दहेज में दूल्हे ने मांगी थी कार, ससुराल पहुंचते ही दुल्हन ने ऐसे सिखाया सबक

देश भले ही कितना बदल जाये लेकिन दहेज प्रथा कभी नहीं खत्म हो सकती है. इस दहेज की वजह से ना जाने कितनी भोली-भाली लड़कियां जिंदा जलाई जाती हैं तो कितनी लड़कियों का घर तबाह हुआ है. बेटी सुखी रहे उसके लिए गरीब माता-पिता अपना सालों जमा पुंजी को दहेज के रूप में दे देते हैं और उसके बाद भी ससुराल में लड़कियों को सिर झुकाकर, ताने सुनकर और आंसू बाहकर जिंदगी गुजारनी होती है. आज हम आपको एक ऐसी कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं जब लड़की दहेज के लालची पति को कुछ इस तरह सबक सिखाती है.

दरअसल लड़का शादी में लड़की वालो से महंगी गाड़ी की डिमांड करता है और लड़की के पिता देते भी हैं. शादी भी अच्छी तरह निपट जाती है और दूसरे दिन लड़का लड़की उसी गाड़ी से घुमाने ले जाता है. लड़का तेज स्पीड में गाड़ी चला रहा होता है जिस पर लड़की उसे धीमी कार चलाने को कहती है. ऐसे में लड़का कहता है कि क्या यार अभी तक अपने दोस्तों की कार पर घूमता था आज अपनी कार है तो तुम चलाने भी नहीं दे रही हो.

लड़का-लड़की के बातों का सिलसिला चल ही रहा था कि तभी बीच में भिखारी जा जाता है और लड़के की स्पीड आसमान छू रही होती है. जैसे-तैसे लड़का कार को घुमाकर साइड में घुस जाता है और भिखारी और कार में बैठे लड़का-लड़की सुरक्षित बच जाते हैं. लड़की कार से उतरती है और बाहर देखती है कि भिखारी के पैर नहीं थे. लड़की अपनी पर्स से 100 का नोट निकालती है और उसे देते हुए बोलती है कि मेरी शादी हुई है काका ये पैसे रख लो मिठाई खा लेना और दुआएं और अशीर्वाद देना.

भिखारी से इतनी बात करते हुए लड़की वापस गाड़ी में जाकर बैठ जाती है. लड़का लड़की से बोलता है कि तुम जैस लोगों की वजह से इन भिखारियों के दिमाग खराब रहते हैं. कहीं भी मांगते दिख जाते हैं. लड़की मुस्कुराते हुए बोलती है कि भिखारी की तो मजबूरी है वो चल नहीं सकता है इसलिए मांग कर खा रहा है तुम्हारी तो कोई मजबूरी नहीं थी तब भी तुमने गाड़ी मांगी तो बेवश भिखारी हैं या तुम…लड़की के इस जबाव के बाद लड़का अपनी नजरें नहीं मिला पाया.

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