दाल-रोटी से भागा कोरोना, जानिये कैसे जीत पाई महामारी पर

लखनऊ : हमारे अपने सादे खाने में बहुत ताकत है। यह बात अब साबित हो चुकी है। तभी तो न कोई दवा और न कोई इलाज, बस नियमित सादे भोजन से आठ कोरोना संक्रमित मरीजों को नया जीवन मिला है।

दरअसल, प्रयागराज के कोटवा अस्पताल में नौ कोरोना संक्रमित मरीज रखे गए थे। इनमें से अब तक आठ लोग स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। बाकी एक संक्रमित युवक भी ठीक हो रहा है। 14 दिनों तक उन्हें यहां सिर्फ सादा नाश्ता और खाना (दाल-रोटी) दिया जाता था। अस्पताल के नोडल अधिकारी डॉ. वीके मिश्रा की मानें, तो उन्हें वहीं खाना दिया जाता जिससे उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सके। तेल, मसाला व तीखा नहीं दिया जाता है। पीने के लिए पानी भी आरओ का मिलता है।

संक्रमित लोगों को सुबह सात बजे चाय के साथ बिस्किट व नमकीन दी जाती है। नौ बजे उन्हें हल्का नाश्ता जैसे पोहा, सादी पकौड़ी आदि दिया जाता है। दोपहर करीब 12 बजे उन्हें खाना मिलता है। इसमें दाल, रोटी, चावल और सब्जी होती है। दाल कभी अरहर की होती है, तो कभी मिक्स। कभी-कभी राजमा आदि भी दिया जाता है। दोपहर बाद तीन से चार बजे के बीच उन्हें खाने के लिए फल मिलता है। इनमें संतरा, केला के साथ अन्य मौसमी फल होते हैं। पांच बजे के आसपास फिर चाय, बिस्किट और नमकीन दिया जाता है। इसके बाद रात में करीब नौ बजे फिर सादा खाना दाल, रोटी, चावल और सब्जी खाने में मिलता है। पूरे 14 दिनों तक यहीं उनका रुटीन होता है।

हालांकि कोरोना संक्रमित लोगों का कोई इलाज नहीं है। 14 दिनों तक क्वारंटीन के दौरान सादे व नियमित खाने के अलावा अगर उन्हें कोई दिक्कत होती है तो उसकी दवाएं दी जाती हैं। जैसे बुखार है तो बुखार की दवा, शरीर में दर्द या खांसी है, तो उसकी ही दी जाती है। इसके अलावा एक एंटी बायोटिक गोली देते हैं। इस तरह से 8 लोगों में कोरोना ख़त्म हो गया है।

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