डायबिटीज का अब स्मार्ट इलाज

असंयमित जीवनशैली, खान-पान, तनाव, चिंता के कारण डायबिटीज यानी मधुमेह के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनकी सर्वाधिक संख्या एशिया में और एशिया में सबसे ज्यादा भारत में है। यह बीमारी एक बार जकड़ ले, तो उम्रभर पीछा नहीं छोड़ती। हां, आहार, व्यायाम, दवाइयों से इसको नियंत्रण में रखा जा सकता है। इंसुलिन के इंजेक्शनों पर निर्भर मधुमेह के रोगियों को दिन में कई बार इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं। यह दर्द और तनाव का कारण बन जाते हैं। इंसुलिन पर निर्भर रोगियों का दर्द कम करने और रोग पर उचित नियंत्रण रखने के लिए अब कुछ नयी तकनीकें व डिवाइस विकसित कर लिए गये हैं। ऐसे ही 3 डिवाइसेज पर एक नजर…

ई-पोर्ट यानी इंजेक्शन पोर्ट

यह एक छोटा, सुविधाजनक पैच है जो शरीर पर बैंड-एड की तरह चिपक जाता है। बिल्ट-इन-इन्सर्टर त्वचा के भीतर इंजेक्शन रोपित कर देता है। ई-पोर्ट को हर तीन दिन के बाद बदलना पड़ता है। इसको लगाने के बाद इंजेक्शन के लिए हर बार त्वचा में सूई नहीं लगानी पड़ती। सिरिंज अथवा पेन से पोर्ट के माध्यम से इंसुलिन डाल सकते हैं। यदि रोगी को प्रतिदिन 5 इंजेक्शन लगाने के लिए शरीर में 5 बार सुई चुभोनी पड़ती थी, तो अब केवल एक बार से ही काम चल जाएगा। एक महीने में सूई लगाने की संख्या 93 फीसदी कम हो जाएगी। ई-पोर्ट को शरीर में पेट के ऊपर, बांह के ऊपरी भाग, बांह के पीछे अथवा कूल्हे पर लगाया जा सकता है।

इंसुलिन पम्प

यह सेलफोन के आकार का छोटा डिवाइस है। इसको बाहर पहना जा सकता है, बेल्ट में सावधानीपूर्वक टांगा जा सकता है या कपड़ों के भीतर रखा जा सकता है। यह रोगी को आवश्यकतानुसार उसके शरीर में शीघ्र प्रभावी इंसुलिन पहुंचाता रहता है। इंसुलिन पम्प के तीन पार्ट होते हैं। सामान्यतः बैटरी द्वारा संचालित होता है। इसके साथ इंसुलिन दवा का डिब्बा रहता है। पम्प करने के लिए एक उपकरण और सप्लाई रोकने के लिए एक बटन होता है। पम्प के साथ प्लास्टिक की एक ट्यूब, कैथेटर होती है। जहां पर इंसुलिन पंहुचानी होती है, उस जगह पर त्वचा के भीतर लगा दिया जाता है। इसके अलावा स्टील अथवा टेफलॉन का एक इंफ्यूजन सेट होता है। इसे पेट की त्वचा पर चिपका दिया जाता है। इंसुलिन का इंजेक्शन यहीं से लगाया जाता है।

सीजीएमएस

कुछ रोगियों के लिए ब्लड शुगर के स्तर पर सतत निगरानी रखना अत्यावश्यक होता है। ऐसे रोगियों के लिए सीजीएमएस (कन्टीन्युअस ग्लूकोज मॉनिटरिंग सिस्टम) डिवाइस उपयोगी है। यह दिन-रात, 24 घंटे रोगी के ब्लड शुगर के स्तर पर निगरानी रखता है। प्रत्येक 5 से 15 मिनट के अंतराल पर इसमें ब्लड शुगर के आंकड़े अपने आप आते रहते हैं। इस डिवाइस में छोटा-सा सेंसर होता है। यह सेंसर पेट की त्वचा के नीचे बिना किसी दर्द के आसानी से लग जाता है। सेंसर पर ट्रांसमीटर लगा होता है। सेंसर ब्लड शुगर मापता है और ट्रांसमीटर से बेल्ट पर लटके अथवा जेब में रखे वायरलेस पेजर पर ब्लड शुगर की रिपोर्ट भेजता रहता है।

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