जीवन को दे आकार लौ, बाती, तेल और दीया

डा. अनामिका

जब भी हम दीया जलाते हैं तो, देखते है कि उसकी लौ ऊपर उठने का प्रयास करती है। यह प्रयास ही उन्नति का प्रतीक है। ऊपर जाकर दीपक की लौ धुएं की मलिनता का त्याग करती है। उन्नति की ओर अग्रसर होने पर अज्ञान व कालिमा स्वयं से दूर भागने लगती है। दीये की लौ ऊपर उठती है संसार को प्राश देने के लिए। लौ का ऊपर उठना उसकी स्वयं की भौतिक उन्नति तो है ही, साथ ही उसके द्वारा फैलाए गए प्रकाश से अन्य लोगों का मार्ग भी प्रकाशमय होता है। यह उसकी आत्मिक उन्नति भी है। मनुष्य की उन्नति भी तभी सार्थक है जब वह दूसरों के लिए उपयोगी हो।

सदाचार की प्रतीक बाती दीये में जलने वाली बाती रूई की बनती है। रूई का रंग सफेद होता है। सफेद रंग पवित्रता, सदाचार, ज्ञान व शांति का प्रतीक माना गया है। यदि हम रूई के टुकड़े को जलाना चाहें तो वह भप्प करके जल जाएगा। बाती बनाने के लिए हमें रूई में बल देकर उसे विशेष आकार देना पड़ता है। इसका अर्थ है इंद्रियों पर संयम रखकर ही मनुष्य सदाचारी बनता है। बाती स्वयं जलकर जग को प्रकाशमान करती है और अंधकार को अपने में समेट लेती है।

जिस प्रकार भगवान शिव संसार की भलाई के लिए हलाहल पीकर नीलकंठ कहलाए, उसी प्रकार बाती जग को आलोकित करने के लिए अपने स्वाभाविक श्वेत रंग को छोड़कर काली पड़ जाती है। मानव जीवन की सार्थकता भी त्याग, संयम व सदाचार में ही है। स्नेह एवं नम्रता का प्रतीक तेल दीवाली पर हम सरसों के तेल के दीपक जलाते हैं, जो वातावरण को शुद्ध करते हैं तथा हानिकारक कीट-पतंगों को मारते हैं।

तेल का पर्यायवाची शब्द है स्नेह । स्नेहवश ही वह बाती को जलाए रखने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा देता है। स्नेह में सबको अपना बना लेने की शक्ति है। तेल स्वयं को कहीं भी समायोजित कर लेता है। वह अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष नहीं करता। वातावरण के अनुकूल ही स्वयं को ढाल लेने में ही सफलता का रहस्य निहित है। यदि हम तेल द्वारा दिए गए संदेश को अपनाकर अपने को विनम्र रखें तो सब हमारे अपने हो जाएंगे और हम जीवन में आने वाली सभी बाधाओं को आसानी से सामना कर सकेंगे।

कोमलता का प्रतीक-पात्र मिट्टी की दीया तेल व बाती को आश्रय देकर उन्हें अनुशासित करता है। तेल को इधर-उधर बिखरने से रोकता है और बाती को उसके विशेष स्थान पर नियंत्रित रखता है। यदि यह नियंत्रण न हो, तो बाती लाभदायक होने के स्थान पर हानिकारक भी हो सकती है। मिट्टी बड़ी कोमल होती है। कुम्हार उसे कोई भी आकार दे सकता है। कोमलता बहुत बड़ा गुण है। जीवन में सफलता के लिए कोमलता अत्यंत आवश्यक है।

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