दलित के घर भोजन करने के बाद कैबिनेट मंत्री मोती सिंह ने की राम-शबरी से तुलना

लखनऊ: 2019 के लोकसभा चुनाव जैसे जैसे करीब आ रहे हैं वैसे वैसे सभी राजनीतिक दल अपने वोट बैक को मजबूत करने में जुटे हुए हैं। इस मामले में बीजेपी सबसे आगे है। इन दिनाें बीजेपी के कई दिग्गज नेता और उनके मंत्रीगण दलिताें के यहां खाना खाने काे लेकर सुर्खियाें में हैं।

इसी कड़ी में झांसी के एक दिन के दौरे पर आए जिले के प्रभारी मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ़ मोती सिंह ने गढ़मऊ गांव में चौपाल लगाई। जिसके बाद दलित परिवार के घर रात्रि भोजन की परंपरा का भी निर्वहन किया। उनके साथ अन्य विधायकों और कार्यकर्ताओं ने भी वहां पर खाना खाया। दलित के घर खाना खाने को खुद का सौभाग्य बताते हुए प्रभारी मंत्री ने कहा कि दलित के घर खाना बहुत ही सुखद अनुभव होता है।

इस दौरान राजेंद्र सिंह ने कहा कि हर व्यक्ति को रात में भूख लगती है। हर कोई घर का बना पकवान खाता है। मुझे भी एक दलित के घर में बने पकवान खाने का सौभाग्य मिला। उनका कहना है कि डाक बंगले की घी से चुपड़ी रोटी मत खाइए। जरा जाइए ‘राम के शबरी’ के यहां उसकी सुखी रोटी में कितना दम है उसे मुंह से पेट में डालकर अंदाजा लगाइए उसमें कितनी उर्जा मिलती है और कितनी शक्ति मिलती है। कितना मजबूत भाईचारे का संचार आपके शरीर में होता है उसे प्राप्त कीजिए।

उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान रामायण की शबरी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि राम ने भी शबरी के जूठे बेर खाए थे। मैं प्रदेश सरकार के मंत्री के रूप में पुनः साधुवाद देना चाहूंगा देश के प्रधानमंत्री को जिन्होंने हमें इस दिशा की ओर मोड़ा। राजेंद्र प्रताप आज जब ज्ञानजी की मां ने मुझे रोटी परोसी तो उन्होंने कहा मेरा उद्धार हो गया। किसी राजा के यहां भोजन किया होता तो शायद उनकी मां ने ये न कहा होता।

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