जीवन का रहस्य क्या है, एक किसान की दिलचप्स कहानी

गाँव में रहने वाले एक किसान का इकलौता घोड़ा एक दिन कही भाग खड़ा हुआ उसके आस-पड़ोस वाले सभी लोग दुख जताने के लिए उसके पास आए। और फिर बोले भाई तुम्हारी खेती तो गयी अब बिना घोड़े के तुम हल कैसे चला पाओगे? ये तो बहुत ही बुरा हुआ।

किसान ने जवाब दिया– शायद बुरा हुआ या फिर शायद अच्छा हुआ

अगले दिन किसान ने देखा कि उसका घोड़ा वापस आ गया। और उसके साथ 6 जंगली घोड़े और आ गये पड़ोस वाले उसे बधाइयाँ देने पहुँच गये तुम्हारे तो मज़े आ गये अब तो तुम्हारे पास सात घोड़े हो गये तुम तो बड़े आदमी बन गए घोड़े का जाना यक़ीनन तुम्हारे लिए अच्छी किस्मत लेकर आया।

किसान ने फिर वही जवाब दिया – शायद हाँ या शायद ना।

अगले रोज़ किसान के बेटे ने एक जंगली घोड़े को पालतू बनाने के लिए उसकी पीठपर चढ़कर बैठने की कोशिश की। घोडा बहुत ही अड़ियल था उसने किसान के लड़के को झटककर अपनी पीठ से नीचे गिरा दिया ज़मीन पर गिरने से किसान के लड़के के पैर की हड्डी टूट गयी। ये सब देखकर फिर से पड़ोस वाले किसान के पास अफ़सोस जताने के लिए आ गये। व्यर्थ में आपका खर्चा बढ़ गया अब तो तुम्हारे काम में हाथ बटाने वाला भी कम हो गया अब तुम्हारा क्या होगा बड़ा ही बुरा टाइम चल रहा है।

किसान ने फिर से वही जवाब दिया – शायद हाँ, या शायद ना।

एक दिन अचानक से देश में जंग की घोषणा हो गयी। और फिर आर्मी के ऑफिसर गाँव-गाँव जाकर जवान लड़को को जबरदस्ती सेना में भर्ती करने लगे किसान के लड़के का पैर टूटने की वजह से वह बच गया। और आर्मी ऑफिसर के जाते ही किसान के पड़ोसी किसान को फिर से बधाई देने के लिए टूट पड़े। भाई तुम तो बड़े ही किस्मत वाले हो जंग में जाने वाले लोगो का जिन्दा वापस आने की सम्भावना तो ना के बराबर ही होती है। जो लड़के गये हैं क्या पता उनमे से कोई वापस आएं या न आए नसीब तुमपर बहुत ज़्यादा मेहरबान है।

किसान ने फिर से वही जवाब दिया- शायद हाँ या फिर शायद ना।

झूठ बोलना पाप होता है लेकिन झूठ बोलकर किसी की जान को बचाना बिलकुल भी गलत नहीं है। अगर किसी ने आपको धोखा दिया तो फिर आप सभी लोगों पर भरोसा करना छोड़ देते हो। लेकिन हर किसी पर अविश्वास करने से जीवन नही चल सकता है। बेईमान लोगो को देखकर तो यही लगता है कि अच्छाई का तो जैसे जमाना ही नहीं रहा फिर जब एक दिन बेईमान व्यक्ति को जेल हो जाती है तो फिर हमारी आँखें खुलती है।

दोस्तों यही जीवन है आज जो हमे सही लगता है। कल वह गलत लगने लगता है आज तो जो बुरा हुआ कल हमे उसके फायदे दिखाई देने लगते हैं जीवन की बढती हुई गाड़ी रोज़ हमे कोई न कोई नई सीख दे ही जाती है। क्या सही है और क्या गलत है यहाँ कोई पक्का फार्मूला नहीं है। इसलिए हमारे बड़े पूर्वज, ज्ञान ग्रन्थ कह गए हैं कि विवेक से काम लो, देखो, सोचो, समझो और फिर कोई निर्णय लो जड़ मत बनो

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