झाड़ू की घास से नकली जीरा बनाने वाली फैक्टरी का भंडाफोड़, पुलिस ने 4 मजदूरों को किया गिरफ्तार

नई दिल्ली: मसालों में मिलावट की खबरें आपने खूब पढ़ी सुनी होंगी, मगर नकली जीरा बनाने की फैक्ट्री के बारे में शायद इससे पहले न सुना हो। जी हां, बवाना थाना पुलिस ने फूल झाड़ू के चूरे से नकली जीरा बनाने वाली फैक्टरी का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पूंठखुर्द स्थित फैक्टरी से सरगना और वहां काम कर रहे चार मजदूरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने फैक्टरी से तकरीबन बीस हजार किलो नकली जीरा और 8075 किलो कच्चा पदार्थ बरामद किया है। शुरुआती जांच में पता चला कि आरोपी फूल झाड़ू के चूरे में गुड़ का शीरा और पत्थर का पाउडर मिलाकर नकली जीरा तैयार करते थे। जब ये सच्चाई सामने आई तो पुलिस भी हैरान रह गई।

बता दें कि गैंग पहले शाहजहांपुर में फैक्टरी चला रहा था। ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए आरोपियों ने दिल्ली में फैक्टरी खोली थी। आरोपी नकली जीरा की सप्लाई गुजरात और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में करते थे। पुलिस गैंग के एक अन्य सरगना व फाइनेंसर की तलाश में दबिश दे रही है। जिला पुलिस उपायुक्त गौरव शर्मा ने बताया कि आरोपियों की पहचान जलालाबाद, शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश निवासी हरिनंदन, कामरान, गंगा प्रसाद, हरीश और पवन के रूप में हुई है। बवाना थाने में तैनात हवलदार प्रवीण को पूंठखुद गांव में नकली जीरा बनने की जानकारी मिली।

प्रवीण ने आला अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। थाना प्रभारी धर्मदेव के नेतृत्व में पुलिस टीम ने निगरानी करने के बाद सोमवार शाम को खाद्य विभाग के अधिकारियों के साथ उक्त फैक्टरी में छापामारी की। फैक्टरी सुरेश कुमार के मकान में चल रही थी। छापामारी के दौरान सभी आरोपियों को नकली जीरा बनाते हुए गिरफ्तार कर लिया। मौके से पुलिस ने 485 बोरे नकली जीरा (एक बोरे में 40 किलो), 350 बोरे पत्थर का चूरा (एक बोरे में 15 किलो), 80 बोरे फूल झाड़ू का चूरा (एक बोरे में 20 किलो) और 35 ड्रम शीरा (एक ड्रम में 35 किलो) बरामद किए।

पुलिस पूछताछ में पता चला कि सभी आरोपी पहले जलालाबाद में नकली जीरा बनाते थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि जलालाबाद में रहने वाले अधिकतर लोग नकली सामान बनाते हैं। सरगना हरिनंदन ने बताया कि ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए उन लोगों ने अगस्त माह से दिल्ली में नकली जीरा बनाने लगा। करीब तीन माह पहले इन लोगों ने पूंठखुर्द गांव में सुरेश कुमार का घर किराए पर लिया था। जांच में पता चला कि गैंग का मुख्य सरगना लालू है। जो फिलहाल फरार है। लालू का काम कच्चा माल खरीदने से लेकर उसे बेचने की व्यवस्था करना था। शुरूआती जांच में पता चला है कि हरिनंदन का काम जीरा तैयार करने का था।

आरोपियों ने बताया कि सबसे पहले फूल झाड़ू का चूरा कर देते थे। इसके बाद गुड़ को गर्म कर उसका शीरा तैयार किया जाता था। शीरा में झाड़ू के चूरे को डालकर उसे मिला दिया जाता था। मिलाने के बाद उसे कुछ देर सुखाया जाता था। इसके बाद उसमें पत्थर का पाउडर मिलाया जाता था। फिर लोहे की बड़ी छलनी से उसे छान लिया जाता था। छलनी का छेद उतना बड़ा होता जिसमें से जीरा निकल सके।

जिला पुलिस उपायुक्त ने बताया कि आरोपी 80 किलो असली जीरा में 20 किलो नकली मिला देते थे। इससे गैंग को सौ किलो जीरा पर आठ हजार रुपये का फायदा होता था। जांच के दौरान पुलिस ने मकान मालिक को भी हिरासत में ले लिया है। पुलिस उससे पूछताछ कर यह जानकारी हासिल कर रही है कि वह हरिनंदन को कैसे जानता था। उसकी हरिनंदन से कैसे मुलाकात हुई। क्या उसने अपने यहां रहने वालों का सत्यापन कराया था या नहीं। क्या उसे इस बात की जानकारी थी कि आरोपी नकली जीरा बनाने का काम करते हैं।

सफदरजंग अस्पताल के डॉ. जुगल किशोर बताते हैं कि पहले भी देश के अलग अलग राज्यों से मिलावटी जीरा से जुड़ी खबरें आई हैं। मिलावटी जीरे में घातक रसायन और डाई का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही इसे बनाने में पत्थरों का इस्तेमाल भी करते हैं। यह सीधे तौर पर कैंसर को बढ़ावा दे सकता है। साथ ही इससे किडनी पर असर पड़ सकता है। मिलावटी जीरे के इस्तेमाल से लिवर को भी नुकसान हो सकता है। डॉ. किशोर का कहना है कि बाजार में भी सस्ते दामों में जीरा ड्रिंक बिक रहा है, इसकी गुणवत्ता को लेकर भी लोगों को सतर्क रहना आवश्यक है।

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