ड्रोन से पहुंचे वैक्सीन लगवाने वाला पहला बच्चा, बना ज्वाय

संयुक्त राष्ट्र: दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित द्विपीय देश वॉनवॉटू का एक माह का ज्वाय नोवाई ड्रोन से भेजे गये वैक्सीन लगाने वाला विश्व का पहला बच्चा बना गया है। संक्रामक रोगों से रोकथाम के लिए इस नवजात का टीकाकरण किया गया है। यह द्वीप-समूह करीब 80 छोटे-छोटे द्वीपों से मिलकर बना है। वर्ष 2006 में वॉनवॉटू धरती की सबसे खुशहाल जगहों की सूची में पहले स्थान पर आया था।

यूनाइटेड नेशन्स चिल्ड्रेंस फंड(यूनीसेफ) के कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फोर ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि वॉनवॉटू के सदूर बीहड़ पहाड़ी क्षेत्र में स्थित डिलास बे से 40 किलोमीटर पश्चिम स्थित कूक्स बे के लिए ड्रोन से वैक्सीन भेजे गए थे। इस क्षेत्र के 13 बच्चों और पांच गर्भवती महिलाओं को कल टीके लगाए गए। फोर ने कहा, यह विश्व के कोने-कोने के बच्चों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

आज विश्व जहां अभी दूर-दराज के क्षेत्रों के बच्चों तक स्वास्य सेवाओं की पहुंच सुगम बनाने के लिए संघर्षरत है। उन्होंने कहा कि कूक्स बे रहने वाले लोग बिजली और स्वास्य सेवाओं से वंचित हैं और केवल पैदल अथवा छोटी नौकाओं के माध्यम से ही इस स्थान तक पहुंचा जा सकता है। विश्व के पहले बच्चे को ड्रोने से आने वाले वैक्सीन लगाने वाली नर्स मरियम नामपिल ने कहा, नदियों ,बीहड़ पहाड़ों और बारिश आदि कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए ड्रोन के माध्यम से वैक्सीन का पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण है।

वैक्सीन का सही तापमान में बने रहना सर्वाधिक मुश्किल काम है। इसके पहले नौकाओं के माध्यम से ही इस क्षेत्र में वैक्सीन पहुंच पाते थे जो बारिश के समय में संभव नहीं होता था। उसने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि इस क्षेत्र के सुदूर क्षेत्रों के और बच्चों तक वैक्सीन पहुंच सकेंगे। श्री फोर ने कहा कि ड्रोन के इस सफल प्रयोग से विश्व के कोने-कोने के बच्चों तक वैक्सीन पहुंचाने का नया रास्ता खुल गया है।

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लखनऊ ट्रिब्यून

Vineet Kumar Verma

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