तबस्सुम होंगी यूपी से पहली मुस्लिम सांसद

धनंजय सिंह

लखनऊ ब्यूरो। कैराना उपचुनाव में रालोद प्रत्याशी बेगम तबस्सुम हसन की जीत के साथ ही यूपी की पहली मुस्लिम सांसद होंगी। 16वीं लोकसभा में 80 लोकसभा सीटों वाले प्रदेश से एक भी मुस्लिम प्रत्याशी लोकसभा में प्रवेश नहीं कर पाया था।

2014 की लोकसभा चुनाव में चली मोदी की लहर में बीजेपी के खिलाफ सभा पार्टियों का लगभग सूपड़ा साफ हो गया। मुस्लिम हितैशी मानी जाने वाली समाजवादी पार्टी अपने परिवार की 5, कांग्रेस अपनी परंपरागत सीट अमेठी और रायबरेली को ही बचाने में कामयाब हो पाई थी। जबकि मायावती की बसपा एक भी सीट नहीं जीत पाई।

केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद मुसलमानों की राजनीतिक हालत बहुत ही खऱाब हो गई। अगर हम पिछले कुछ सालों के चुनाव को देखें तो मुसलमानों को भी ये बात समझ में आ गई है कि कौन-सी पार्टी सत्ता में आएगी यह तय करने की ताकत उनके वोट बैंक में नहीं रह गई है। उपचुनाव ही सही आखिरकार 16वीं लोकसभा का समय बीतते-बीतते यूपी से एक मुस्लिम सांसद देश की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंच गयी।

लोकसभा में कुल 23 सांसद

16वीं लोकसभा में अभी केवल 23 सांसद मुस्लिम समुदाय से हैं। 543 सदस्यीय लोकसभा में यह हिस्सेदारी कुल 4.2 प्रतिशत है। जबकि देश की जनसंख्या में मुसलमानों की हिस्सेदारी 14.2 प्रतिशत है। 2014 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिम सांसद सिर्फ सात राज्यों पश्चिम बंगाल, बिहार, जम्मू कश्मीर, केरल, असम, तमिलनाडु, तेलंगाना और एक केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप से चुने गए हैं। इन राज्यों में कुल मुस्लिम जनसंख्या के 46 प्रतिशत लोग रहते हैं। अब यह संख्या 24 हो जाएगी।

मुस्लिम बाहुल्य वाले इन प्रदेशों से नहीं है कोई सांसद

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, झारखंड, दिल्ली, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश समेत 22 राज्यों और छह केंद्र शासित प्रदेशों से कोई मुस्लिम प्रतिनिधि चुनकर संसद नहीं पहुंचा है। जबकि यह राज्य मुस्लिम बाहुलय है।

यूपी की कुल जनसंख्या में मुस्लिम आबादी 19 प्रतिशत

उत्तरप्रदेश की कुल जनसंख्या लगभग 20 करोड़ है। इसमें मुस्लिमों की आबादी करीब १५ फीसदी है। शहरी इलाकों में उनकी मौजूदगी करीब ३० प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में १२ फीसद है। बावजूद इसके मुस्लिम समुदाय के कोई भी नेता का लोकसभा न पहुंचना चौंकाने वाला है। हालांकि इसके लिए नेतृत्व से ज्यादा राजनीतिक कारण जिम्मेदार हैं।

राजनीतिक गुणा-गणित में विपक्ष की प्रत्याशी तबस्सुम हसन

भाजपा सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद खाली हुई पश्चिमी यूपी की कैराना सीट पर उपचुनाव की घोषणा होने के साथ ही विपक्षी पार्टियों में गठबंधन की कवायद हुई। क्षेत्र में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही रालोद किसी भी कीमत पर यह सीट जीतकर अपना जनाधार बनाए रखना चाहती थी, साथ सपा का मिला तो प्रत्याशी क्षेत्र की बड़े राजनीतिक घराने की बहू व पूर्व सांसद तबस्सुम हसन बनाई गई।

रालोद प्रमुख चौधरी अजीत सिंह तबस्सुम हसन के सहारे पश्चिमी यूपी में बिखरी जाट-मुस्लिम वोटों को फिर से एक कर अपनी राजनीतिक जमीन पाने की कोशिश में जुट गए, सफालता भी मिली, लेकिन गठबंधन के आधार पर टिकी यह कामयाबी आगे तबतक जारी रहेगी यह देखने वाली बात है। इन सबके बीच तबस्सुम हसन के रूप में यूपी से पहली मुस्लिम सांसद लोकसभा में पहुंच गई है।

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