जानें अघोरियों की रहस्यमयी दुनिया के बारे में !

अघोरी साधुओं की दुनिया बडी रहस्यमयी होती है। ये साधु अक्सर एंकात में रहते है लेकिन इनका जीवन कैसा होता है अधिकतर दुनिया इससे अनजान ही रहती है। अघौरियों के बारे में कई तरह तरह की बातें हम अक्सर न्युज चैनल और समाचार पत्रों में पढते रहते है। जिसमें बताया जाता है कि अघोरी शमशान में पुजा करते है कहीं यह बताया जाता है कि अघोरी बहुत गंदे रहते है और वह सिद्धियां प्राप्त करने के लिये शवों के साथ भी तंत्र साधना करते है। इन सब बातों में कितनी सच्चाई है आज भी लोगों का इसको लेकर मतभेद है लेकिन आज हम अघोरियो से संबधित आपकी सभी जिज्ञासाओं को शांत करने का प्रयास करेगें आइये जानते है अघारियों की रहस्यमयी दुनिया के बारे में।

बेहद सहज और सरल
अघोरी साधु हिंदू धर्म के एक सप्रदाय अघोर पंथ से आते है। अघोरियों को भगवान शिव का जीवित स्वरूप भी माना जाता है। ये आम मानव बस्तियों से दूर एंकात और शमशान जैसी जगहों पर निवास करते है। अघोरी पंथ का इतिहास बहुत पुराना है और ये कपालिक संप्रदाय के समकक्ष माने जाते है। ये शैव पंथ से संबध रखते है जो सबसे पुराने पंथो में से एक माना जाता है। अघोरी का मतलब होता है जो घोर नहीं हो जो सहज हो और सरल हो उसके लिये हमारे समाज के बनाये कोई नियम कायदे ना हो जिसके मन में कोई भेदभाव ना हो। अघोरियों के लिये भौतिक वस्तुएं कोई मायने नहीं रखती। उन्हें सडते जीव का मांस खाने में भी उतना ही आनंद आता है जितना स्वादिष्ट मिठाईयां खाने में।

कितनी तरह की साधनायें करते है अघोरी
अघोरीयों की साधना का तरीका भी बिलकुल अलग होता है। ये मुलतः तीन तरह की साधनायें करते है। शिव साधना, शव साधना और शमशान साधना। शिव साधना में भगवान शिव की कठोर साधना की जाती है। शव साधना में शव के उपर पैर रखकर साधना की जाती है इस साधना का मूल भगवान शिव की छाती पर काली माता का रखा पैर है। इस साधना में मुर्दे को मांस और मदिरा चढायी जाती है। इसके अलावा तीसरी साधना होती है शमशान साधना इसमें साधना का तरीका थोडा साधारण होता है इसमें शव की जगह दाहसंस्कार के स्थान की पूजा की जाती है। उस जगह गंगा जल चढाया जाता है और प्रसाद के रूप में भी मांस की जगह मावे और मीठे का प्रयोग किया जाता है। इस साधना में साधक के साथ उसके परिवार वाले भी सम्मिलित होते है।

साधना के लिये शव कहां से लाते है
अघोरी अक्सर अपनी साधना के लिये शव का उपयोग करते है। हिन्दुओं में अंतिम संस्कार के लिये शव का दाह संस्कार होता है। लेकिन सांप के काटने पर, आत्महत्या करने पर यो छोटी उम्र के बच्चों को दाह संस्कार के बजाय दफनाया जाता है। इसके अलावा अंतिम संस्कार के लिये कई जगह शव को नदी में बहा दिया जाता है। पानी में तैरते इन शवों को अघोरी अपनी साधना के लिये उपयोग में ले लेते है। शव साधना करने के साथ ही ये शव का मांस भी खा जाते है। इनकी साधना में इतना बल होता है कि ये मुर्दे से भी बातें कर लेते है।

अघोरियों के लिये प्रमुख साधना के स्थल
अघोरी अक्सर शमशान या एंकात में रहते है। अक्सर ये अपनी साधना के लिये रात का समय तय रखते है। अघोरियों की साधना के लिये दुनिया में चार ऐसे शमशान घाट है जहां उनकी साधना से जल्द सिद्धियां प्राप्त होती है।

1. तारापीठ
पश्चिम बंगाल के वीरभूमि जिले में तारा देवी का मंदिर है। तारा देवी माता काली के एक रूप में यहां विराजीत है। यह मंदिर इसलिये प्रसिद्ध है कि यहां पर माता सती के नेत्र गिरे थे। इसलिये इस जगह को नयनतारा भी कहा जाता है।मंदिर के पास ही एक शमशान स्थित है जिसे महाशमशान कहा जाता है यहां पास द्वारका नदी बहती है। इस शमशान में दूर दूर से अधोरी साधक साधना करने आते है।

2. कामख्या शक्ति पीठ
तंत्र साधना के लिये कामख्या शक्तिपीठ को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। यह मंदिर असम की राजधानी दिसपुर के पास एक पहाडी पर स्थित है। नीलशैल पर्वतमालाओं में स्थित मां भगवती कामख्या का शक्तिपीठ है जो सभी शक्तिपीठ में सर्वोच्च स्थान रखता है। यहां पर मां भगवती की महामुद्रा योनिकुंड स्थित है। यहां स्थित शमशान से दूर दूर से साधक साधना करने आते है।

3. त्रयंबकेश्वर ज्योर्तिलिंग नासिक
महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित त्रयंम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग में तीन छोटे छोटे लिंग है जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का रूप माना जाता है। यहां के ब्रह्म गिरी पर्वत से गोदावरी नदी का उद्गम भी है। भगवान शिव को सभी तंत्र साधना का मुख्य देवता माना जाता है। अघोरवाद और तंत्र का जन्म भगवान शिव से ही हुआ है। यहां के शमशान में भी अघोरी तंत्र साधना करते रहते है।

4. महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग उज्जैन
महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग सभी 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक है। इस मंदिर को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। यहां पर पुजा करने से अकाल मृत्यु का दोष भी समाप्त हो जाता है। यहां पर महाकाल की रोजाना भस्म आरती होती है। भगवान शिव का यह स्थान सिद्धियां पाने के लिये सर्वोत्तम माना गया है इसलिये यहां के शमशान में भी अघोरी साधक साधना करने दूर दूर स आते है।

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