरा 13 प्रतिशत है। वहीं, महिलाओं में बर्थ कंट्रोल का देरी से लेना प्रेग्नेंसी के चान्सेस बढ़ाता है और बार-बार लेना उनके शरीर को हानि पहुंचाता हैं।

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