दाती रेप केस में हलफनामा दायर करे पीड़िता तब सीबीआई जांच

Published: 11/07/2018 1:37 PM

नई दिल्ली: दाती महाराज के खिलाफ रेप मामले की सीबीआई जांच की मांग करनेवाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता एनजीओ सिटिजन फोरम फॉर सिविल राईट्स को निर्देश दिया कि वो पीड़िता का हलफनामा दायर करें जिसमें ये जिक्र हो कि वो इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच से हटाकर सीबीआई को सौंपना चाहती है। कोर्ट ने कहा कि अब यह याचिका जनहित याचिका से आपराधिक मामले में तब्दील हो गया है।

पिछले 6 जुलाई को हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाते हुए पूछा था कि अब तक उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है। कोर्ट ने पूछा था कि एक महीने स ऊपर हो गए हैं, अब तक आपने क्या किया। आपको अंदाजा है कि यौन उत्पीड़न और शोषण के क्या मायने हैं। याचिका एक एनजीओ सिटिजन फोरम फॉर सिविल राईट्स ने दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली पुलिस पक्षपातपूर्ण जांच कर रही है। अब तक इस मामले में आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इससे गवाह प्रभावित हो सकते हैं एवं सबूत नष्ट हो सकते हैं। आरोपी के देश छोड़कर भागने की आशंका है।

याचिका में कहा गया है कि दाती के खिलाफ 7 जून को शिकायत दर्ज कराई गई। लेकिन एफआईआर 11 जून को दर्ज हुई। पुलिस दाती महाराज से पूछताछ भी कर चुकी है लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं किया गया है। दिल्ली की साकेत कोर्ट भी दाती महाराज को गिरफ्तार न करने सवाल उठा चुकी है। चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पूजा तलवार ने क्राइम ब्रांच के डीसीपी से जवाब मांगा था। पिछले 26 जून को कोर्ट ने डीसीपी से हर हफ्ते विस्तार से जांच का स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट को बताने का निर्देश दिया था।

पिछले 25 जून को क्राइम ब्रांच ने साकेत कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल किया था। क्राइम ब्रांच ने अपने स्टेटस रिपोर्ट में कहा था कि दाती महाराज के खिलाफ जांच चल रही है और जांच को मुकाम पर ले जाने की कोशिश हो रही है। साकेत कोर्ट के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अनुराग दास ने इस मामले को चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पूजा तलवार के समक्ष सुनवाई के लिए भेज दिया।

3 पेज के स्टेटस रिपोर्ट में क्राइम ब्रांच ने कहा था कि ये मामला दो साल पुराना है और सभी तथ्य और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज जब्त किया गया है और गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक उसने पिछले 19 जून को दाती महाराजसे विस्तृत पूछताछ की जिसमें अभियुक्त ने अपने खिलाफ आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

पिछले 21 जून को कोर्ट ने क्राइम ब्रांच से स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। इस मामले की पीड़िता ने दिल्ली पुलिस पर जांच में ढुलमुल रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।

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